अनूठी पाठशाला- पेड़ के नीचे लगती है बच्चोंं की क्लास

By: deepak deewan

Updated On:
25 Aug 2019, 02:12:03 PM IST

  • पेड़ के नीचे लगती है बच्चोंं की क्लास

खंडवा. कुपोषण दूर करने व छोटे बच्चों को सुविधा देने के लिए सरकार चाहे कितना भी ढिंढोरा पीटे लेकिन जमीनी धरातल पर इसकी हकीकत कुछ ओर ही होती है। बच्चों को किस तरह सुविधा देने का विकास हो रहा है। इसका अंदाजा पंधाना तहसील के इस्लामपुर पंचायत के आंगनवाड़ी क्रमांक 3 शिवपिंडी से लगा सकते है।
आंगनवाड़ी का पिछले ढाई-तीन सालों से स्थायी आसरा नहीं है। जिससे यहां आंगनवाड़ी कभी किराए के कमरे तो कभी झोपड़े को अपना आसरा बना लेती है। अब भुगतान के अभाव में किराए का कमरा छिनने के बाद गांव के चबूतरे पर नीम के पेड़ के नीचे आंगनवाड़ी के 20 बच्चे पढ़ रहे हैं। पिछले एक माह से यह आंगनवाड़ी पेड़ के नीचे चल रही है। खुले में बैठकर बच्चे दूध व दलिया खा रहे हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नेहा ढाक्सेे भी खुले में बैठकर बच्चों को पढ़ाने और शासकीय कामकाज निपटाने को मजबूर हैं। लेकिन इस गंभीर समस्या को ठीक करने की ओर महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी, सरपंच/सचिव व जनपद पंचायत पंधाना के जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जा रहा। कोई भी अधिकारी पंचायत के स्थायी भवन बनाने या किराए के भवन के लिए नहीं सोच रहा। ऐसे में कार्यकर्ता, सहायिका और बच्चों को परेशानी उठाना पड़ रहा है।
&भुगतान नहीं होने की वजह से मकान मालिक ने भवन खाली करा दिया था। भुगतान कराने के बाद सुपरवाइजर को भेजकर जुलाई से किराए के कमरे में आंगनवाड़ी लगाना शुरू कराया। पेड़ के नीचे लगने की मुझे जानकारी नहीं है। पता कर निराकरण कराता हूं।
रुपसिंह सिसोदिया, परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग पंधाना
&आंगनवाड़ी भवन के लिए प्रस्ताव बनाकर एक साल पहले जनपद पंचायत भवन को भेजा है। स्वीकृति अभी तक नहीं आई है। जिससे भवन बनने में देरी हो रही है। मधु साकले, सचिव, ग्रामपंचायत इस्लामपुर
स्वयं के खर्च से ऊ परी हिस्सा पॉलीथिन से ढंका
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नेहा ने बताया भवन की समस्या पिछले एक साल से बनी हुई है। पहले गांव के रामलाल बारेला के मकान में किराए से लगती थी। पिछले साल उन्होंने ने खाली करा दिया। फिर मैंने और सहायिका उमाबाई ने एक हजार रुपए मिलाकर गांव के शासकीय ओटले पर ऊ परी हिस्से को पॉलीथिन से ढंका। फिर वहां कुछ माह तक आंगनवाड़ी लगाई। पॉलीथिन फटने के बाद पिछले एक माह से पेड़ के नीचे आंगनवाड़ी लग रही है। बारिश होने पर उसी पुराने किराए के भवन में आंगनवाड़ी लगाते हैं।
जिले में 1631 आंगनवाड़ी, 253 किराए के भवन में
जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की 1631 आंगनवाडिय़ां है। 1246 आंगनवाड़ी केंद्रों के पास स्वयं का भवन हैं। 253 आंगनवाड़ी केंद्र किराए के भवन में संचालित है। 132 केंद्र ऐसे हंै जिनके पास न स्वयं का भवन है और किराए के भवन। धर्मशाला या भवन में बिना की शुल्क के लग रही है।
स्वयं के खर्च से ऊ परी हिस्सा पॉलीथिन से ढंका
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नेहा ने बताया भवन की समस्या पिछले एक साल से बनी हुई है। पहले गांव के रामलाल बारेला के मकान में किराए से लगती थी। पिछले साल उन्होंने ने खाली करा दिया। फिर मैंने और सहायिका उमाबाई ने एक हजार रुपए मिलाकर गांव के शासकीय ओटले पर ऊ परी हिस्से को पॉलीथिन से ढंका। फिर वहां कुछ माह तक आंगनवाड़ी लगाई। पॉलीथिन फटने के बाद पिछले एक माह से पेड़ के नीचे आंगनवाड़ी लग रही है। बारिश होने पर उसी पुराने किराए के भवन में आंगनवाड़ी लगाते हैं।
स्वयं के खर्च से ऊ परी हिस्सा पॉलीथिन से ढंका
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नेहा ने बताया भवन की समस्या पिछले एक साल से बनी हुई है। पहले गांव के रामलाल बारेला के मकान में किराए से लगती थी। पिछले साल उन्होंने ने खाली करा दिया। फिर मैंने और सहायिका उमाबाई ने एक हजार रुपए मिलाकर गांव के शासकीय ओटले पर ऊ परी हिस्से को पॉलीथिन से ढंका। फिर वहां कुछ माह तक आंगनवाड़ी लगाई। पॉलीथिन फटने के बाद पिछले एक माह से पेड़ के नीचे आंगनवाड़ी लग रही है। बारिश होने पर उसी पुराने किराए के भवन में आंगनवाड़ी लगाते हैं।
किराए

Updated On:
25 Aug 2019, 02:12:03 PM IST

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