जानिए, कहां होगी  विश्व के पहले बैंड पर संस्कृत गीतों की प्रस्तुति

  • चिचोट कुटी में वैदिक विद्यापीठम निर्माण के शिलान्यास समारोह में विश्व का प्रथम संस्कृत संगीत वृंद ध्रुवा द्वारा दी जाएगी प्रस्तुति, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रहेंगे मौजूद
हरदा। नर्मदा किनारे चिचोट कुटी (छोटी छीपानेर) में संचालित वैदिक विद्यापीठम निर्माण के शिलान्यास समारोह में विश्व का प्रथम संस्कृत संगीत वृंद (बैंड) ध्रुवा द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। 26 मार्च को आयोजित इस भव्य समारोह में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व विशिष्ट अतिथि स्वामी जयंतानंद महाराज (नांदवा कुटी), स्वामी मोक्षप्रदानंद महाराज (मणिनागेश्वर, गुजरात), रोशनलाल सक्सेना (मार्गदर्शक विद्याभारती, मध्य क्षेत्र भोपाल) रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सुरेश अवस्थी (भागवत कथावाचक, ग्वालियर) करेंगे। मुख्य वक्ता पं. श्यामस्वरूप मनावत (श्रीराम कथावाचक, उज्जैन) रहेंगे। विद्याभारती मध्य क्षेत्र सह संगठन मंत्री निरंजन शर्मा ने बताया कि ध्रुवा बैंड में शामिल कलाकार देश के अलग-अलग क्षेत्रों में निवास करते हैं। वेद में समाहित भरतमुनि के नाट्यशास्त्र के अध्ययन के बाद इन्होंने इसकी स्थापना की। इस मौके पर  नर्मदा लहरी संगीत पथक महेश्वर द्वारा संस्कृत में गीत-संगीत तथा निमाड़ क्षेत्र के गायक द्वारा लोकगीतों की प्रस्तुति दी जाएगी।
वैदिक विद्यापीठम में 2025 तक श्रेष्ठ संतति विज्ञान का शोध भी होने लगेगा :
विद्यापीठम में वर्ष 2025 तक श्रेष्ठ संतति विज्ञान का शोध भी होगा। यानि महिला के गर्भधारण के पूर्व तथा बाद में दंपत्ति पर उनकी इच्छा अनुसार संतान के प्रयोग किए जाएंगे। यहां नवदंपत्ति को प्रवेश दिया जाएगा। नर्मदा के उद्गम अमरकंटक से समुद्र में समागम स्थल भरूच तक दोनों किनारों पर वैदिक विद्यापीठम की 100 शाखाएं भी खोली जाएंगी। प्रबंधन के अनुसार इस कार्य पर करीब 125 रुपए खर्च कर विद्यापीठ को विश्वस्तरीय बनाया जाएगा। फिलहाल विद्यापीठ का संचालन श्री बजरंगदास आश्रम में हो रहा है। यहां 24 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
स्वामी तिलक दास जी ने की थी परिकल्पना :
शर्मा ने बताया कि ब्रह्मलीन बजरंगदास बाबा जब चिचोट कुटी में साधनारत थे तब कासगंज (उप्र) निवासी तिलक सिंह परमार नर्मदा परिक्रमा करते यहां पहुंचे। कालांतर में वे बजरंगदास बाबा के परम शिष्य रहे। उन्होंने विश्व के 70 देशों का भ्रमण कर वेदों का प्रचार किया। तिलक दास महाराज ने ही यहां वैदिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए विद्यापीठम शुरू करने की परिकल्पना की थी। श्री बजरंगदास कुटी की 24 एकड़ जमीन पर स्वामी तिलक वैदिक विद्या समिति चिचोट कुटी द्वारा इसे साकार किया जाएगा।
वैदिक प्रतिभा खोज परीक्षा से होता है प्रवेश :
विद्यापीठम में सरस्वती शिशु मंदिर में पढऩे वाले बच्चों की अलग-अलग स्तर पर वैदिक प्रतिभा खोज परीक्षा लेकर प्रवेश दिया जाता है। शुरुआत में यहां कक्षा 6 से 12 तक का पाठ्यक्रम रहेगा। अलग-अलग चरणों में इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
पहले चरण में खर्च होंगे 11 करोड़ रुपए :
संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, संरक्षण और संवर्धन व वैदिक ज्ञान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए ग्रंथों का अध्ययन आदि उद्देश्य की पूर्ति के लिए चिचोट कुटी में स्थापित वैदिक विद्यापीठ के निर्माण के पहले चरण में 11 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके तहत 2 करोड़ रुपए खर्च कर 32 कक्षों का निर्माण कराया जाएगा। वहीं 1-1 करोड़ रुपए से 20 आचार्य आवास, 16 कक्ष, सभागृह, नर्मदा घाट व वैदिक प्रदर्शनी का निर्माण होगा। योग एवं ध्यान केंद्र, यज्ञशाला, देवालय, गौशाला आदि का निर्माण भी होगा। प्रबंधन के अनुसार 2025 तक करीब 125 रुपए खर्च कर विद्यापीठ को विश्वस्तरीय बनाया जाएगा।