बस्ते का दोगुना बोझ लाद रहे बच्चे, सरकार ने कम करने के आदेश दिए, सप्ताहभर बाद भी अमल नहीं

By: Sanjeev Dubey

Published On:
Jul, 12 2019 08:00 AM IST

  • लोक शिक्षण संचालनालय से निर्देश मिलने की राह ताक रहे शिक्षा विभाग के अधिकारी, स्कूल शिक्षा विभाग ने तय किया है कक्षावार बस्ते का वजन

हरदा. स्कूली बच्चों के बस्ते का वजन कम करने को लेकर सरकार एक बार फिर जागी और राजधानी से इस संबंध में आदेश प्रसारित हुए, लेकिन ये सप्ताहभर बाद भी जिले तक नहीं पहुंचे। इसके चलते इन पर अमल नहीं हो सका। बच्चे अब भी तय मापदंड से दोगुने वजन वाले बस्ते लेकर स्कूल जा रहे हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव प्रमोद सिंह द्वारा 3 जुलाई को दिए गए आदेश के मुताबिक केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन करते हुए सभी सरकारी, निजी व अनुदान प्राप्त स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के बस्ते का वजन कम करने के लिए यह कार्रवाई की गई है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य शासन तथा एनसीईआरटी द्वारा नियत पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकें बच्चे के बस्ते में नहीं होना चाहिए। कक्षा 1 व 2 के लिए भाषा तथा गणित विषय और कक्षा 3 से 5 तक के लिए इन दोनों विषयों के साथ पर्यावरण अध्ययन विषय का शिक्षण अनिवार्य किया गया है। शैक्षणिक संदर्भ सामग्री तथा वर्कबुक्स रखने की व्यवस्था स्कूल में ही करने को कहा गया है। साथ ही बच्चों के मनोरंजन और खेलकूद को स्कूल समय में पर्याप्त स्थान देने तथा प्राथमिक स्तर की कक्षा विशेष रूप से कक्षा 1 व 2 में बच्चों को होमवर्क नहीं देने के भी निर्देश हैं। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू होना था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार वाट्सएप पर शासन के इस आदेश की कॉपी वायरल हुई है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा इस आशय के निर्देश जारी नहीं होने से आदेश का पालन नहीं कराया जा सका। इधर, शासन के इस आदेश का पालन नहीं होने से बच्चे अब भी अधिक भार वाले बस्ते ढोते हुए स्कूल जा रहे हैं। पैदल स्कूल जाने वाले बच्चों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।

 

तीसरी कक्षा के बस्ते का वजन दोगुना निकला
शासन के आदेश के बाद पत्रिका ने गुरुवार को कुछ बच्चों के बच्चे तौले तो तीसरी कक्षा के बच्चे के बस्ते का वजन 5 किलो निकला। नियमानुसार इसका वजन 2 से 3 किलो रहना चाहिए। इसी तरह कक्षा पांचवी, छटवीं, सातवीं, आठवीें आदि में पढऩे वाले बच्चों के वजन भी अधिक निकले।

इतना होना चाहिए बस्ते का वजन
कक्षा वजन
1 से 2 १.५ किलो
३ से ५ 2 से 3 किलो
६ से 7 ४ किलो
8 से९ ४.५ किलो
10 5 किलो

कंधे पर क्षमता से अधिक बोझ लादना नुकसानदायक
डॉक्टर्स के अनुसार भारी बैग उठाने से बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। उनमें तनाव भी बढ़ता है। बच्चों का भारी स्कूल बैग ले जाना जारी रहा तो आगे चलकर उन्हें स्पॉन्डलाइटिस, झुकी हुई कमर और पॉस्टर से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। अगर बच्चे नियमित रूप से अपने वजन का 10 प्रतिशत से ज्यादा बोझ कंधे पर उठाएंगे तो उनको स्थाई नुकसान होगा। अध्ययन के मुताबिक रोजाना 5.5 और 7 किग्रा से ज्यादा वजन उठाने से बच्चों के हाथ, पैर और कंधों में दर्द शुरू हो जाता है।

इन बातों का ध्यान रखें अभिभावक
- बच्चा स्कूल केवल वही चीजें ले जाए जो जरूरी हैं
- बच्चों में बचपन से ही एक्सर्साइज और योग की आदत डालें।
- स्कूल बैग ऐसी डिजाइन वाला खरीदें जिसके शोल्डर स्ट्रैप्स पैड वाले हों। इससे गर्दन और कंधों पर कम दबाव आएगा।
- बैग को लटकाने के बाद बच्चे का पॉस्चर चेक करना जरूरी है।

इनका कहना है
वाट्सएप पर शासन के आदेश मिले हैं। लोक शिक्षण संचालनालय से इस संबंध में विस्तृत निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- सीएस टैगोर, जिला शिक्षा अधिकारी, हरदा
--
बच्चों के बस्तों का वजन कम करने शासन ने आदेश जारी किए हैं। इन पर अमल के लिए जल्द ही निर्देश जारी किए जाएंगे।
- डॉ. आरएस तिवारी, डीपीसी, जिला शिक्षा केंद्र हरदा

Published On:
Jul, 12 2019 08:00 AM IST

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।