आखिर पंचायत से क्या हुई गलती कि अब तक लग रही है चपत....

मसनगांव। ग्राम पंचायत द्वारा अपनी आय बढ़ाने सोलह साल पहले सिराली मार्ग तिराहे पर दुकानों का निर्माण कराया गया था। किराये पर देने के लिए पगड़ी की रकम जमा कराई गई थी। उसके बाद प्रतिमाह किराया राशी पंचायत में जमा होनी थी लेकिन पंचायत मे रिकार्ड नहीं होने से पंचायत किराया लेना ही भूल गई। वहीं जिन लोगो ने दुकानें किराये पर ली थीं उन्होंने भी दस साल से किराया जमा करना उचित नहीं समझा।
ग्राम पंचायत मसनगांव में वर्ष 1995 में यात्री प्रतीक्षालय के साथ ही दो दुकानों का निर्माण हुआ था। तत्कालीन सरपंच ने इन दुकानों को पगड़ी की राशि लेकर किराए नामे पर दुकान ग्रामीणों को नीलाम की थी। इन दुकानदारों ने पिछले दस साल से पंचायत में कोई किराया जमा नहीं कराया है। जिससे पंचायत को लाखों रुपए का नुकसान पहुंच रहा है। पूर्व सचिव दीपक पुजारी ने बताया कि सरपंच गायत्री पटेल के कार्यकाल में पंचायत द्वारा यात्री प्रतीक्षालय में दुकानें निकाली गई थीं और दुकानदारों किराए पर दी गई थीं। वर्तमान पंचायत सचिव मनीष व्यास ने ने कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है उनके पास इसका रिकॉर्ड नहीं है। सरपंच योगेश पाटिल ने कहा कि सन 1994-95 का रिकॉर्ड निकाल कर देखा जाएगा जिसके आधार पर किराया राशि वसूली जाएगी।

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