ऑटो चालक वसूलते हैं मनमाना किराया

By: Rajesh Shrivastava

Published On:
Jun, 08 2019 07:18 PM IST

  • प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपने काम के लिए जाते हैं, लेकिन टेंपो नहीं चलने से उन्हें परेशान होना पड़ता है और मजबूरी में अधिक पैसे देकर ऑटो से जाना पड़ता है।

ग्वालियर. कलेक्ट्रेट जाने वाले लोगों को हाईकोर्ट तिराहे से सवारी वाहन नहीं मिलते हैं। इस रूट पर परमिट होने के बाद भी टेंपो चालक सीधे गोविंदपुरी की ओर मुड़ जाते हैं। कलेक्ट्रेट में प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपने काम के लिए जाते हैं, लेकिन टेंपो नहीं चलने से उन्हें परेशान होना पड़ता है और मजबूरी में अधिक पैसे देकर ऑटो से जाना पड़ता है। कलेक्ट्रेट और सिरोल रोड पर बसी कॉलोनियों में जाने वालों को भी ऑटो से जाना पड़ता है या फिर पैदल। पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर डॉ.संजय गोयल और राहुल जैन ने इस रूट पर चलने वाले टेंपो की लिस्टिंग कराकर तय रूट पर चलवाने के लिए आरटीओ और यातायात पुलिस को निर्देश दिए थे, लेकिन इन निर्देशों का अभी तक पालन नहीं हुआ है। खास बात यह है कि हाईकोर्ट चौराहे पर पुलिस के जवान तैनात रहते हैं, लेकिन एक भी जवान या अधिकारी ने टेंपो चालकों पर सही रूट के जरिए मुरार तक पहुंचने का दबाव नहीं बनाया है। परिणाम यह है कि ऑटो चालक लोगों से कलेक्ट्रेट तक 2 किलोमीटर दूरी का किराया 10 से 20 रुपए तक ले रहे हैं और दूर स्थित कॉलोनियों तक पहुंचाने के लिए 40 से 50 रुपए ले रहे हैं। अगर टेंपो चलने लगें तो यहां का किराया अधिकतम 10 रुपए लगेगा, जिससे लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी।

इन क्षेत्रों को भी चाहिए सवारी वाहन
सिरोल रोड-1 : इस रोड पर कलेक्ट्रेट के पीछे की ओर पांच बड़ी टाउनशिप हैं। यहां के बहुमंजिला आवासीय क्षेत्र में 20 हजार से अधिक लोग निवासरत हैं, जिनके लिए सिटी ट्रांसपोर्ट के नाम पर एक भी सुविधा नहीं है। ज्यादातर लोगों को स्वयं के वाहन से जाना पड़ता है या फिर ऑटो के जरिए शहर में आना पड़ता है।
सिरोल रोड-2 : कलेक्ट्रेट से मॉडल टाउन होकर निकली रोड पर कॉलेज और आवासीय क्षेत्र हैं। 10 हजार से अधिक लोग यहां निवास कर रहे हैं। इसके अलावा कॉलेज स्टूडेंट्स की आवाजाही लगातार होती है, इसके बाद भी इस रोड से एक भी टेंपो नहीं निकलता है। छात्रों को मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर ऑटो से जाना पड़ता है।
सचिन तेंदुलकर मार्ग : जीवाजी यूनिवर्सिटी-गोविंदपुरी चौराहे से हुरावली, मुरार और हाइवे से जोडऩे वाले इस मार्ग पर आरटीओ कार्यालय सहित अन्य सरकारी दफ्तर और तीन बड़े आवासीय क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में 15 से 20 हजार की आबादी निवास करती है। इसके बावजूद यहां सिटी ट्रांसपोर्ट के नाम पर सिर्फ ऑटो ही उपलब्ध है। एक भी टेंपो इस मार्ग से नहीं निकलता है।

Published On:
Jun, 08 2019 07:18 PM IST

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