वो तो शराब के प्याले के साथ जीवन के मजे ले रहा होगा, पर मेरा क्या 

  • होटल लैंडमार्क एनएक्स में एमपीएसडी में एडमिशन के लिए ऑडिशन लिए गए थे।   
ग्वालियर।  मैंने जिंदगी के 16 वर्ष बिता दिए। लंबे अंतराल के बाद अब तक मेरा पति नहीं आया। औरत का दिल कमजोर होता है और मर्द का मजबूत। वो तो शराब के प्याले के साथ जीवन के मजे ले रहा होगा, पर मेरा क्या। भला मुझ अभागी को वह ब्याह कर लाया ही क्यों...।

यह करूणा से भरे डायलॅाग थे फिल्मी कैरियर बनाने दिल्ली से ग्वालियर आई  अंजली के।जो कला की दुनिया (एमपीएसडी) में पहले कदम का इम्तिहान देने ग्वालियर आई थी। उसने मध्यप्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा के ऑडिशन में इस स्क्रिप्ट पर एक्टिंग की। होटल लैंडमार्क एनएक्स में एमपीएसडी में एडमिशन के लिए ऑडिशन लिए गए थे।   


जिस तैयारी से आए उसी  पर किया परफॉर्म
ऑडिशन के फस्र्ट सेशन में प्रतिभागियों से एक के बाद एक तीन एक्टिंग कराई गईं, जो उन्हें अपने हिसाब से करनी थी। इसमें सभी की परफॉमेंस एक से बढ़कर रही। सेकंड सेशन में तर्क-वितर्क राउंड रखा गया। ऑडिशन में 200 प्रतिभागी ने भाग लिया, इसमें कुछ ऐसे प्रतिभागी थे जिन्होंने फस्र्ट टाइम ऑडिशन दिया था। इसमें ग्वालियर के अलावा दिल्ली, पटना, कश्मीर सहित अन्य शहरों से भी प्रतिभागी ऑडिशन देने आए।


दूसरा ऑडिशन मार्किंग लैस
ऑडिशन में कुछ प्रतिभागी एेसे भी शामिल हुए थे, जिन्होंने गत दिनों अन्य शहरों में एमपीएसडी के हुए ऑडिशन में पाॢटसिपेट किया था। एेसे प्रतिभागियों के ऑडिशन तो लिए गए, लेकिन उन्हें पहले ही बता दिया गया कि आपका नाम सिलेक्शन लिस्ट में नहीं लिया जाएगा। इसलिए उन्हें मार्किंग नहीं दी गई।


वर्कशॉप के बाद चयन 
एमपीएसडी ने 2017-18 के लिए कुल 25 सीट्स हैं, जिसके लिए ऑडिशन लिए जा रहे हैं। अलग-अलग जगहों से लगभग 500 प्रतिभागी सिलेक्ट किए जाएंगे। इसके बाद 7 दिन की एक वर्कशॉप होगी, जिसके बाद सेकंड ऑडिशन लिया जाएगा। इनमें बेस्ट परफॉर्म करने वाले 25 प्रतिभागियों को एडमिशन का चांस मिलेगा।


टॉस्क पर डिस्कशन आज
शुक्रवार को थर्ड एवं फोर्थ सेशन होगा। इसमें पहले ग्रुप डिस्कशन होगा। इसके बाद प्रतिभागियों का पर्सनल इंटरव्यू लिया जाएगा। कुल मिलाकर यहां से लगभग 80 प्रतिभागियों का सिलेक्शन होगा। ग्रुप डिस्कशन के लिए टॉस्क प्रतिभागियों को दिया जा चुका है। 


देशभर में खुलना चाहिए एमपीएसडी की ब्रांच
ग्वालियर. देश में बहुत टैलेंट है, जिसे सिनेमा तक पहुंचने के लिए थिएटर से होकर ही गुजरना पड़ता है। यह दुख का विषय है कि मध्यप्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा (एमपीएसडी) देश में इकलौता संस्थान है, जहां कलाकार आर्ट की बारीकयां सीखता है, देशभर में इनकी ब्रांच होना चाहिए। संस्कृति मंत्रालय को पत्र भेजा है। जल्द बदलाव की संभावना है। यह कहना है जजेज पैनल का..

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फिल्म 'पालकी' में दिखेगा अलग अंदाज 
 टीआरपी बढ़ाने के लिए फिल्मों में अभद्र भाषा व गालियों का प्रयोग किया जा रहा है, जो मुझे पसंद नहीं है और न ही मैं इसे अच्छा समझता हूं। आज का युवा टैलेंटेड है, लेकिन वह शॉर्टकट अपनाता है। वह सीधे एक्टर बनना चाहता है। जबकि एक्टर बनने का रास्ता थिएटर से होकर गुजरता है। आज एेसे कई कलाकार हैं जो रोजाना अधूरी तैयारी के साथ मायानगरी पहुंचते हैं। जल्द ही मेरी कैनेडियन फिल्म 'पालकीÓ आ रही है, जिसमें मैं अलग अंदाज में नजर आऊंगा।  
पीयूष मिश्रा, एक्टर एंड स्क्रिप्ट राइटर
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मध्यप्रदेश के बाहर भी होंगे ऑडिशन 
अभी तक एमपीएसडी के ऑडिशन मध्यप्रदेश में ही होते थे। युवाओं को इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, जबलपुर ही ऑडिशन के लिए आना होता था। लेकिन इस वर्ष से हम ऑडिशन के लिए प्रदेश से बाहर निकल चुके हैं। हमने छत्तीसगढ़ और दिल्ली को भी ऑडिशन के लिए चुना है। कोर्स के दौरान प्रतिभागी को मॉडर्न, क्लासिकल इंडियन ड्रामा एक्टिंग, फेस एक्सप्रेशन, मूवमेंट, लैंग्वेज, इमोशन, स्पीच, थ्योरी आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। फोकस प्रैक्टिकल पर अधिक रहता है।
संजय उपाध्याय, डायरेक्टर, एमपीएसडी


यूथ का उद्देश्य नेम, फेम और पैसा
थिएटर में नाम, यश जल्दी मिलता है, लेकिन पैसा लेट और कम मिलता है। आज के यूथ के पास समय नहीं है। वह जल्दी नेम, फेम और पैसा पाना चाहते हैं। थिएटर की लड़ाई लंबी है, लेकिन जिसने लड़ ली, उसे कोई फेल नहीं कर सकता। आज के युवा 24 साल की उम्र में ही  पीयूष मिश्रा बनने के सपने संजोते हैंं, जबकि उन्हें इसके लिए अथक मेहनत करने की आवश्यकता है। वह गुरु को गुरु मानें और हमेशा सुनने, समझने की प्रवृत्ति रखें। पेशेंस और हॉनेस्टी के साथ काम करें। 
प्रो. आलोक चटर्जी, एमपीएसडी


हर एक व्यक्ति परदे के लिए नहीं 
 हर एक व्यक्ति सिनेमा के परदे के लिए नहीं होता। कुछ लोग थिएटर के लिए भी होते हैं। आज समय बदल चुका है। पहले जैसे हालात नहीं रहे। आज रंगकर्मी भूखा नहीं मर रहा। उसे भी काम मिल रहा है। कॉर्पोरेट सेक्टर भी इसमें आगे आए हैं। आज लोग टिकट लेकर थिएटर देखने पहुंच रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि  लोग ग्लैमर से प्रभावित हैं। वह स्टार देखते हैं कैरेक्टर नहीं देखते। कॉम्पीटिशन के इस युग में यंगस्टर्स को चैलेंज एक्सेप्ट करना होगा।
नीलम गुप्ता, एक्सपर्ट