32 गांव के ग्रामीणों ने बांध नहर को लेकर खोला मोर्चा

By: चंदू निर्मलकर

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Published: 09 Dec 2015, 03:52 PM IST

Gariaband, Chhattisgarh, India

गरियाबंद. सोन नदी में प्रस्तावित पोरेल बांध और पैरी-घुम्मर डाइवर्सन नहर निर्माण के लिए आदिवासी अंचल के ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। मांगों को लेकर मंगलवार को 32 गांवों के ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय में पैदल मार्च किया। मांगों के संबंध में ग्रामीणों के प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री के नाम कलक्टर को ज्ञापन सौंपा।

गौरतलब है कि जिले के गरियाबंद व छुरा ब्लॉक के किसानों ने पोरेल बांध निर्माण को विशेष आर्थिक बजट में शामिल करने और पैरी-घुम्मर डाइवर्सन नहर निर्माण कर सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने मंगलवार को जिला मुख्यालय में पैदल मार्च किया। आदिवासी अंचल से हजारों की संख्या में 32 गांव के ग्रामीण पैदल मार्च करते हुए दोपहर करीब दो बजे जिला मुख्यालय पहुंचे। छुरा रोड से होते हुए ग्रामीण तिरंगा चौक पहुंचे, फिर वहां से जिला कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के नाम अपर कलक्टर प्रदीप मिश्रा को ज्ञापन सौंपे।

जनदर्शन में उठाया मुद्दा : इन मुद्दों को एकता परिषद द्वारा उठाया जा चुका है। मुख्यमंत्री जनदर्शन में भी आदिवासी बांध और नहर निर्माण का गुहार लगा चुके हैं। इसके बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई हैं। ज्ञापन सौंपने के बाद सभा का आयोजन गांधी मैदान में किया गया। जिसमें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष विरेंद्र पाण्डेय ने किसानों के आत्महत्या के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को जिम्मेदार ठहराया हैं। वे बांध व नहर निर्माण के लिए ग्रामीणों के आंदोलन को साथ देने के लिए गरियाबंद पहुंचे थे। सभा को संबोधित करते हुए पाण्डेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार  किसानों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। सरकारी की कमजोरी और वादा खिलाफी की वजह से किसान आत्महत्या जैसे घातक कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ सरकार सस्ती चावल में 65 हजार करोड़ रुपए खर्च करती है। इसके एवज में गांव-गांव में शराब बेचकर 300 करोड़ रुपए वापस ले लेती हैं।

पंद्रह सालों में दुर्दशा
पंद्रह सालों में भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ की दुर्दशा कर दी हैं। 2001 के जनगणना और 2011 के जनगणना के आंकड़ों में ध्यान दें तो किसानों की संख्या दिनोंदिन घट रही हैं। करीब 10 लाख किसान कम हुए हैं। इसके विपरित मजदूरों की संख्या में इतना ही वृद्धि हुई है। सरकार की गलत नीतियों के कारण आज अन्नादाताओं की स्थिति खराब है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2003 में किसानों को 270 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने का वादा किया था। चुनाव जीतने के बाद भाजपा सरकार अपने वादे से मुकर गई। बोनस के नाम पर 50 रुपए केंद्र सरकार से और 110 रुपए राज्य सरकार  से दिया गया। किसानों को आज तक घोषणा के अनुरुप बोनस नहीं  दिया गया है।

अनुमोदन के लिए प्रस्ताव भेजा
ग्रामीणों ने बताया कि नहर निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए कई ग्राम पंचायत की ओर से प्रस्ताव व ग्राम सभा अनुमोदन पारित कर शासन-प्रशासन को भेजा जा चुका है। क्षेत्र से होकर बहने वाली नदियों का पानी लगभग 80 किमी दूर पैरी कुकदा डाइवर्सन बनाकर सामान्य क्षेत्र राजिम और मगरलोड़ के इलाकों में इस्तेमाल हो रहा है। इस क्षेत्र के निवासी और आदिवासी किसान अपने ही इलाके की नदी-नालों के बूंद-बूंद पानी के तरस रहे है। अविभाजित मध्यप्रदेश शासनकाल में जल संसाधन विभाग के सर्वेक्षण नतीजों के आधार पर तत्कालीन जल संसाधन मंत्री, क्षेत्रिय विधायक द्वारा सोन नदी पर पोरेल बांध निर्माण के लिए भूमि पूजन भी कर चुके है। तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री जल संसाधन, कृषि, वन और पर्यावरण ने सिंचाई परियोजना के लिए सहमति भी प्रदान की थी। इसके बाद भी परियोजना बढ़ नहीं पा रही है।

सर्वेक्षण फिर भी काम शुरू नहीं
ज्ञापन में कहा गया है कि जिले का पूर्वी क्षेत्र गरियाबंद व छुरा ब्लॉक के विशेष पिछड़ी अनुसूचित जनजाति कमार, भुंजिया व गोड़ आदिवासी पेसा सुरक्षित बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र है, जिसमें सभी राजस्व ग्राम है। अंचल के मूल निवासी पूर्ण रूप से कृषि पर निर्भर है, जिसके लिए सिंचाई संसाधन की आवश्यकता है। इस क्षेत्र में अनेक छोटी-बड़ी नदी और नाले मौजूद है। जिसमें पैरी नदी और सोन नदी प्रमुख है। पैरी नदी पर तीन दशक पूर्व सिकासार बांध और वर्तमान में पैरी घुम्मर डाइवर्सन का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन इस अंचल में सिंचाई संसाधन की जरूरत होने के बावजूद भी नहर लानी का निर्माण नहीं हो पाया है, जबकि सिंचाई विभाग द्वारा सिकासार बांध और पैरी घुम्मर डाइवर्सन के पूर्वी दिशा में नहर नाली निर्माण के लिए सर्वेक्षण कार्य पूर्व में किया जा चुका है। इसके बाद भी आज तक काम शुरू नहीं हुआ है।
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