संकष्टी चतुर्थी 2019: संतान प्राप्ति के लिए करें संकष्टी चतुर्थी व्रत, सभी मनोकामनाएं होगी पूरी

By: Tanvi Sharma

Published On:
Jan, 22 2019 02:33 PM IST

  • संकष्टी चतुर्थी 2019: संतान प्राप्ति के लिए करें संकष्टी चतुर्थी व्रत, सभी मनोकामनाएं होगी पूरी

संकष्टी चतुर्थी को तिल चौथ भी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी के निमित्त व्रत रखने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और उसके सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं। इस बार 24 जनवरी 2019 गुरुवार के दिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। महिलाएं इस व्रत को श्रृद्धा पूर्वक करती हैं तो उनको परिवार में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। माताएं इस व्रत को अपने पुत्र की लंबी आयु व उसकी सफलता के लिए निर्जला रखती है। व्रत रखने के बाद शाम के समय गणेश जी की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलती हैं। सबसे पहले यह व्रत पांडु पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर ने ही रखा था। भगवान श्री कृष्ण द्वारा उन्हें सलाह दी गई थी जिसके बाद से सभी महिलाएं अपने पुत्र की लंबी आयु व सफलता के लिए यह व्रत रखती हैं।

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संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि
सभी व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को गणेश पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही प्रसाद के साथ खाना खाती हैं। व्रत रखने वाले जातक फलों का सेवन कर सकते हैं। मान्‍यता है कि संकष्टी चतुर्थी संकटों को खत्म करने वाली चतुर्थी है। देर शाम चंद्रोदय के समय व्रती को तिल, गुड़ आदि का अर्घ्य चंद्रमा, गणेश जी और चतुर्थी माता को अवश्य देना चाहिए। अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस दिन स्त्रियां निर्जल व्रत करती हैं। सूर्यास्त से पहले गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा-पूजा होती है। इस दिन तिल का प्रसाद खाना चाहिए। दूर्वा, शमी, बेलपत्र और गुड़ में बने तिल के लड्डू चढ़ाने चाहिए।

संकष्टी चतुर्थी पूजन विधि
पूजा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा को ईशानकोण में चौकी पर स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा पहले बिछा लें। भगवान के सामने हाथ जोड़कर पूजा और व्रत का संकल्प लें और फिर उन्हें जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें। अक्षत और फूल लेकर गणपति से अपनी मनोकामना कहें, उसके बाद ओम ‘गं गणपतये नम:’ मंत्र बोलते हुए गणेश जी को प्रणाम करें। इसके बाद एक थाली या केले का पत्ता लें, इस पर आपको एक रोली से त्रिकोण बनाना है। त्रिकोण के अग्र भाग पर एक घी का दीपक रखें। इसी के साथ बीच में मसूर की दाल व सात लाल साबुत मिर्च को रखें। पूजन उपरांत चंद्रमा को शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से अर्घ्य दें। पूजन के बाद लड्डू प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।

Published On:
Jan, 22 2019 02:33 PM IST

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