जानें किसके आने की खुशी में मनाया जाता है ओणम का त्योहार, क्या होता है थप्पकली

By: Tanvi Sharma

Published On:
Aug, 07 2018 06:52 PM IST

  • जानें किसके आने की खुशी में मनाया जाता है ओणम का त्योहार, क्या होता है थप्पकली

केरल में ओणम एक महत्वपूर्ण त्योहार होता है। यह त्यौहार अगस्त व सितंबर माह में मनाया जाता है। इस समय सावन माह की वजह से चारों और हरियाली भी होती है। त्यौहार का उत्सव 10 दिनों तक चलता है। इन दसों दिनों में हर दिन अलग-अलग कार्यक्रम होते हैं। इस समय पूरे राज्य में बहुत ही खुशनुमा माहौल नजर आता है। ओणम त्यौहार केरल राज्य के अलावा भी भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है। लेकिन ओणम क्यों मनाया जाता है और इसका क्या महत्व है। ये हम आपको बताने जा रहे हैं....

ओणम का अर्थ श्रावण (सावन) होता हैं। सावन माह में इस त्यौहार को केरल राज्य में फसलों के तैयार होने की खुशी में मनाया जाता है। इस त्यौहार पर सावन के देवता के साथ फूलों की देवी की पूजा की जाती है। हिंदू कैलेण्डर के अनुसार यह त्यौहार अगस्त या सितंबर के महीने में मनाया जाता है। कहा जाता है की राजा महाबली पाताल लोक से साल में एक दिन अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। इसलिए यह त्यौहार उनके आने की खुशी में तथा राजा महाबली के याद में मनाया जाता है, इस दिन उनका भूलोक में भव्य स्वागत किया जाता है। राजा महाबली भगवान विष्णु की अनुमती से भूलोक पर आते हैं।

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ओणम पर्व पर 'थप्पकली नृत्य'

इस दिन घरों को फूलों से सजाया जाता है और घर के आंगन में फूलों की रंगोली भी बनाई जाती है। महिलाएं और लड़कियों का उत्साह इस दिन देखते ही बनता है। मलयालम में इस रंगोली को “ओणम पुक्कलम” कहा जाता है। रंगोली का आकार गोल होता है और इसके बीच दिया रखा जाता है जिससे रंगोली ओर भी ज्यादा खूबसूरत नज़र आती है। वहीं ओणम उत्सव के नौंवे दिन घरों में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और पूजा के बाद सारी महिलाएं इकट्ठा होकर गोला बनाकर सामूहिक नृत्य करती हैं और बाकी महिलाएं गीत गाती हैं। गोलाई में नृत्य करने की यह परम्परा “थप्पतकली” कहलाती है। इस दिन पूरे राज्य में शेर नृत्य, कुचीपुड़ी, गजनृत्य, कुमट्टी काली, पुलीकली तथा कथकली जैसे लोकनृत्य किए जाते हैं।

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क्या होता है 'पूवड'

ओणम के नवमें दिन शाम को सभी के घरों में गणेश जी, श्रावण देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा-अर्चना के बाद भगवान के सामने शुद्ध घी के दीपक जलाया जाता है और उन्हें विशेष प्रकार का भोग लगाया जाता है मलयालम में विशेष भोग को 'पूवड' कहते हैं। ओणम त्यौहार का आखिरी व सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है जिसे थिरुओनम या तिरुओणम होता है। इस दिन राज्य के सभी घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाते है। चावल के आटे में विभिन्न प्रकार की सब्जियों को मिलाकर अवियल बनाया जाता है, केले का हलवा, नारियल की चटनी बनाई जाती है। इसी प्रकार पूरे 64 प्रकार के पकवान बनाएं जाते है। जिन्हें ओनसद्या कहा जाता है। इन सभी पकवानों को बनाने के बाद इन्हें केले के पत्तों पर परोसा जाता हैं और अपने करीबी रिश्तेदार व दोस्तों को दावत दी जाती है।

Published On:
Aug, 07 2018 06:52 PM IST