पाताल लोक से साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आते हैं राजा, इनकी याद में मनाया जाता है त्योहार

By: Tanvi Sharma

Published On:
Aug, 08 2018 03:31 PM IST

  • पाताल लोक से साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आते हैं राजा, इनकी याद में मनाया जाता है त्योहार

अोणम का त्यौहार दक्षिण भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है, इसलिए इसे उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सुबह से ही घरों की साफ-सफाई की जाती है। उसके बाद हर दक्षिण भारतीय परिवार में कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। यह त्यौहार राजा महाबलि की याद में बनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार राजा महाबली के शासन में रोज हजारों तरह के स्वादिष्ट पकवान व व्यंजन बनाए जाते थे। लेकिन अब राजा महाबलि भगवान विष्णु के अनुरोध के बाद पाताल लोक से साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आते हैं, इसलिए उनके प्रसाद के लिए कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। ओणम का त्योहार केरल के रीति-रिवाजों व परंपराओं के अनुरूप मनाया जाता हैं। दक्षिण भारतीय युवतियां जहां अपने घर की देहरी को फूलों की रंगोली से सजाती है, तो महिलाएं खट्ठे-मीठे तमाम तरह के व्यंजनों को बनाकर उनका स्वाद अपने परिवार के साथ सामूहिक रूप से चखती हैं।

वैसे तो देशभर में हर जाति-प्रजाति के अनेक पारंपरिक त्यौहार मनाए जाते हैं। लेकिन कुछ त्यौहार राज्य द्वारा मनाए जाते हैं। इनमें से एक है ओणम का त्योहार जोकी सिर्फ केरल राज्य में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस त्यौहार को देश के कई अन्य हिस्सों में भी मनाया जाता है लेकिन इसका असल स्वरूप तो केरल में ही देखने को मिलता है। यह त्यौहार फसल पकने की खुशी के साथ-साथ राजा महाबली की याद में मनाया जाता है वही इससे जुड़ी एक रौचक व अद्भुत कहानी पुराणों में बताई जाती है आइए जानते हैं क्या हो वो रौचक कथा....

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पौराणिक कथा के अनुसार इलसिए मनाया जाता है ओणम का त्यौहार

पुराणों में वर्णित है कि प्राचीन काल में राजा बलि नामक दैत्य राजा हुआ करते थे। उनकी अच्छाइयों के कारण जनता उनके गुणगान करती थी। उनका यश बढ़ते देखकर देवताओं को चिंता होने लगी तब उन्होंने भगवान विष्णु से अपनी बात कही। देवताओं की बात सुनकर विष्णु भगवान ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से दान में तीन पग भूमि मांग ली। वामन भगवान ने दो पग में धरती और आकाश नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए उनके पास जगह ही नहीं थी। तब राजा बलि ने अपना सिर झुका दिया। वामन भगवान ने पैर रखकर राजा को पाताल भेज दिया। लेकिन उसके पहले राजा बलि ने साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आने की आज्ञा मांग ली। सदियों से ऐसी मान्यता चली आ रही है कि ओणम के दिन राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने आते हैं, इसी खुशी में मलयाली समाज ओणम मनाता है। इसी के साथ ओणम नई फसल के आने की खुशी में भी मनाया जाता है।

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Aug, 08 2018 03:31 PM IST