किसानों को मिले सामाजिक सुरक्षा

By: Dilip Chaturvedi

Published On:
Oct, 25 2018 07:31 PM IST

  • कृषि पर जलवायु परिवर्तन का हमला देश के लिए एक चुनौती है, उसको नकारा नहीं जा सकता। सामाजिक सुरक्षा योजना किसानों के लिए अपर्याप्त प्रतीत होती है, भले ही इस संबंध में सरकार ने प्रभावी हस्तक्षेप किया हो।

ज्ञान रंजन पांडा, लोकनीति मामलो के जानकार

वैश्विक भुखमरी सूचकांक यानी ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआइ) 2018 की रिपोर्ट में 119 देशों में भारत 103वें स्थान पर है। हम बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार की तुलना में काफी नीचे हैं? पड़ोसी देशों में हम केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान से बेहतर हैं। हैरत इस बात की है कि गरीबी उन्मूलन के कई वर्षों के लगातार नीतिगत हस्तक्षेप के बाद हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं। निश्चित रूप से अब यह आत्मनिरीक्षण का विषय बन गया है।

देश में 'गरीबी हटाओ' के राजनीतिक नारे बहुत बने, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से गरीबों की संख्या में दिन पर दिन इजाफा होता ही चला गया। ऐसा भी नहीं कि सरकार ने देश में गरीबी के हालात से निजात दिलाने के प्रयास नहीं किए हों। सरकार की ओर से जो प्रयास हुए वे पर्याप्त नहीं रहे। देश में गरीबी दर लगभग दस साल की अवधि में 55 से घटकर 28 फीसदी के स्तर पर आ गई।

गरीबी बहुआयामी अवधारणा है। इसे भोजन और पोषण के सीमित व्याख्यान और विश्लेषण तक सीमित नहीं होना चाहिए। गरीबी में ग्रामीण-शहरी विभाजन भी महत्त्वपूर्ण है। पांच भारतीयों में से लगभग एक गरीब है और हर पांच गरीब लोगों में से चार ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। ग्रामीण इलाकों में अधिकतर लोग कृषि और इससे संबंधित व्यवसाय से ही जुड़े रहते हैं। किंतु इसके साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली कृषि, आजीविका के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने में नाकाम रही है।

देश तेजी से जलवायु परिवर्तन का केंद्र बन रहा है। भारतीय कृषि और इसकी उत्पादकता पर जलवायु परिवर्तन का हमला देश के लिए एक चुनौती है, उसको नकारा नहीं जा सकता। सामाजिक सुरक्षा योजना किसानों के लिए अपर्याप्त प्रतीत होती है, भले ही इस संबंध में सरकार ने प्रभावी हस्तक्षेप किया हो। सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, नीम लेपित यूरिया, परम्परागत कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय कृषि बाजार, प्रधानमंत्री फसल बीमा जैसी कई नई पहल की है। इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कृषक समुदाय के लिए अच्छा परिणाम ला सकती है।

मोटे तौर पर यह जरूरी है कि देश को यदि गरीबी से निजात दिलानी है तो इस बात का इंतजाम करना होगा कि सरकार की ओर से दी जाने वाली मदद गरीबों तक पहुंचे और औपचारिक आय के लिए अवसरों में कोई कमी ना रहे।

(केंद्रीय विश्वविद्यालय, अजमेर में अध्यापन)

 

Published On:
Oct, 25 2018 07:31 PM IST