र्इडी ने किया चौंकाने वाला खुलासा, 7,500 करोड़ रुपए होने के बाद भी नहीं चुकाना था कर्ज

By: Saurabh Sharma

Updated On: Feb, 11 2019 08:58 AM IST

  • धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी की जांच में पाया गया है कि माल्या और यूबीएचएल के पास समूह की कर्इ पब्लिक लिमिटेड कंपनियों में 3,847.45 करोड़ रुपए के शेयर थे।

नई दिल्ली। संकट में फंसे शराब कारोबारी विजय माल्या और युनाइटेड ब्रेवरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (यूबीएचएल) समेत किंशफिशर एयरलाइन लिमिटेड (केएएल) के प्रमोटरों के पास कर्इ पब्लिक लिमिटेड कंपनियों के शेयर के रूप में काफी संख्या में चल संपत्तियां थीं, लेकिन उन्होंने इन उपकरणों से बैंक का बकाया चुकाने की अपनी कोई मंशा नहीं जाहिर की। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यह खुलासा अब बंद हो चुकी इस एयरलाइन के मामले की जांच में किया है।

र्इडी के किए चौकाने वाले खुलासे
धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी की जांच में पाया गया है कि माल्या और यूबीएचएल के पास समूह की कर्इ पब्लिक लिमिटेड कंपनियों में 3,847.45 करोड़ रुपए के शेयर थे। 12 अगस्त 2016 को यूबीएचएल, युनाटेड स्पिरिट, युनाटेड ब्रेवरीज और मैकडोवेल के शेयरों में माल्या के पास कुल 1,773.49 करोड़ रुपए के शेयर्स थे आैर यूटीआई इन्वेस्टर्स सर्विसेज के पास 1,653 करोड़ रुपए के शेयर गिरवी थे। ईडी की जांच से हुए खुलासे के अनुसार, यूटीआई इन्वेस्टर्स सर्विसेज के पास माल्या के गिरवी पड़े सारे शेयरों का दावा नहीं बेचा गया, जबकि उसके एवज का बकाया पहले ही चुकता हो चुका था। मतलब, बैंक अपने बकाए के एवज में शेयरों को अटैच (जब्त) नहीं कर सकती थी, क्योंकि दावा व्यवस्था के तहत शेयरों को इस प्रकार हस्तांतरण नहीं हो सकता था।

नहीं किया था इन कंपनियों का खुलासा
ईडी की जांच में यूबीएचएल समेत माल्या के साम्राज्य के तहत बनाई गई नकली व निवेश कंपनियों के जाल की असली मंशा पर भी सवाल उठाया गया है। अगस्त 2016 तक इनमें से कुछ कंपनियों का शेयर मूल्य 3,822 करोड़ रुपए था, लेकिन माल्या ने जब्ती से बचने के लिए इन कंपनियों के बारे में कोर्इ खुलासा नहीं किया। इनमें शामिल कंपनियों के नाम देवी इन्वेस्टमेंट, किंशफिशर फिन्वेस्ट, मैकडोवेल होल्डिंग्स, फार्मा ट्रेडिंग कंपनी, जेम इन्वेस्टमेंट एंड ट्रेडिग, वाटसन लिमिटेड, विट्टल इन्वेस्टमेंट, कामस्को इंडस्ट्रीज, फर्स्टस्टार्ट इंक और माल्या प्राइवेट लिमिटेड हैं।

कर्मचारियों के नाम पर थी कंपनियां
इन कंपनियों की जांच में पाया गया कि ये यूबी समूह या माल्या या उनके परिवार के सदस्यों या नकली कंपनियों की निवेश कंपनियां थीं, जो यूबी के कर्मचारियों के नाम पर थीं, जिनकी इन कंपनियों में असल में कोई काम नहीं था और न ही उनके पास कोई स्वतंत्र आय का स्रोत था। इन कंपनियों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से माल्या का नियंत्रण था।

चुकाया जा सकता था कर्ज
निवेश कंपनियों के बिना गिरवी वाले शेयरों का मूल्य करीब 1,800 करोड़ रुपये था, जिसका उपयोग केएएल की एक तिहाई से अधिक कर्ज को चुकाने में किया जा सकता था। इसके अतिरिक्त, इन कंपनियों के करीब 2,000 करोड़ रुपये के गिरवी शेयरों का भी काफी अंश निकाला जा सकता था क्योंकि इस पर बकाया कर्ज महज 755 करोड़ रुपए था। इन तथ्यों के मद्देनजर, ईडी इस नतीजे पर पहुंचा है कि माल्या की अगुवाई में केएएल धन शोधन के अपराध में संलिप्त थी। ईडी ने 550 करोड़ रुपए मूल्य के बेंगलुरू स्थित किंगफिशर टावर में निर्माणाधीन फ्लैटों और अलीबाग के मांडवा में 25 करोड़ रुपए मूल्य के फार्म हाउस के साथ-साथ भूखंड को जब्त करने की मांग की है।

Published On:
Feb, 11 2019 08:39 AM IST

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