ग्राम पंचायत बनी भूमाफिया, गरीबों के हक पर जेसीबी

By: Deepak Sharma

Published On:
Sep, 12 2018 03:20 PM IST

  • स्थायी लोक अदालत में मिली राहत

ग्राम पंचायत बनी भूमाफिया, गरीबों के हक पर जेसीबी

जहां दिया पट्टा, उसकी जगह दूसरी दिखाई जमीन
टीएडी छात्रावास निर्माण को आंवटित की गई जमीन का मामला

दीपक शर्मा
डूंगरपुर. ग्राम पंचायत झौथरी ने सरकारी संस्था को दी जमीन में गोलमाल कर दिया। इस पूरे मामले में न सिर्फ ग्राम पंचायत, अपितु निर्माण की कार्यकारी एजेंसी, पटवारी, तहसीलदार की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। यहां जिक्र ग्राम पंचायत की ओर से टीएडी विभाग के लिए बनने वाले छात्रावास की जमीन का है। ग्राम पंचायत ने इस विभाग को चार बीघा जमीन आवंटित की। निर्माण की कार्यकारी एजेंसी ने संबंधित ठेकेदार से कार्य शुरू भी करवा दिया। जेसीबी से मैदान समतलीकरण के कार्य के दौरान कुछ लोगों ने विरोध किया तो इन्हें अतिक्रमी बताकर इन सब महकमों ने पुलिस से मिलकर खदेड़ दिया। पीडि़त परिवार ने न्यायालय की शरण ली और यहां दस्तावेज की जांच हुई तो घोटाले की पूरी कहानी सामने आई।

इस तरह सच आया सामने
पांच जुलाई को झौथरी निवासी लाली पत्नी नाथू कामदार ने स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। इसमें बताया कि गांव में खसरा नंबर ३३२१ में से एक बीघा जमीन पर इसके तीन पुत्र के बीस सदस्यीय परिवार रहता है। यहां मकान बने है और ग्राम पंचायत ने इसी जमीन पर इंदिरा आवास भी आवंटित किया है। करीब ५० वर्ष की इस कब्जेशुदा जमीन पर लगातार पेनेल्टी भरी गई है। यहां पर आठ अपे्रल को तहसीलदार, विकास अधिकारी, सरपंच, सचिव और कई अन्य अधिकारी आए। जेसीबी से कब्जेशुदा जमीन पर तोडफ़ोड़ की। विरोध किया तो बेखदल करने के प्रयास किए। इस जमीन से हटाने के संबंध में कोई नोटिस नहीं दिया और जबरन जेसीबी से नुकसान किया।

जांच कराई तो पकड़ में आया बड़ा गोलमाल
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष महेन्द्रसिंह सिसोदिया ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया और इस मामले में पटवारी, पंचायत, टीएडी विभाग, तहसीलदार को समस्त दस्तावेज के साथ पत्रावलियां पेश करने के आदेश दिए। टीएडी विभाग ने अदालत में सौंपे दस्तावेज में बताया कि ग्राम पंचायत ने खसरा नंबर ३३३५ रकबा १०९९ में चार बीघा जमीन विभाग को छात्रावास बनाने के लिए आवंटित की। आवंटित भूमि के संबंध में मिले दस्तावेज को इस निर्माण कार्य की एजेंसी राजस्थान कृषि विपणन बोर्ड को दिए और सीमांकन के बाद निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए थे। संबंधित एजेंसी के सहायक अभियंता गिरीश जोशी ने बताया कि सरपंच सचिव को सीमांकन के लिए बुलाया, पर वो आए ही नहीं। इस पर बगैर सीमांकन ही निर्माण कार्य शुरू किया गया। इस कार्य के लिए सहायक अभियंता, सरपंच, सचिव और ठेकेदार जिम्मेदार है। न्यायालय से क्षतिपूर्ति के आदेश होते है तो इन चारों की जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही टीएडी विभाग ने दी रिपोर्ट में बताया कि गलत खसरे की जानकारी मिलते ही निर्माण रोक दिया है।


किया मामले का निस्तारण
महज सवा माह में स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष महेन्द्रसिंह सिसोदिया और सदस्य विनोद दोशी व प्रकाश पटेल ने फैसले में बताया कि टीएडी विभाग की ओर से मिली रिपोर्ट बताया कि विवादित जमीन पर कोई निर्माण नहीं किया जा रहा है और छात्रावास निर्माण के लिए अन्य जमीन होना बताया गया है। ऐसे में प्रकरण निस्तारित किया जाता

Published On:
Sep, 12 2018 03:20 PM IST