टेक्नोलॉजी गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल से हो सकती है इनफर्टिलिटी की समस्या

By: Vikas Gupta

Updated On: 11 Feb 2019, 06:24:16 PM IST

  • अध्ययन बताते हैं कि मोबाइल फोन इस्तेमाल का संबंध पुरुषों में शुक्राणुओं के कम उत्पादन व उनकी निम्र गुणवत्ता से है

अध्ययन बताते हैं कि मोबाइल फोन एवं उनके टावरों से उत्सर्जित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण के असर से डीएनए क्षतिग्रस्त होता है और वह स्वयं अपनी मरम्मत नहीं कर पाता। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर गिर जाता है और कोशिकाओं को नुकसान होने के साथ ही कई दुष्प्रभाव होते हैं। लेकिन इनमें सबसे ज्यादा गंभीर जोखिम है इनफर्टिलिटी। लगभग 15 प्रतिशत भारतीय दंपति किसी न किसी किस्म की इनफर्टिलिटी से जूझते हैं।

अध्ययन बताते हैं कि मोबाइल फोन इस्तेमाल का संबंध पुरुषों में शुक्राणुओं के कम उत्पादन व उनकी निम्र गुणवत्ता से है जबकि गर्भस्थ महिलाओं व उनके अजन्मे शिशु के लिए सेल्युलर रेडिएशन का संपर्क खतरनाक होता है। इससे गर्भस्थ शिशु की रीढ़ पर बुरा असर पड़ता है। रेडिएशन से डीएनए के गुणसूत्र क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और जीन्स की गतिविधि में बदलाव आ जाता है। आज के दौर में मोबाइल फोन व इंटरनेट आम आदमी के बेहद करीब हैं। लेकिन मोबाइल फोन एवं उनके टावरों से उत्सर्जित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के दुष्प्रभाव से डीएनए क्षतिग्रस्त होता है जिससे फर्टिलिटी प्रभावित हो रही है।

ऊतक हो सकते हैं क्षतिग्रस्त -
ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन द्वारा की गई एक स्टडी के मुताबिक जो महिलाएं सेल फोन टावर से 100 मीटर के दायरे में रहती हैं उन्हें तनाव और इनफर्टिलिटी का जोखिम ज्यादा होता है। मां बनने के लिए प्लान कर रहीं महिलाओं में तनाव मापने के लिए प्रोटीन (अल्फा -अमायलेज) की जांच की जाती है। जिनमें प्रोटीन का स्तर उच्च होता है, उनके मां बनने की संभावना 29 फीसदी कम होती है।

कॉर्डलैस फोन भी खतरनाक -
कॉर्डलेस फोन के बेस स्टेशन से रेडिएशन उत्सर्जन 6 वॉल्ट प्रति मीटर जितना ऊंचे स्तर का भी हो सकता है जो कि मोबाइल फोन स्टेशन टावर के 100 मीटर के दायरे में फैले रेडिएशन से दोगुना मजबूत होता है।

नुकसान लैपटॉप से भी -
लैपटॉप को ज्यादा देर तक गोद में रखकर प्रयोग करने से शुक्राणुओं की क्वालिटी और संख्या पर काफी बुरा असर पड़ता है। लैपटॉप से निकलने वाली हीट अंडाशय के मुकाबले वीर्य कोष पर ज्यादा असर डालती है। चूंकि अंडे अंडाशय में बनते हैं जो कि स्त्री शरीर के भीतर होता है तथा लैपटॉप या अन्य किसी बाहरी स्रोत से निकली हीट इतनी तीव्र नहीं होती की वह शरीर का तापमान इतना बढ़ा दे कि अंडों का उत्पादन प्रभावित हो। इनसे बचने के लिए लैपटॉप का प्रयोग करते समय उसके नीचे फैन लगाएं और मोबाइल फोन को पॉकेट में रखने से बचें।

Updated On:
11 Feb 2019, 06:24:15 PM IST

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