बच्चे में कमजोरी, थकान और वजन का न बढ़ना हो सकते हैं इस बीमारी के संकेत

By: Vikas Gupta

Published On:
Aug, 12 2019 09:36 PM IST

  • भारत में हर साल पैदा होने वाले बच्चों में से 7-10 बच्चे इस रोग से पीड़ित होते हैं।

थैलेसीमिया एक आनुवांशिक रोग है। जिसमें हीमोग्लोबिन के निर्माण में दिक्कत होने के कारण रोगी को बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता है। डब्लूएचओ के मुताबिक भारत में हर साल पैदा होने वाले बच्चों में से 7-10 बच्चे इस रोग से पीड़ित होते हैं। इस रोग की गंभीरता के आधार पर थैलेसीमिया तीन प्रकार का होता है माइनर, इंटरमीडिएट और मेजर। अगर माता व पिता दोनों माइनर थैलेसीमिया से पीड़ित हैं तो बच्चे में 25 फीसदी यह रोग होने की आशंका बढ़ जाती है।

लक्षण -
शरीर में खून न बनने से कई तरह के लक्षण बच्चे में दिखाई देते हैं जैसे कमजोरी, बीमार रहना, चेहरा सूख जाना, बच्चे की ग्रोथ पर असर पड़ना और वजन न बढ़ना आदि।

इलाज : हर 15 दिन में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों में रक्त चढ़ाया जाता है ताकि स्थिति गंभीर न बने। ब्लड चढ़ाने की प्रक्रिया पूरी उम्र चलती है। इलाज के रूप में बोनमैरो ट्रांसप्लांट करते हैं, जिसके काफी हद तक सफल परिणाम सामने आए हैं।

दवाएं भी हैं जरूरी : थैलेसीमिया पेशेंट्स के कुछ अंगों में आयरन एकत्र होता रहता है। ये अतिरिक्त आयरन कई तरह की दिक्कत पैदा करता है। जैसे हृदय में आयरन इकट्ठा होने पर हार्ट फेल भी हो सकता है। ऐसे में मरीजों को कुछ खास दवाएं दी जाती हैं ताकि ये अतिरिक्त आयरन को शरीर से बाहर निकाला जा सके। ये दवाएं ताउम्र दी जाती हैं।

ये ध्यान रखें : बच्चों में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि शादी से पहले महिला व पुरुष के हीमोब्लोबिन की जांच जरूर होनी चाहिए।

Published On:
Aug, 12 2019 09:36 PM IST

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