गर्भावस्था और जन्म के बाद 1,000 दिन तक उचित पोषण जरूरी

Jameel Khan

Publish: Sep, 06 2018 02:34:29 PM (IST)

गर्भावस्था और जन्म के बाद के पहले 1,000 दिन नवजात के शुरुआती जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है।

गर्भावस्था और जन्म के बाद के पहले 1,000 दिन नवजात के शुरुआती जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। आरंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों के मस्तिष्क विकास में भारी नुकसान हो सकता है, जिसकी भरपाई नहीं हो पाती है। शिशु के शरीर का सही विकास नहीं होता तथा उनमें सीखने की क्षमता में कमी, स्कूल में सही प्रदर्शन नहीं करना, संक्रमण और बीमारी का अधिक खतरा होने जैसी कई अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। गर्भावस्था और जन्म के बाद पहले वर्ष का पोषण बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के स्वस्थ विकास और प्रतिरोधकता बढ़ाने में बुनियादी भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इंसान की जिंदगीभर का स्वास्थ्य उसके पहले 1000 दिन के पोषण पर निर्भर करता है। इस अवधि में उसे मिले पोषण का संबंध उस पर मोटापा और क्रॉनिक बीमारियों से भी है।

नवजात शिशु और बच्चे की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए उसे जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध पिलाना जरूरी है। दो साल की उम्र तक बच्चों को स्तनपान कराएं। यह नवजात शिशु को कई संक्रमणों और बीमारियों से सुरक्षित रखता है। स्तनपान कराने से नवजात शिशु के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं। इससे उनका संपूर्ण पोषण होता है जिससे बढ़ते बच्चों में मेटाबॉलिज्म की जरूरतें पूरी होती हैं।

बच्चे को सही तरीके से मां का दूध पिलाने से बच्चे में मां का प्यार जन्म लेता है और बाद में उसका मानसिक-सामाजिक विकास होता है। इससे बच्चे को बेहतर मानसिक और शारीरिक विकास होता है और बच्चों की कई आम बीमारियों का खतरा कम हो जाता है और बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। 6 माह से लेकर 18 साल के बच्चे की पोषण संबंधी आवश्यकताएं बिल्कुल बदल जाती हैं। अब उसे मां के दूध के अलावा ठोस आहार भी चाहिए। बच्चे के लिए जरूरी मात्रा में विटामिन्स और मिनरल्स के साथ-साथ प्रोटीन्स, फैट्स, आयरन और कार्बोहाइड्रेट की आपूर्ति होना जरूरी है।

बच्चा एक साल का होने पर वह परिवार के बाकी लोगों के साथ खाने लगता है। उन्हें मुख्य आहार के बीच ड्राई फ्रूट्स या कच्ची सब्जियां, दही और ब्रेड स्टिक खाने को दें। उम्र बढऩे के साथ बच्चों के आहार में विभिन्न चीजें शामिल करें। 'परिवार के साथ मिल-बैठ कर खाने' का सिद्धांत लागू कर दें। इससे बच्चों में सही आहार चुनने की आदत पड़ेगी और वह विभिन्न प्रकार की चीजें खाएगा।

प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोतों में सोया उत्पाद, मटर, बीन्स, अंडे हैं। इनके अलावा बच्चे को विभिन्न ताजा फल और ड्राई फ्रूट्स खाने के लिए प्रोत्साहित करें। हालांकि ड्राईफ्रूट्स कम दें क्योंकि इनमें कैलोरी अधिक होती है। बच्चे को हर सप्ताह विभिन्न प्रकार की सब्जियां खिलाएं जैसे कि हरा, लाल और नारंगी बीन्स और मटर, स्टार्ची और अन्य सब्जियां। साबूत गेहूं का बना बे्रड, ओटमील, पॉपकॉर्न, क्विनोआ या चावल आदि को प्राथमिकता दें।

बच्चे को वसा-मुक्त या कम कैलेारी के दुग्ध उत्पाद जैसे दूध, दही, चीज या फोर्टिफाइड सोया पेय पदार्थ लेने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चों के दैनिक आहार में आयरन होना जरूरी है ताकि उनके मस्तिष्क का सही विकास हो। कैल्सियम हड्डियों और मांसपेशियां के सही विकास के लिए बहुत जरूरी है। यह डेयरी फूड, रागी, रेजिन आदि में पाया जाता है जो आपके बच्चों के आहार में जरूर शामिल करें। अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों और सॉफ्ट ड्रिंक्स स्वास्थ्य की गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं। अत्यधिक नमकीन और मसालेदार खाना भी उन्हें नहीं देना चाहिए।

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Web Title "Proper diet for 1000 days must during pregnancy and after birth"