मुद्दे हो रहे गौण, आरोप-प्रत्यारोप का दौर

By: mahesh gupta

Updated On: 24 Aug 2019, 12:22:43 PM IST

  • छात्रसंघ चुनाव के तहत नामांकन वापस लेने के बाद प्रत्याशी तथा उनके समर्थक पूरे चुनावी माहौल में रम गए हैं। प्रचार को गति दी जा रही है। साथ ही छात्रों से सम्पर्क किया जा रहा है। लेकिन इस बीच मुद्दे गौण होते दिखाई दे रहे हैं और एक-दूसरे संगठन पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ जातिगत राजनीति का साया अधिक दिखाई दे रहा है।

धौलपुर. छात्रसंघ चुनाव के तहत नामांकन वापस लेने के बाद प्रत्याशी तथा उनके समर्थक पूरे चुनावी माहौल में रम गए हैं। प्रचार को गति दी जा रही है। साथ ही छात्रों से सम्पर्क किया जा रहा है। लेकिन इस बीच मुद्दे गौण होते दिखाई दे रहे हैं और एक-दूसरे संगठन पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ जातिगत राजनीति का साया अधिक दिखाई दे रहा है। हर बाद मत देकर ‘छात्र सरकार’ बनाने वाले विद्यार्थियों के मन भी यह टीस साफ दिखाई दी। हालांकि छात्र संगठनों के पदाधिकारियों का यह मानना है कि कॉलेज राजनीति में जातीय हावी नहीं होनी चाहिए। लेकिन इस बार दोनों संगठनों ने एक ही जाति को तरजीह है। इन सबको लेकर पत्रिका ने विद्यार्थियों, प्रत्याशी तथा छात्र संगठन पदाधिकारियों से वार्ता की।
कॉलेज में नियमित क्लास नहीं लगती है। कॉलेज की दो साल से स्कॉलर नहीं आती है। सफाई नियमित होनी चाहिए। नियमित पढ़ाई होनी चाहिए।
रवि मौरल, छात्र, बीएससी फाइनल
लड़कियों के साथ में दुव्र्यवहार होता है। लडक़े कमेंट करते हैं। स्कॉलरशिप नहीं आई। क्लास समय से नहीं लगती है। लड़कियों को आने-जाने में परेशानी होती है। साधनों की व्यवस्था नहीं है।
निशा मीणा, कॉलेज छात्रा
कॉलेज का माहौल खराब है। लडक़े कमेंट पास करते हैं। टीचर्स पर लडक़े हाथ उठा लेते हैं। उनसे माता-पिता की तरह मानना चाहिए।
मानसी यादव, छात्रा
सडक़ सही नहीं है। इसलिए आने-जाने में परेशानी होती है। पीने के पानी की एक ही टंकी है। एक ही नल लगा है। पेयजल किल्लत के साथ कक्षाएं समय पर नहीं लगती हैं।
सतीश कुमार, छात्र

कॉलेज में विगत दो साल से एबीवीपी काबिज है। लेकिन छात्र पढऩे के बजाय घूमने आते हैं। बाहरी छात्रों का दखल बढ़ गया है। व्याख्याता पढ़ाने के बजाय इधर-उधर की बातें कर चले जाते हैं। माहौल बिगड़ रहा है। इसे सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
बीके कुशवाह, अध्यक्ष पद प्रत्याशी एनएसयूआई, राजकीय पीजी महाविद्यालय

एनएसयूआई प्रत्याशी का आरोप निराधार है। अगर कॉलेज में साख होती तो लगातार दो बार से छात्र एनएसयूआई को क्यों नकार रहे हैं। एबीवीपी ने रिकॉर्ड तोड़ विकास कार्य कराए हैं। पीजी में विषय बढ़वाए, वहीं गल्र्स एनसीसी विंग खुलवाई। लाइब्रेरी का कार्य चल रहा है। ये तो बानगी है, सूची लम्बी है।
अभिनवसिंह, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष तथा विभाग सह संयोजक, एबीवीपी, धौलपुर।
यह सही है कि वर्तमान में जातीय राजनीति देखने को मिल रही है, लेकिन एबीवीपी ने सभी प्रत्याशियों को इस प्रकार की राजनीति से दूर कर केवल मुद्दों पर चुनाव लडऩे के लिए निर्देशित किया गया है। हम अन्य संगठनों की तरह राजनीति में विश्वास नहीं रखते हैं। हमने पूर्व में राजपूत व बघेला समाज से प्रत्याशी उतारा था, जिसे छात्रों ने स्वीकार किया। एबीवीपी राष्ट्रवादी पार्टी है, जो देश तथा छात्रहित में कार्य करती है।
भूपेन्द्रसिंह घुरैया, प्रांत मंत्री, एबीवीपी, धौलपुर।

Updated On:
24 Aug 2019, 12:22:42 PM IST

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