कृष्ण पूजा के बाद जरूर करें ये आरती गान, वरना अधूरी मानी जाएगी पूजा

By: Tanvi

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Updated: 24 Aug 2019, 01:57 PM IST

धर्म कर्म

सनातन धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। इस पर्व पर सभी लोग अपने घरों में कृष्ण के बाल रुप की पूजा करते हैं और उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। पूजा में कृष्ण के पसंद की सभी चीज़ें उपयोग की जाती है। इस बार जन्माष्टमी ( janmashtami 2019 ) दो दिन मनाई जा रही है। चारों तरफ माहौल कृष्णमई हो गई है। इस दिन कई लोग व्रत उपवास रखते हैं और रात 12 बजे कृष्ण पूजा के बाद व्रत खोलते हैं।

मान्यता है कि द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादो माह की अष्टमी को आधी रात में हुआ था। यही कारण है कि हर साल जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा आधी रात को की जाती है। कृष्ण के जन्म के बाद उनका सुंदर श्रृंगार किया जाता है, लोग उन्हें झूला झुलाते हैं और विधिवत पूजा की जाती है। लेकिन एक बात हमेशा ध्यान रखें की कृष्ण की पूजा के बाद आरती ( krishna aarti ) जरूर करें, तभी पूजा पूरी मानी जाएगी...

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भगवान श्रीकृष्णजी की आरती

आरती कुंज बिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजन्तीमाला बजावैं मुरलि मधुर बाला॥
श्रवण में कुंडल झलकाता नंद के आनंद नन्दलाला की। आरती...।

गगन सम अंगकान्ति काली राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर-सी अलक कस्तूरी तिलक।
चंद्र-सी झलक ललित छबि श्यामा प्यारी की। आरती...।

कनकमय मोर मुकुट बिलसैं देवता दरसन को तरसैं।
गगन से सुमन राशि बरसैं बजै मुरचंग मधुर मृदंग।
ग्वालिनी संग-अतुल रति गोपकुमारी की। आरती...।

जहां से प्रगट भई गंगा कलुष कलिहारिणी गंगा।
स्मरण से होत मोहभंगा बसी शिव शीश जटा के बीच।
हरै अघ-कीच चरण छवि श्री बनवारी की। आरती...।

चमकती उज्ज्वल तट रेनू बज रही बृंदावन बेनू।
चहुं दिशि गोपी ग्वालधेनु हंसत मृदुमन्द चांदनी चंद।
कटत भवफन्द टेर सुनु दीन भिखारी की। आरती...।

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