डोलयात्रा को पर्यटन स्थल आभानेरी की चांदबावड़ी में जाने से रोका तो हुआ हंगामा

By: Rajendra Kumar Jain

Updated On: 10 Sep 2019, 02:19:55 PM IST

  • जलझूलनी एकादशी पर निकली डोलयात्राएं

आभानेरी (बांदीकुई). प्रसिद्ध पर्यटन स्थल आभानेरी की चांदबावड़ी में जलझूलनी एकादशी पर प्रवेश नहीं दिए जाने पर ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद प्रवेश दिया गया। प्रतिवर्ष ठाकुरजी के मंदिर से एकादशी पर जल विहार यात्रा निकाली जाती है, लेकिन चालू सत्र में चांदबावड़ी पर प्रवेश पर टिकट लागू कर दिया गया। ऐसे में जैसे ही जल विहार यात्रा कस्बे के प्रमुख मार्गों से होकर चांदबावड़ी पहुंची।

जहां तैनात सुरक्षा गार्डो ने अंदर नहीं जाने से रोक दिया। इसको लेकर ग्रामीण अमरसिंह म्हाणा, पंकज इंदौरिया, रत्तीराम छाबड़ी सहित अन्य लोगों ने विरोध जताया। इसको लेकर काफी देर तक हंगामा हुआ। बाद में ग्रामीणों ने प्रशासन से दूरभाष पर बातचीत कर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। लोगों ने बताया कि गांव की परम्परा है कि चांदबावड़ी में ही जल विहार यात्रा आती है और स्नान किया जाता है। बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद प्रवेश दिया गया।इसके बाद ग्रामीणों ने चांदबावड़ी में स्नान किया और भीड़ अधिक होने के कारण चांदबावड़ी का दृश्य फिल्म जैसा दिखाई दिया।

दौसा. जलझूलनी एकादशी पर सोमवार को जिले में भगवान के विग्रहों की डोलयात्राएं निकाली गई। दौसा शहर में करीब आठ-नौ मंदिरों से डोलयात्राएं निकाली गई। जिनका संगम गुप्तेश्वर दरवाजे पर हुआ। श्याम मंदिर से ठाकुरजी को जल विहार के लिए डोलयात्रा निकाली गई। श्याम प्रभु का रथ आकर्षण का केन्द्र रहा। गेटोलावधाम पहुंचने पर जल विहार के बाद पूजा की गई।

मेहंदीपुर बालाजी. पूर्वी राजस्थान के सबसे बड़े धार्मिक स्थल मेंहदीपुर बालाजी में जलझूलनी एकादशी पर सोमवार को ठाकुरजी ने जलविहार किया। शाम करीब चार बजे महंत किशोरपुरी महाराज के सानिध्य में बालाजी मंदिर से निकली डोलयात्रा गाजे बाजे के साथ रवाना हुई। मंदिर पुजारी चंवर झुलाते चल रहे थे। यात्रा बालाजी मंदिर के नजदीक टोडाभीम रोड पर स्थित जलाशय पर पहुंची। जहां बालाजी सिद्धपीठ महंत किशोरपुरी महाराज के सान्निध्य में पंडितों ने ठाकुरजी की पूजा अर्चना कर महाआरती का आयोजन किया।

पाठशाला से निकली डोल यात्रा का जलाशय पर संगम हुआ। डोल के आगे आगे मंदिर के द्वारपाल चल रहे थे। जल विहार के बाद ठाकुरजी को नवीन पोशाक धारण कराई एवं बालाजी मंदिर में विराजमान किया गया। डोलयात्रा के बाद महंत किशोरपुरी महाराज के सानिध्य में महाप्रसादी का वितरण किया गया। इसी प्रकार उदयपुरा गांव में ठाकुर जी के मन्दिर पर भी डोल यात्रा निकाली गई।
बालाजी को 51 मण प्रसाद का लगाया भोग : जलझूलनी एकादशी पर बालाजी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत किशोरपुरी के निर्देश पर बालाजी महाराज को 51 मण प्रसादी का भोग लगाया। प्रसाद में काजू की बरफी, हलवा एवं छप्पन भोग की प्रसादी का भोग लगाकर भक्तों में वितरण किया।

 बडिय़ाल कलां . उपतहसील क्षेत्र में जलझूलनी एकादशी पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। बडियाल कलां, रलावता, नंदेरा, मंूडघिस्या एवं खेड़ी ग्राम पंचायत सहित आस पास के क्षेत्रो में मंदिरों में झांकी सजाकर डोल यात्रा निकाली गई।

गुढ़लिया-अरनिया . कस्बे के सीताराम व गोपाल जी के मंदिर से जलझूलनी एकादशी पर जल विहार यात्रा निकाली गई। जो कि कस्बे के प्रमुख मार्गो से होकर गुजरी। इसमें श्रद्धालु जयघोष लगाते हुए चल रहे थे। पं.श्यामुसंदर पाराशर व पं.सीताराम शर्मा ने जल विहार यात्रा को रवाना किया। कृष्णकांत जांगिड़, संजय शर्मा, प्रेमकुमार गुप्ता, सुनील शर्मा, गजानंद पाराशर, शुभम जैमन, मधूसूदन शर्मा ने भी शिरकत की।

कुण्डल . कस्बे सहित कालोता, भेडोली, सिण्डोली, जामा, निमाली, खोर्रा-खुर्द, कालीपहाडी, भांवता-भांवती सहित आस-पास के क्षेत्र में सोमवार को ठाकुरजी के मन्दिरों से फूल डोल यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। कुण्डल कस्बे के मुरलीमनोहरजी के बड़े मन्दिर, भागवती मन्दिर और सीतारामजी के मन्दिर से डोल यात्रा निकाली गई।

लालसोट . डिडवाना व शिवसिंहपुरा गांव में विभिन्न मंदिरों ठाकुर जी की डोल यात्राएं निकाल कर धनेश्वर तालाब मंदिर पर पहुंंची। इसी तरह चांदावास गांव में भी धूमधाम के साथ ठाकुर जी की डोल यात्रा खारली बांध पर पहुंची।

बसवा . कस्बे में जलझूलनी एकादशी पर शाही लवाजमे के साथ ठाकुरजी की डोलयात्रा निकाली गई। जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। श्रीकल्याणजी के मंदिर से शाही रथ में ठाकुरजी की डोलयात्रा रवाना हुई । यात्रा के आगे दो ऊंट व दस घोडिय़ों का शाही लवाजमा चल रहा था। लोग हाथों में झण्डा लेकर जयकारे लगाते चल रहे थे। महिलाओं ने भजनों पर जमकर नृत्य किया।
यात्रा में भगवान परशुराम की सजीव झांकी सजाई गई । निजी विद्यालयों की ओर से राधा कृष्ण, हिरण्यकश्यप, भगवान शंकर की सजीव झांकियां सजाई गई। यात्रा में घोडिय़ां नृत्य करते हुए चल रही थी । सूरतराम की तलाई पर पहुंचने पर ठाकुरजी के वस्त्र धोए गए।उसके बाद यात्रा कल्याणजी के मंदिर पहुंची।
46 वर्ष बाद निकली यात्रा: महंत कमल व मुरारी साहू ने बताया कि सन 1973 में कल्याणजी के मंदिर से डोल यात्रा निकाली गई थी। उसके बाद सोमवार नौ सितम्बर को छियालीस वर्ष बाद शाही लवाजमे के साथ डोलयात्रा निकाली गई है।


सिकंदरा. कस्बे सहित छोकरवाड़ा, भंडारी, ईंटका, बासड़ा, राजवास सहित आसपास के गांवों में डोलयात्रा निकाली। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। निहालपुरा गांव में ठाकुरजी की डोलयात्रा खेड़ापति बालाजी मंदिर पहुंची। लक्ष्मणङ्क्षसह छावड़ी, सेवानिवृत्त कैप्टन सोहनसिंह, सुमेरसिंह राजावत, कैलाश मैम्बर, महावीरसिंह आदि मौजूद थे।

महेश्वराकला . कस्बे के गोपालजी पंचायती मंदिर में सोमवार को शास्त्रीय संगीत भजन संध्या का आयोजन हुआ। इससे पहले जलझूलनी एकादशी पर पर गोपालजी पंचायत मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर और निम्बार्क धाम से डोलयात्रा निकाली गई। जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। भजन संध्या में कलाकारों ने एक से बढकऱ एक भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को नाचने पर मजबूर कर दिया।

महुवा. यहां कस्बे सहित उपखण्ड क्षेत्र में जलझूलनी एकादशी के अवसर पर लोगों ने ठाकुरजी के मंदिरों से सजा कर डोले निकालें । जानकारी के अनुसार कस्बे स्थित गोपीनाथ मंदिर, वैदेही मंदिर, रामबाबू की बगिची मंदिर सहित ग्रामीण क्षेत्र में पलानहेड़ा, नौरंगपुरा, रौत हडिय़ा सहित सभी गांव में हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की गाते हुए भक्तों ने ठाकुर जी के भव्य डोले सजाकर निकाले।

मंडावर. कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र में सोमवार को भाद्रपद शुक्ल एकादशी जलझूलनी ग्यारस पर भक्तों ने ठाकुर जी के दर्शन किए। सेठ सुरेश चंद दानपुर वालों ने बताया कि एकादशमी ंमहिला एवं पुरुष व्रत रख कर भगवान कृष्ण की उपासना करते हैं। वही सायंकाल ठाकुर जी के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोला जाता है ।

Updated On:
10 Sep 2019, 02:19:54 PM IST

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