55 रुपए के दूध में मिलाया जा रहा 11 रुपए का पानी

By: Laxmi Kant Tiwari

Updated On: 25 Aug 2019, 12:28:53 AM IST

  • एक लीटर में मिलाया गया था २०० ग्राम पानी दिल्ली से आई टीम ने भी पाया था पानी मिला दूध फिर भी सतर्क नहीं हो सकी खाद्य सुरक्षा टीम

     

दमोह. जिले में किसी भी व्यक्ति को शुद्ध दूध नहीं मिल पा रहा है। ५५ रुपए लीटर तक बेचे जाने वाले गाय व भैंस के दूध में ११ रुपए का पानी मिलाया जा रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शुद्ध दूध का दाम चुकाने वाले ग्राहक को आखिर ११ रुपए का पानी मिलाकर क्यों बेचा जा रहा है। एक लीटर में करीब २०० ग्राम पानी मिलाकर दूध बेचा जा रहा है। जबकि लोगों से शुद्ध दूध के रुपए वसूले जा रहे हैं। खास बात यह है कि दिल्ली मुख्यालय से आई भारतीय खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने निरीक्षण करने के बाद जो सेंपल लिए थे। उसमें भी अधिकांश सेंपल में दूध में पानी की मिलावट होना पाया गया था। जुलाई माह में भी चलाए गए दूध सेंपलिंग अभियान में ६१ सेंपल भोपाल मुख्यालय भेजे गए थे। जिसमें से अभी तक ६ सेंपल की रिपोर्ट आई। जिसमें से दो सेंपल में कमियां पाए जाने की बात सामने आई है। दोनों सेंपल में दूध के फेड की मात्रा कम थी। जिसमें प्रति लीटर २० प्रतिशत अर्थात २०० ग्राम पानी की मिलावट होने की बात सामने आई।
शहर के साथ जिले भर में गाय-भैंस के दूध को शुद्ध पाने के लिए लोग तरस रहे हैं। फिर भी शुद्ध दूध नहीं मिल पा रहा है। जिले की करीब १३ लाख से अधिक आबादी के लिए अनुमानित करीब १२ हजार लीटर दूध की खपत होना माना जा रहा है। जबकि जिले में गाय-भैंस एवं बकरियों की संख्या के अनुरूप जिले में अधिकतम ५ हजार लीटर दूध का उत्पादन होना पाया गया है। ऐसे में फिर बाकी की खपत के लिए दूध कहां से आता है। इस मामले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी विभिन्न कंपनियों के पैक्ट दूध व जिले से लगे ग्रामीण अंचलों से आने वाले दूध से कमी पूरी होने की बात कह रह हैं।
औपचारिकताओं में लगा रहता है खाद्य विभाग-
जिले में लगभग हर सप्ताह व कई बार सप्ताह में तीन से ४ दिन सेंपलिंग की कार्रवाई करने की खबरें भेजी जाती हैं। लेकिन जिस कमी को दिल्ली की टीम ने भी पाया उस कमी को पूरी करने के लिए अब तक खाद्य सुरक्षा विभाग एक मामले में ही जनता को शुद्ध दूध भी उपलब्ध नहीं करा पाई है।

पानी की हो रही मिलावट-
ेजिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश अहिरवार ने का कहना है कि पिछले पांच साल का रिकॉर्ड उन्होंने देखा है जिसमें करीब १८० सेंपल दूध वालों के लेकर उनकी जांच कराई जिसमें किसी भी विक्रेता के दूध का सेंपल ऐसा नहीं निकला कि उसके द्वारा बेचे जा रहे दूध में यूरिया, वॉशिंग पाउडर,खाने का सोड़ा या कोई अन्य कैमीकल पाया गया हो। हां, अधिकांश दूध सेंपल में पानी मिला होना जरुर पाया गया। जिसमें एडीएम के यहां से आरोपियों को जुर्माने की सजाएं सुनाईं गईं।

दिल्ली की टीम ने किया था गुप्त निरीक्षण -
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश अहिरवार ने बताया कि पिछले दिनों दिल्ली से भारतीय खाद्य सुरक्षा विभाग ने गुप्त जांच कराते हुए दूध बेचने वालों के ८० सेंपल लिए थे। सभी को जांच के लिए भेजा गया। जिसमें से अधिकांश में पानी की मिलावट तो पाई गई, लेकिन किसी भी सेंपल में घातक कैमिकल का पाया जाना नहीं पाया गया।

ऐसे होता है खतरनाक साबित-
जानकार बताते हैं कि यदि दूध में यूरिया की मिलावट की जाती है तो मरीज को खून की उल्टी और लकवे जैसी समस्या आ सकती है। जिससे अधिक गंभीर होने के बाद उसकी मौत भी हो जाती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा कृतिम और मिलावटी दूध के कारोबार से सिंथेटिक मावा भी तैयार किया जा रहा है। पिछले दिनों देहात थाना क्षेत्र के जबलपुर नाका चौकी क्षेत्र में सिंथेटिक खोवा जब दमोह लाया जा रहा था। तभी अचानक पुलिस व खाद्य विभाग की टीम ने एक क्विंटल सिंथेटिक मावा जब्त कर उसे विनिष्टीकरण कराया था।

ऐसे करते हैं जांच -
दूध में यूरिया मिला है या नहीं इसकी जांच के लिए एक टेस्ट ट्यूब में थोड़ा दूध और सोयाबीन या अरहर का पाउडर मिलाएं, पांच मिनट बाद उसमे लाल लिटमस पेपर डुबोएं। अगर पेपर का रंग नीला होने पर स्पष्ट हो जाएगा कि दूध मे यूरिया की मिलवाट की गई है। इसी तरह से डिटरजेंट की मिलावट का पता लगाने के लिए दूध में 0.1 उस बीसीपी सॉल्युशन मिलाने पर दूध का रंग बैंगनी हो जाता है, जिससे डिटरजेंट की मिलावट होना तय माना जाता है। इसी तरह से लैक्टोमीटर जो बाजार में आसानी से मिल जाता है। जिसमें डिग्री डालकर भी दूध को चैक किया जाता है। पीएच स्ट्रिप में दूध की एक बूंद डालें, अगर दूध शुद्ध होगा तो पीएच रेशो 6.4 से 6.6 होगा और अगर यह इससे कम या ज्यादा पाया जाता है तो निश्चित ही उसमें मिलावट होने की संभावना तय रहती है।

किस तरह की सजाओं का है प्रावधान -
ेबताया गया है कि किसी दूध विक्रेता द्वारा अमानक दूध बेचा जाता है, तो उसे ५ लाख रुपए तक के जुर्माने की सजा सुनाई जा सकती है। अगर किसी भी विक्रेता के द्वारा बेचे जाने वाले दूध के लिए गए सेंपल में यूरिया, वॉशिंग पाउडर, खाने का सोड़ा या फिर कोई अन्य घातक कैमिकल पाया जाता है जिससे इंसान के स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव पड़ता है या उसके लिए जानलेवा साबित होता है, तो ऐसे लोगों को छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। जिसमें ५ लाख रुपए तक का जुर्माना भी है।

लगातार जांच की जाती है-
शहर के साथ जिले भर में कार्रवाई की जाती है। लेकिन पिछले पांच साल में किसी भी घातक कैमीकल का दूध में मिला होना नहीं पाया गया है। जांच आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
राकेश अहिरवार -जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी

Updated On:
25 Aug 2019, 12:09:30 AM IST

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