वृद्धों के आश्रम में मजदूरों ने जमा लिया डेरा

By: Jitender Saran

Updated On:
10 Sep 2019, 09:20:55 PM IST

  • शहर के अधिकांश इलाकों में सरकार की ओर से बनवाए गए सामुदायिक भवन अब बस्तीवासियों के लिए उपयोगी नहीं रहे। सरकारी अनदेखी का आलम यह है कि जिस सामुदायिक भवन को असहाय वृद्धजन के लिए वृद्धाश्रम बनाया गया था, वहां भी निर्माण कार्यों पर लगे मजदूरों ने डेरा जमा लिया है। यहां चारों तरफ कीचड़ और गंदगी पसरी हुई है।

चित्तौडग़ढ़
शहर के अधिकांश इलाकों में सरकार की ओर से बनवाए गए सामुदायिक भवन अब बस्तीवासियों के लिए उपयोगी नहीं रहे। सरकारी अनदेखी का आलम यह है कि जिस सामुदायिक भवन को असहाय वृद्धजन के लिए वृद्धाश्रम बनाया गया था, वहां भी निर्माण कार्यों पर लगे मजदूरों ने डेरा जमा लिया है। यहां चारों तरफ कीचड़ और गंदगी पसरी हुई है।
शहर के हर वार्ड में सरकार ने इस मंशा के साथ सामुदायिक भवन का निर्माण करवाया था, ताकि वार्ड क्षेत्र में निवास करने वाले लोग सामाजिक, पारिवारिक आयोजनों में इसका उपयोग कर सके। इन सामुदायिक भवनों में बाथरूम व शौचालय सहित कई सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई गई। लेकिन सरकार की ओर से बनवाए गए इन सामुदायिक भवनों का उपयोग बस्ती के लोगों के लिए नहीं हो पा रहा है।
धाकड़ मोहल्ले में १८ जुलाई २००४ को तत्कालीन उद्योग मंत्री नरपतसिंह राजवी ने सामुदायिक भवन का उद्घाटन कर इसे वार्ड क्षेत्र की जनता को समर्पित किया था। उद्घाटन के बाद से ही इसका उपयोग वार्ड क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत कम हुआ। रख-रखाव के अभाव में यहां कीचड़ और गंदगी पसर गई। कुछ समय पहले इस सामुदायिक भवन को वृद्धाश्रम में तब्दील कर दिया गया, ताकि असहाय वृद्धजन यहां रहकर बेहतर जीवन बीता सके। यहां कुछ दिन तो गिनती के वृद्ध रहे थे, लेकिन अब इस आश्रम में वृद्धजन के बजाय सरकारी निर्माण कार्यों पर काम करने वाले मजदूरों ने डेरा जमा लिया है। इससे पहले भी यहां ठेकेदार के श्रमिक निवास करते रहे हैं।
कुंभा नगर सामुदायिक भवन पर भी जमा लिया कब्जा
शहर के कुंभा नगर इलाके में भी करीब दो दशक पहले सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया था। इसका उद्घाटन १९ अक्टूबर १९९९ को तत्कालीन नगर पालिकाध्यक्ष महेश ईनाणी ने किया था। क्षेत्र के लोगों के लिए यह सामुदायिक भवन उपयोगी भी रहा। सार्वजनिक पार्क में स्थित इस सामुदायिक भवन में अब संबंधित ठेकेदार ने एक परिवार को बसा दिया है। पूरे सामुदायिक भवन पर सिर्फ एक परिवार का कब्जा है। फिर भी जिम्मेदार मौन है। सामुदायिक भवन का बाथरूम और शौचालय स्मैकचियों का डेरा बना हुआ है, जिससे क्षेत्र में चोरी जैसी वारदातों की आशंका बनी रहती है। सामुदायिक भवन के पीछे बनाई गई सुरक्षा दीवार भी तोड़ दी गई है। यहां तक कि किसी ने सामुदायिक भवन व पार्क में प्रवेश के लिए यहां लोहे का गेट तक लगवा दिया है। बड़ी बात यह है कि क्षेत्र के पार्षदों ने भी कभी वृद्धाश्रम और सामुदायिक भवन की तरफ झांक कर भी नहीं देखा।

Updated On:
10 Sep 2019, 09:20:55 PM IST

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