फसलों में सत्तर फीसदी तक खराबा, कर्ज में दबे किसान

By: Jitender Saran

Updated On:
10 Sep 2019, 08:18:08 PM IST

  • जिले भर में अबकी बार के मानसून में हो रही बारिश ने फसलें बर्बाद कर किसानों को कर्ज में डूबो दिया। खेतों में पानी भरने से प्रमुख फसल मक्का और सोयाबीन सहित खरीफ की फसलों में नुकसान का आंकड़ा करीब सत्तर फीसदी तक पहुंच गया है। उधार लाकर बंपर उत्पादन के लिए बुवाई करने वाले किसानों की उम्मीदों को बारिश के पानी ने धो दिया है।

चित्तौडग़ढ़
जिले भर में अबकी बार के मानसून में हो रही बारिश ने फसलें बर्बाद कर किसानों को कर्ज में डूबो दिया। खेतों में पानी भरने से प्रमुख फसल मक्का और सोयाबीन सहित खरीफ की फसलों में नुकसान का आंकड़ा करीब सत्तर फीसदी तक पहुंच गया है। उधार लाकर बंपर उत्पादन के लिए बुवाई करने वाले किसानों की उम्मीदों को बारिश के पानी ने धो दिया है।
चित्तौडग़ढ़ जिले में इस बार कृषि विभाग के लक्ष्य के मुकाबले २.२२ फीसदी अधिक बुवाई की गई थी। कृषि विभाग का इस बार ३.१० लाख हैक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य था। इसके मुकाबले ३ लाख १६ हजार ८७५ हैक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई। सर्वाधिक १ लाख १९ हजार ६१७ हैक्टेयर क्षेत्र में मक्का व १ लाख ३ हजार ४२० हैक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई की गई थी। इस बार किसानों को बंपर उत्पादन की उम्मीद थी और इसी के चलते कई किसानों ने उधार रूपए लाकर बुवाई कर दी। लेकिन इस मानसून में बारिश की अधिकता के चलते खेतों में पानी भर गया। शुरुआती दौर में कृषि विभाग के अधिकारियों और किसानों को उम्मीद थी कि खेतों से पानी निकल जाएगा और फसलें प्रभावित नहीं होगी, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने खेतों से पानी की निकासी नहीं होने दी, इससे मक्का और सोयाबीन सहित खरीफ की फसलें खेतों में ही गल गई। कई खेतों में तो फसलें गलने से सड़ांध भी आने लगी है।
सत्तर फीसदी तक तबाह हो गई फसलें
कृषि विभाग ने खरीफ की फसलों में साठ प्रतिशत तक नुकसान होना माना है और उच्च स्तर पर भी यही रिपोर्ट भेजी गई है, लेकिन रिपोर्ट भेजने के बाद यह नुकसान सत्तर फीसदी तक पहुंच गया है।
कहां कितना हुआ नुकसान
विभागीय आंकड़ों के अनुसार चित्तौडग़ढ़ के पाल, पालका, सादी, बस्सी, सोनगर, विजयपुर, भैरूखेड़ा, घटियावली, ऐराल, गिलुण्ड, ओडूंद, नारेला, सांवता, सेमलपुरा, सामरी, शंभूपुरा, आंवलहेड़ा, नगरी व अभयपुर आदि इलाकों में फसलों में १५ से ५५ प्रतिशत तक नुकसान हुआ है।
निम्बाहेड़ा क्षेत्र के सेमलिया, बिनोता, रावलिया, सतखण्डा, टाई, भैरकिया, मेवासा की ढाणी, कनेरा, बांगेड़ा घाटा, भोपाली, मांगरोल, मुरलिया, निम्बाहेड़ा, फाचर सोलंकी, रामपुरा, आजमपुरा आदि गांवों में भी फसलों को पचपन प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है।
भदेसर के लुहारिया, रतनपुरा, भादसोड़ा, कूंथना, सुखवाड़ा, पंचदेवला, सरलाई, होड़ा, भूतिया, बानसेन, कंथारिया, फतेहपुरा, रकमपुरा, नन्नाणा आदि गांवों में चालीस प्रतिशत तक नुकसान आंका गया है।
बेगूं के दौलतपुरा, मण्डावरी, जय नगर, बेगूं, दौराई, भगपुरा, अनोपपुरा, मेघपुरा, काटूंदा, सुवानिया, सामरिया, कुलाटिया नई, चेंची, धामंचा, गोविन्दपुरा, पारसोली, खेरी, नंदवई, गोपालपुरा आदि गांवों में फसलों को पैंतालीस फीसदी तक नुकसान का आकलन किया गया है। रावतभाटा व गंगरार क्षेत्र के गांवों में पचास प्रतिशत तक फसलों में नुकसान हुआ है।
यहां मात खा गया कृषि विभाग का आकलन
कृषि विभाग की ओर से तैयार की गई फसलों में नुकसान की रिपोर्ट में डूंगला, बड़ीसादड़ी, कपासन, भोपालसागर व राशमी में खरीफ की फसलों में बिल्कुल नुकसान नहीं होना माना गया है। जबकि इन इलाकों के गांवों में भी भारी नुकसान होने के समाचार मिल रहे हैं।
ऐसे मिलेगा नुकसान का बीमा क्लेम
जिन किसानों ने फसलों का बीमा करवाया हुआ है, उन्हें फसलें खराब होने के ७२ घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी को टोल फ्री नम्बर पर सूचना देनी होगी। कृषि विभाग में भी इसके लिए आवेदन किए जा रहे हैं। खेतों में पानी भरने से खराब हुई फसलों को भी बीमा में कवर किया हुआ है।
मोबाइल एप की लेंगे मदद
इस बार फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए फसल कटाई प्रक्रिया में मोबाइल एप का भी उपयोग किया जाएगा। फसल कटाई प्रयोगों के आधार पर प्रभावित किसानों को क्लेम राशि दी जाएगी।

Updated On:
10 Sep 2019, 08:18:08 PM IST

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