कॉलेज में लाखों का घपला, विशेष अंकेक्षण ऑडिट कराने के नाम पर पुलिस डाल रही पर्दा

By: kalulal lohar

Updated On: 11 Jul 2019, 03:59:52 PM IST

  • महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 14 माह पूर्व हुए गबन मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर छात्रसंघ व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कारवाई की मांग को लेकर कई बार ज्ञापन व प्रदर्शन कर चुकी है।

विशेष अंकेक्षण ऑडिट की रिपोर्ट नहीं आई, पुलिस प्रशासन ने झाड़ा पल्ला
छात्रसंघ व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सौंपा ज्ञापन
विशेष अंकेक्षण दल से जांच कराने की मांग
चित्तौडग़ढ़. महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 14 माह पूर्व हुए गबन मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर छात्रसंघ व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कारवाई की मांग को लेकर कई बार ज्ञापन व प्रदर्शन कर चुकी है। छात्रसंघ अध्यक्ष पहलवान सालवी ने बताया कि इसी को देखते हुए कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने महाविद्यालय प्राचार्य को एफआईआर दर्ज करने के लिए निर्देशित किया था किंतु कॉलेज शिक्षा निदेशालय के द्वारा केवल एफआईआर दर्ज करने के ही निर्देश जारी किए गए थे, एफआईआर दर्ज होने के पश्चात भी मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर विशेष अंकेक्षण ऑडिट की रिपोर्ट नहीं आना बता कर कार्रवाई के नाम पर पल्ला झाड़ लिया। इस मामले में अतिशीघ्र महाविद्यालय में इस गबन की जांच के लिए विशेष अंकेक्षण दल से इसकी जांच कराई जाए जिससे दोषियों पर करवाई हो। इस मामले में कॉलेज शिक्षा निदेशालय द्वारा कोई कारवाई नहीं होने छात्रों द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी महाविद्यालय प्रशासन व कॉलेज शिक्षा निदेशालय की रहेगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान कॉलेज इकाई उपाध्यक्ष शंभू लाल मेघवाल सहित कार्यकर्ता मौजूद थे।

कैसे हुआ गबन का खुलासा
गत वर्ष जनवरी में कॉलेज में जनसहभागिता से नए कक्षाकक्ष बनाने की घोषणा की गई। इस कार्य के लिए तत्कालीन प्राचार्य आरएम कोचिटा ने २५ लाख रुपए की राशि का चेक बैंक में जमा कराने को दिया तो वहां से बैलेंस कम बताया गया। कॉलेज की कैश बुक इससे अधिक राशि जमा होना बता रही थी तो प्राचार्य को छात्र कोष की राशि में गबन की आशंका हुई। प्रारम्भिक पड़ताल के बाद कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय को मामले की रिपोर्ट भेज दी गई। इसके बाद पता चला कि पांच वर्ष तक लेखाजोखा में
गड़बड़ी है।
समिति की जांच में प्रथम दृष्टया गबन प्रमाणित
महाविद्यालय विकास समिति के मौद्रिक लेनदेन में वित्तीय अनियमितता के आरोप में कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने २५ जून २०१८ को कैशियर विक्रमसिंह को निलंबित कर दिया था। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के संयुक्त निदेशक (प्रशासन) के निर्देश पर मामले की जांच के लिए २१ दिसम्बर का जांच समिति गठित की गई। इसमें चार सदस्यों के साथ संयोजक डॉ. रघुवीरसिंह पंवार थे। जांच में निजी लेखा विशेषज्ञ की भी सहायता ली गई एवं लेखा व रोकड़ विभाग में उपलब्ध दस्तावेजों को खंगाला गया। समिति ने ४ जनवरी को प्राचार्य को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में विक्रमसिंह के कैशियर रहते हुए एक अप्रेल २०१३ से ३१ मार्च २०१८ के मध्य प्रथम दृष्टया ८८ लाख ९४ हजार ९०५ रुपए की राजकीय राशि का गबन करना प्रमाणित
माना गया।

Updated On:
11 Jul 2019, 12:14:53 AM IST

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।