नौकरी करनी है तो संस्कृत आना जरूरी

By: prashant sahare

Published On:
Mar, 31 2017 05:48 PM IST

  • स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने ऐसी मंशा जाहिर करते हुए संस्कृत विषय अनिवार्य करने की बात कही है।
छिंदवाड़ा . मध्य प्रदेश में नौकरी करनी है तो संस्कृत आना जरूरी होगा। स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने ऐसी मंशा जाहिर करते हुए संस्कृत विषय अनिवार्य करने की बात कही है। गुरुवार को शहर में यह चर्चा का विषय रहा। लोगों ने इस पर बहस भी की। उनका कहना था कि अब तक प्राथमिक स्तर पर बच्चे संस्कृत विषय से वंचित हैं। दरअसल, एक से पांचवीं तक के पाठ्यक्रम में संस्कृत नहीं है। बच्चा जब छठवीं में प्रवेश लेता है तो वह संस्कृत से रूबरू होता है।

दसवीं तक संस्कृत विषय पढऩा अनिवार्य किया गया है। इसके पश्चात 11वीं में यह वैकल्पिक विषय के तौर पर चुना जाता है। संस्कृत की शिक्षिका मंगला कहती हैं कि संस्कृत एक ऐसी भाषा है जो सभी भाषाओं की जननी है। ऐसे में इस भाषा का विलोपन होना ठीक नहीं। मंत्री की इस मंशा से संस्कृत के शिक्षकों में इसे लेकर हर्ष व्याप्त है।

बता दें कि भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित राज्यस्तरीय संस्कृत सम्मेलन में स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा है कि प्रदेश में संस्कृत भाषा को रोजगार की भाषा बनाने के ठोस प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए कक्षा पहली से 12वीं तक संस्कृत विषय समाहित किया जाएगा, साथ ही संस्कृत को अनिवार्य किया जाएगा और संस्कृत को मध्यप्रदेश की भाषा बनाया जाएगा यानी अब प्रदेश में वही युवा नौकरी करेगा, जिसे संस्कृत आती है।

'आते हैं अच्छे नम्बर फिर भी दूर हो रहे छात्र
स्कूलों की मानें तो संस्कृत विषय में विद्यार्थियों के अच्छे नम्बर आते हैं यानी वह शुरुआत में दिलचस्पी लेकर पढ़ते हैं। अधिकतर स्कूलों में तो बच्चे 100 में से 60 से 70 नंबर तक प्राप्त करते हैं। इसके बावजूद भी 11वीं में इस विषय में विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम हो जाती है। विद्यार्थियों की मानसिकता है कि संस्कृत से डिग्री-डिप्लोमा करने के बाद अवसर
कम मिलता है जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है।

महज 173 स्वीकृत पद : जिले में शासकीय स्कूलों में संस्कृत विषय के शिक्षकों के कुल 173 पद स्वीकृत हैं। जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि जिले में संस्कृत विषय का कोई अलग से शासकीय स्कूल संचालित नहीं है।

Published On:
Mar, 31 2017 05:48 PM IST