काम करके देखिए, हमसे बेहतर नहीं कर सकता कोई

By: Hamid Khan

Updated On:
25 Aug 2019, 07:12:16 AM IST

  • शिक्षकों ने बच्चों से कहा


छतरपुर. मंगल ग्राम ललौनी एवं गौरगांय सहित बनगांय के स्कूलों में शनिवार को अल्पविराम और आनंद सभा का आयोजन किया गया। मास्टर ट्रेनर लखन लाल असाटी के साथ आनंद क्लब पदाधिकारी रिटायर्ड जिला योजना अधिकारी एसके गुप्ता, रिटायर्ड एसएलआर आरबी वर्मा, रिटायर्ड सीनियर लैब टेक्नीशियन केएन सोमन एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक डॉ. आरबी पटेल द्वारा सत्रों का संचालन किया गया।
पारिवारिक रिश्तों को लेकर लिए गए शांत समय के बाद गोरगांय के एक छात्र ने कहा कि उसका अपने पिता से उनके बीड़ी पीने को लेकर झगड़ा होता रहता है। पिता के नहीं मानने पर वह उनका बीड़ी बंडल फेंक देता है। जिस कारण उसे डांट फटकार और मार भी सहनी पड़ रही है। उसने पिता को समझाया है कि बीड़ी से कैंसर होता है, पर पिता कहते हैं कि वह बीड़ी के अलावा और कोई नशा नहीं करते हैं इसलिए उन्हें बीड़ी पीने दी जाए। छात्र की बातों को सुनकर यह तय किया गया कि अगले शनिवार को अभिभावकों के साथ अल्पविराम किया जाएगा।
मंगल ग्राम ललौनी के नवीन माध्यमिक स्कूल में शांत समय लेकर छात्रों से पूछा गया कि उनके रसोइयों के साथ कैसे संबंध हैं। छात्रों ने कहा ठीक है, फि र यह बात सामने आई कि जिस तरह से घर में मां भोजन बनाती और खिलाती है उसी तरह रसोईया भी स्कूल में भोजन बनाती और कराती हैं। इसलिए सभी बच्चों को रसोइयों के प्रति मां जैसा भाव होना चाहिए। इससे मध्यान भोजन में और अधिक संतुष्टि मिलेगी, बच्चों के इस संकल्प से अभिभूत रसोइयों ने कहा कि वह भी इन छात्रों में अपने बच्चों को देखेंगी।
शिक्षकों के खेल से छात्रों को मनोरंजन के साथ प्रेरणा भी मिली :
शासकीय हाईस्कूल बनगांय में चिंता करना व्यर्थ है विषय पर आनंद सभा का आयोजन किया गया। 30 सेकंड तालियां बजाने से मिले दो बड़े संदेशों का सभी ने अनुभव किया। पहला हम अपनी क्षमताओं को कम आंकते हैं और दूसरा किसी काम को करके देखिए हम से बेहतर कोई नहीं कर सकता है। धारणागत और काल्पनिक चिंताओं पर चर्चा की गई तथा परीक्षा की चिंता करने के स्थान पर परीक्षा के लिए पढ़ाई करने को महत्वपूर्ण माना गया। स्कूल के समस्त स्टाफ द्वारा खेले गए बौद्धिक गेम का छात्रों ने भरपूर आनंद लिया। विजेता शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने किस तरह इस गेम को जीता। विजेताओं ने कहा कि पहले तो उन्होंने सब कुछ ध्यान से सुना और फि र खेलते समय पूरी जागरूकता के साथ अपने साथियों पर ध्यान केंद्रित रखा। परीक्षाएं भी कुछ इसी तरह से होती हैं कि कक्षाओं में सब कुछ ध्यान से सुना जाए और लिखते समय पूरी एकाग्रता रखी जाए।

Updated On:
25 Aug 2019, 07:12:16 AM IST

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