चातुर्मास में मन को स्वच्छ और निर्मल करती है संतों की वाणी

By: MAGAN DARMOLA

Published On:
Jul, 15 2019 07:45 PM IST

  • चातुर्मास की अवधि पानी और वाणी का समय है। जिस प्रकार पानी प्रकृति को हरा-भरा बनाता है उसी प्रकार संतों की वाणी भक्तों के हृदय को हरा-भरा बना देती है।

चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम मेमोरियल सेन्टर में विराजित साध्वी कंचनकंवर, डॉ.सुप्रभा 'सुधाÓ, डॉ. उदितप्रभा 'उषाÓ, विजयप्रभा, डॉ.हेमप्रभा 'हिमांशुÓ, डॉ.इमितप्रभा, उन्नतिप्रभा, नीलेशप्रभा के सान्निध्य में रविवार को प्रात: सामूहिक नमस्कार महामंत्र का जाप किया गया। डॉ.हेमप्रभा 'हिमांशुÓ, ने कहा कि चातुर्मास की यह अवधि पानी और वाणी का समय है। जिस प्रकार पानी प्रकृति को हरा-भरा बनाता है उसी प्रकार संतों की वाणी भक्तों के हृदय को हरा-भरा बना देती है।

वर्षा के आने पर धरा पर फैला कचरा पानी के साथ बहकर दूर चला जाता है उसी प्रकार संतों के प्रवचनों से मानव के आत्मिक मन में जन्म-जन्मांतर के जमे पाप का नाश होकर मन स्वच्छ व निर्मल बन जाता है। चातुर्मास के समय वीतराग की वाणी जन-मन को शीतल करती है। सांसारिक आधि, व्याधियों से तप्त मानव मन इस समय में महापुरुषों के श्रीमुख से निसृत वीतराग वाणी का श्रवण करता है।

साध्वी ने कहा, वर्षा की यह ऋतु खाने-पीने के लिए नहीं बल्कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र, तप की आराधना करने का मौसम है। इस धर्म की बारिश का लाभ उठा लें तो जीवन सफल हो जाए, अन्यथा इसके बाद तो पछताना ही पड़ सकता है। इस अवधि को आलस में व्यतीत न करें, सत्संग से अपने ज्ञान का खजाना जितना भरना चाहें भर लें।

Published On:
Jul, 15 2019 07:45 PM IST

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।