उपयोगिता, विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धा के साथ सेवाएं मौजूदा समय की मांग

By: MAGAN DARMOLA

Published On:
Jul, 16 2019 05:34 PM IST

  • डा. के. राधाकृष्णन ने कहा समय बदल रहा है, हमें भी उसके साथ बदलने की जरूरत

चेन्नई. बदलते समय के साथ मनुष्य की जरूरतें भी बढ़ती जा रही हैं। मैजूदा समय की भी यही मांग है कि घरेलू और वैश्विक बाजार में उपयोगिता, विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धा के साथ सेवाएं लोगों को मुहैया कराई जाय। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन एंड मेन्युफेक्चरिंग (आईआईआईटीडीएम) चेन्नई के 7वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेते हुए इसरो के पूर्व चेयरमैन डा. के. राधाकृष्णन ने कहा समय काफी बदल रहा है, हमें भी उसके साथ बदलने की जरूरत है।

हममें से कई ऐसे हैं जिन्होंने अपने बचपन में मोबाइल फोन भी नहीं देखा होगा जबकि आज स्मार्टफोन का जमाना है। मौजूदा दौर में लोग 4—जी व्यवहार में ला रहे हैं और आज पासआउट हुए विद्यार्थियों के बच्चे जब होंगे तब जमाना 6—जी का होगा। आज हम सैर करने के लिए ऊटी, शिमला और स्विट्जरलैंड जाते हैं तो एक दिन ऐसा भी आएगा जब लोग सैर करने के लिए मंगल व चंद्रमा पर भी जाएंगे।

देश के कई शिक्षण व शोध संस्थान तकनीकी के विकास में बेहतरीन काम कर रहे हैं। अंतरिक्ष की बात करें तो भारत जो प्रयास कर रहा है वह मुख्यत: मानवहिताय कार्यों के लिए है। अंतरिक्ष विज्ञान में आज हमने जो कर दिखाया है उसे देखकर दुनिया आश्चर्यचकित है। चंद्रयान—1 और मंगल मिशन उसका एक उदाहरण है। चंद्रयान—2 अंतरिक्ष में भारत का रोबोटिक अन्वेषण है। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से कहा ज्ञान अर्जित करने का सही अर्थ एक बेहतर इंसान बनना होता है। सीखने की कोई उम्र नहीं होती इसलिए इंसान को हर वक्त अपने आसपास और छोटे बड़े से सीखते रहना चाहिए।

इस मौके पर संस्थान के चेयरमैन प्रोफेसर एस. सदगोपन ने कहा यह भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी की वैश्विक स्वीकृति का ही नतीजा है जो आईआईआईटीडीएम दो दशक के बाद आज इस मुकाम पर पहुंचा है। यह संस्थान उसी विकास का परिणाम है। चेन्नई ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग कैपिटल के रूप में जाना जाता है जो आईआईआईटीडीएम के विद्यार्थियों के लिए कई अवसर मुहैया कराता है।

आईआईआईटीडीएम चेन्नई के निदेशक प्रोफेसर बंशीधर मांझी ने कहा हमने हाल ही एआई, आईओटी एंड रोबोटिक्स व स्मार्ट मैन्युफेक्चरिंग स्थापित किए हैं और कुछ शोध एवं विकास केंद्रों के गठन की तैयारी की जा रही है। शोध एवं विकास प्रयोगशाला, सिखाने और सीखने के लिए स्टेट ऑफ आर्ट सुविधा एवं टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्युबेशन सेंटर के फेज-3 का निर्माण कार्य प्रगति पर है। दीक्षांत समारोह में 288 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई, जिनमें 13 पीएचडी, 118 बी.टेक., 116 डुएल डिग्री और 41 एमटेक की हैं। इन पासआउट विद्यार्थियों में 32 प्रतिशत लड़कियां हैं। दीपिका के. को ऑल राउंडर गोल्ड मेडल मिला।

Published On:
Jul, 16 2019 05:34 PM IST

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