रेलवे ने हाथियों को बचाने की निकाली तरकीब, 9 साल में 26 कट मरे

जंगल से होकर गुजरने वाली रेल पटरियों के दोनों ओर रेलवे फेंसिंग लगाएगी। ऐसा सुरक्षित रेल यात्रा के साथ ही आए दिन हाथियों के कटकर मर जाने की घटनाओं को रोकने के लिया जा रहा है।

 

 

भुवनेश्वर( महेश शर्मा ): जंगल से होकर गुजरने वाली रेल पटरियों के दोनों ओर रेलवे फेंसिंग लगाएगी। ऐसा सुरक्षित रेल यात्रा के साथ ही आए दिन हाथियों के कटकर मर जाने की घटनाओं को रोकने के लिया जा रहा है। बीते नौ सालों में 26 हाथियों की कटकर मौत हो गयी है।

होगी तारबंदी
रेल फेसिंग कहां-कहां लगायी जाएगी, यह वन विभाग और रेल के अधिकारी तय करेंगे। इस आशय का ओडिशा सरकार के वन विभाग और रेलवे के बीच सहमति बन गयी है। यह सहमति रेलवे और वन विभाग के अधिकारियों की पीसीसीएफ आफिस परिसर में हुई बातचीत के बाद बनी।

स्थान होंगे तय
यह भी तय हुआ कि वन विभाग अंडरपास के लिए भी स्थान चिन्हित करेगा। निर्मांण रेलवे कराएगा। यह भी तय हुआ कि वन विभाग एलीफैंट मूवमेंट कंट्रोल रूम खोरदा और संबलपुर में रेलवे आफिस को और भी मजबूत और उच्च तकनीक के उपकरणों से लैस किया जाएगा।

हाथियों की घटी संख्या
यहां पर उल्लेखनीय है कि ओडिशा में तेज गति वाली रेल गाडियिों से टकराकर बीते 9 साल में 26 हाथियों की मौत हो चुकी है। 16 अप्रैल 2018 को चार हाथियों की तेलदिही झारसुगुडा में ट्रेन दुर्घटना में एक साथ मौत हो गयी थी। एक और भी उल्लेखनीय है कि 1979 में जहां ओडिशा में 2044 हाथी थे वहीं अब यह संख्या घटकर 1976 रह गयी है।

9 साल में कुल 718 मरे
बीते नौ साल पांच महीने के भीतर 718 हाथियों की मौत हुई है। इनमें से 103 को शिकारियों ने हाथी दांत के लालच में मार डाला। 67 हाथियों को शिकारियों ने बिजली के तार बिछाकर मार डाला। 45 हाथियों की मौत बिजली के खंभे तार बिछाने के कारण हुई हाथियों को असुविधा के कारण हो गयी। इसके अलावा 26 हाथियों की ट्रेन से कटकर मौत हो गयी। दो हाथी सड़क दुर्घटना तेज वाहनों से टकराकर मर गए। 11 हाथी गांव वालों द्वारा बनाए गए केनाल, तालाब, कुएं आदि के कारण हुई। इनके अतिरिक्त 329 हाथी बीमारी, आयु बढऩे आदि से मरे तथा 146 हाथियों की मौत का कारण नहीं पता चल सका।

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Yogendra Yogi
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Web Title: Railways devised tricks to save elephants, 26 cuts in 9 years
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