सुनिए, शिवराज सिंह चौहान की जुबानी अरुण जेटली की अनसुनी कहानी

By: Muneshwar Kumar

Updated On: 24 Aug 2019, 04:37:55 PM IST

  • जानिए, आखिरी बातचीत में शिवराज सिंह चौहान से अरुण जेटली ने क्या कहा था।

भोपाल. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन ( Arun Jaitley ) हो गया है। मध्यप्रदेश के कई नेताओं से उनके अच्छे संबंध रहे हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ( Shivraj Singh Chauhan ) का भी उनसे काफी करीबी रिश्ता था। अरुण जेटली के निधन के बाद शिवराज सिंह चौहान ने पत्रिका से खास बातचीत करते हुए अरुण जेटली के व्यक्तित्व और अपने अपने संबंधों के बारे में बताया है।

 

अरुण जेटली बीजेपी के लिए सकंटमोचक थे। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह संकट की घड़ी से पार्टी और सरकार को निकालने का काम किया है। कानूनी पेचदगियों से वह पार्टी को बाहर निकालते रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनसे मेरे आत्मीय संबंध हैं, वह मेरे मेंटर के रूप में कई विषयों में काम करते थे। मैं उन्हें तब से जानता था, जब वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता थे। वह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष थे। उस समय अरुण जेटली हमारे रोल मॉडल थे। मैं 1977 में उन्हें विद्यार्थी परिषद के कार्यक्रमों में बुलाया था।

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ठुकरा दिया था मंत्री पद का ऑफर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस कार्यक्रम में जब वह आए थे, तब लौटने के लिए उनका रिर्जवेशन नहीं हुआ था। उसके बावजूह वह उतने ही सहज भाव से समान्य सीट पर बैठ दिल्ली लौट गए थे। उस समय ही अरुण जेटली इतने बड़े स्टूडेंट लीडर थे कि स्वर्गीय मोरारजी देसाई की सरकार में उन्हें मंत्री बनने का निमंत्रण दिया गया था। लेकिन जेटली जी ने वह निमंत्रण ठुकरा दिया था। यह अपने आप में उदेश्य पूर्ण राजनीति का उदाहरण था। बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय हुए।

Chief Minister Shivraj Singh Chauhan's statement


अरुण जेटली जी से बात कर लें
मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में एक बार मेरे ऊपर भयानक लाठीचार्ज हुआ था। मैं घायल था, उस लाठीचार्ज के दौर से तो मैं पहले भी कई बार गुजरा था। उसके बाद मैं आडवाणी जी के पास गया और कहा कि ऐसा अन्याय हो रहा है, उन्होंने तुरंत अरुण जेटली को फोन किया और कहा कि वो इसमें मदद करेंगे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोई भी कानूनी पेचदगियों वाला मामला हो तो भारतीय जनता पार्टी के पास एक ही जवाब होता था कि अरुण जेटलीजी से बात कर लें।

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वो हमेशा मुझे करते थे गाइड
शिवराज सिंह ने कहा कि इसके बाद से ही मेरे उनके साथ आत्मीय संबंध थे। युवा मोर्चा में रहने के दौरान मैं उनसे सलाह लिया करता था। साथ ही वह भी मुझे गाइड करते थे। 2003 में मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को दिग्विजय सिंह सरकार से लड़ना था, जो कि ऐसा लग रहा था कि उखड़ेगी नहीं। उस समय धारणा यह थी कि दिग्विजय सिंह को हटाना काफी कठिन काम है। तब जेटली जी ने ही यह चुनौती स्वीकार की।

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दिग्विजय सिंह को जेटली जी ने ही उखाड़ा
पूर्व सीएम चौहान ने कहा कि तब अरुण जेटली ने मध्यप्रदेश सरकार की एक-एक कमी को उखाड़कर मीडिया के जरिए जनता के सामने सिलसिलेवार तरीके से रखी। उस समय मैं उनकी अद्भुत प्रतिभा को देख स्वंय आश्चर्यचकित था। उन्होंने सारे आंकड़े इकट्ठा कर यह सिद्ध कर दिया कि दिग्विजय सरकार ने प्रदेश को तबाह और बर्बाद कर दिया है। वह 2003 में जीत के शिल्पकार के रणनीतिकार थे। मुझे उस समय राघोगढ़ में जाने को कहा गया। मुझे भी उस समय लगा कि मैं राघोगढ़ में कभी अंदर तक गया नहीं हूं। लेकिन जेटली जी ने कहा कि मैं ऐसा इसलिए फैसला किया हूं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को वहां बांधकर रखा जाए। वो वहां मेरे लिए प्रचार करने भी आए।

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मुख्यमंत्री कौन होगा पर आए थे करने चर्चा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अरुण जेटली यहां विधायकों से रायशुमारी करने आए थे कि मुख्यमंत्री कौन होगा। उमा भारती ने इससे इनकार कर दिया था। अरुण जेटली हमेशा मेरिट के आधार पर ही फैसला किया। साथ ही वह सिद्धांतों से समझौता नहीं करते थे। इसके अलावे अरुण जेटली को अनैतिक राजनीति एकदम पसंद नहीं थे। वह गलत को गलत ही कहते थे। वह इतने मेधा संपन्न थे कि वकालत से उनकी एक दिन की कमाई लाखों रुपये थी। पूर्व सीएम ने कहा कि उनकी कमाई वकालत से लाखों में थी। उसके बावजूद मैंने देखा कि वह उधर का काम छोड़ मैक्सिम वक्त पार्टी को ही देते थे।

Arun Jaitley

 

चौहान ने कहा कि मैं मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनूं ऐसा जेटली जी को इसलिए लगता था कि क्योंकि विधायक ऐसा मानते थे। उन्होंने विधायकों से रायशुमारी के बाद पूरी ताकत के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के पास यह बात रखी। वह सिर्फ मध्यप्रदेश के मामले में ऐसा नहीं करते वह हर राज्य में ऐसा ही करते थे। क्योंकि उन्हें लगता था कि मेरिट के आधार पर ही चीजें हो। पार्टी और सरकार में जब भी कोई मुद्दा उलझता तो दोनों ही जगहों पर सुलझाने के लिए सिर्फ अरुण जेटली का ही नाम होता था। संसद में वह तथ्यों और तर्कों के साथ गहराई और गंभीरता से बातों को रखते थे। दुनिया के सामने भी वह भारत के पक्ष को बखूबी रखते थे।

 

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 2014-2019 तक सरकार को चलाने में उनका अतुलनीय योगदान रहा है। इसके साथ ही वह पार्टी के पक्ष को रखने का भी काम करते थे। वह अपनी बातों को ऐसे रखते थे कि विरोधी भी उनके सामने नतमस्तक हो जाते थे। अस्वस्थ होने के बावजूद भी वह जिस तरीके से देश की सेवा करते रहे, उसकी दूसरी मिशाल मैंने तो नहीं देखी। उनको पता था कि उन्हें कैंसर है। मैंने उनसे बात कर थोड़ी तकलीफ व्यक्त की तो उन्होंने कहा कि देखो मैं मस्त हूं। अरुण जेटली ने शिवराज सिंह चौहान से कहा कि मुझे संतोष इस बात के लिए हैं कि मैंने देश के लिए बहुत काम कर लिया हूं। अगर मैं चला भी गया तो मैं संतोष के साथ जाऊंगा।

Arun jaitley

 

आपकी जरूरत है
यह बात सुन शिवराज सिंह चौहान ने अरुण जेटली को कहा कि भाई साहब आपकी जरूरत है। इस पर उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश तो यही है कि मैं रहूं। लेकिन मैं चला जाऊं तो इस बात का मलाल नहीं रहेगा कि मैंने नहीं किया। मैंने इस उम्र तक जितना हो सकता है, उसे बेहतक ढंग से किया हूं। बीमारी का पचा चलने के बाद भी वह रात को दो-दो बजे तक चुनाव समीति की बैठकों में रहते थे। साथ ही बड़े ही सहज भाव से हंसी-मजाक करते हुए माहौल को खुशनुमा बनाए रहते थे।

Shivraj Singh Chauhan will be included in Good Governance Day

 

बिस्तर पहुंचने के बाद भी रखते थे राय
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वह जब बिस्तर पर पहुंच गए, उसके बाद भी सोशल मीडिया के जरिए देश की बात को दुनिया के सामने रखते थे। धारा-370 हटने के बाद उस स्थिति में उन्होंने सोशल मीडिया पर भारत के पक्ष को दुनिया के सामने दमदारी से रखा। यह काम कोई महामानव ही कर सकता है। वे जितना भी जिए, देश के लिए जिए। वह प्रेरण हैं हमारी। उनसे यह प्रेरणा मिलती है कि हर पल देश के लिए जिए। कीमोथेरेपी के दौरान उनसे हमारी आखिरी बात हुई थी। उनका जाना मेरे लिए व्यक्ति छति है। उनके जाने से मेरा मन उदास है।

Updated On:
24 Aug 2019, 04:34:16 PM IST

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