किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दवाओं की चिंता ना ही किसी जांच की, तय हुआ चार लाख का पैकेज

भोपाल. हमीदिया अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। ट्रांसप्लांट के बाद अब सरकार छह माह तक मरीजों का ध्यान रखेगी। मरीजों को ना जो दवाओं की चिंता करनी होगी ना ही किसी जांच की। मरीज की हर जरूरत को सरकार पूरा करेगी। दरअसल, आयुष्मान भारत निरामयम सोसायटी और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच हुई बैठक में किडनी ट्रांसप्लांट के पैकज को तय किया गया। जानकारी के मुताबिक आयुष्मान पैकेज में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए चार लाख रुपए तय किए गए हैं।

मालूम हो कि डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन की मंजूरी के बाद हमीदिया अस्पताल प्रबंधन ने ट्रांसप्लांट की तैयारियां शुरू कर दी। हालांकि इस बीच उपकरणों की कमी और अन्य समस्याओं के चलते ट्रांसप्लांट का लेट हो गया। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि पैकेज तय होने के बाद अब एक महीने में ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

हर महीने दस हजार रुपए की दवाएं
अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों को लंबे समय तक दवाएं खानी होती हैं। सरकारी अस्पतालों में ही हर महीने करीब दस हजार रुपए की दवाएं आती हैं। गरीब मरीजों के लिए खासी महंगी होती है। ऐसे में आयुष्मान योजना के तहत छह महीने तक दवाएं मरीजों को दी जाएगी। यही नहीं इस दौरान होने वाली अन्य जांच भी अस्पताल हो सकेंगी।

टेंडर हुए, मशीनों का इंतजार
ट्रांसप्लांट के लिज जरूरी उपकरणों के लिए टेंडर किए जा चुके हैं। उपकरणों के आने में देर हो गई है। जानकारी के मुताबिक अब भी एक महीने का समय और लगेगा। हालांकि तब तक ट्रांसप्लांट के लिए अन्य विभागों के उपकरणों का उपयोग किया जासकता है।

निजी लैब से कराएंगे दो महत्वपूर्ण टेस्ट
ट्रांसप्लांट से पहले दो टेस्ट होते हैं। डोनर और रेसिपिएंट के बीच रिलेशन को स्टेबलिश करने के लिए डीएनए मैचिंग किया जाता है। इस टेस्ट में सात से आठ घंटे लगते हैं, इसके लिए सैंपल को फ्लाइट से निजी सेंटर भेजा जाता है। वहीं दूसरा टेस्ट किडनी क्रॉस मैचिंग है। यह टेस्ट ब्लड ग्रुप मिलान जैसा ही होता है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही ट्रांसप्लांट किया जाता है। बाजार में दोनों टेस्ट 40 से 50 हजार रुपए के होते हैं। दोनों देश के चुनिंदा सेंटर पर होते हैं। इन टेस्ट के लिए दो निजी संस्थाओं से अनुबंध किया गया है।

तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मरीजों के आइडेंटीफिकेशन का काम पूरा हो चुका है। मशीनों के लिए टेंडर भी हो चुके हैं। ट्रांसप्लांट के लिए फि लहाल सीटीवीएस यूनिट का उपयोग किया जाएगा। बाद में ट्रासंप्लांट को अलग यूनिट बना दिया जाएगा।
डॉ. एके श्रीवास्तव, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

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