राजधानी में डेंगू फैला रहा अपने पंख, ऐसे करें अपना बचाव...

By: Deepesh Tiwari

Published On:
Sep, 26 2018 11:55 AM IST

  • डेंगू स्टिंग को सबसे अधिक महसूस किया गया...

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में डेंगू ने अपने पंख फैलाने शुरू कर दिए है। स्वस्थ्य विभाग से मिल रही सूचना के अनुसार पिछले हफ्ते में वेक्टरब्रोन बीमारी (वायरस ले जाने वाले) के 18 मामलों का निदान यहां किया गया है।

वेक्टरब्रोन बीमारी...
दरअसल वायरस को केरी करने वाले मामलों से वेक्टरब्रोन बीमारी का जन्म होता है। इसके तहत जैसे मच्छर एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को काट कर उस तक बीमारी का वायरस पहुंचाता है।

वहीं बताया जाता है कि इन वेक्टरजनित बीमारियों के बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग टेंशन में आ गया है, क्योंकि यह किसी भी क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है।

पहले के प्रकोप के दौरान, एक क्षेत्र को प्रकोप के लिए 'ग्राउंड शून्य' माना जाता था। लेकिन इस बार कोह-ए-फिजा, विजयनगर, शाहपुरा, सर्वधर्म कॉलोनी, चुनना भट्टी और कोलार ऐसे क्षेत्र हैं, जहां डेंगू स्टिंग को सबसे अधिक महसूस किया गया है।

इस साल, साकेत नगर, कोलार और टीटी नगर क्षेत्रों से डेंगू और चिकनगुनिया मामलों की सूचना मिली है, जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग के जिला मलेरिया कार्यालय (डीएमओ) की सीमा तक बढ़ा दिया है।

इस साल अब तक, 88 लोगों का डेंगू के लिए सकारात्मक परीक्षण किया गया है और 30 अन्य ने चिकनगुनिया के लिए सकारात्मक परीक्षण कराया है। आंकड़ों के अनुमान के अनुसार भोपाल से कुल मामलों में से आधे से ज्यादा की सूचना मिली है।

इस स्थिति ने जमीन पर संसाधनों का परीक्षण किया गया है। वेक्टर नियंत्रण सर्वेक्षण प्रक्रिया में बीएमसी की थोड़ी सी भागीदारी के साथ, खतरे का मुकाबला करने के लिए लगभग 22 लाख लोग 100 से कम लोगों के कर्मचारियों पर निर्भर हैं।

वहीं यदि इसे हम सीधे शब्दों में कहें,तो मलेरिया और डेंगू को फैलाने से लड़ने के लिए प्रति दिन 500 से अधिक घरों को कम कर्मचारियों द्वारा कवर किया जा सकता है।

वहीं सूत्रों का कहना है कि डीएमओ के साथ तैनात सभी 90 लोग कार्य पर नहीं हैं। वहीं जिला मलेरिया कार्यालय (डीएमओ) सर्वेक्षण अभी तक एएनएम, स्वास्थ्य श्रमिकों और आयुष कर्मचारियों से प्राप्त नहीं हो सका है।

वहीं पिछले वर्षों में, वेक्टर से जुड़े मामलों में वृद्धि के साथ, मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने अक्सर आयुष विभाग के डॉक्टरों से अनुरोध किया है कि वे डेंगू और मलेरिया के फैलाव का मुकाबला करें।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार भोपाल में, पांच लाख परिवारों का सर्वेक्षण किया गया है और मच्छर लार्वा के साथ सर्वेक्षण किए गए सभी घरों या वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में से लगभग 10% का पता चला है।

ऐसे फैलता है डेंगू...
डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज के खून में डेंगू वायरस बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी मरीज को काटता है तो वह उस मरीज का खून चूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है। जब डेंगू वायरस वाला वह मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वह वायरस उस इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू वायरस से पीड़ित हो जाता है।

20 का formula ...
डेंगू में कुछ एक्सपर्ट 20 के फॉर्म्युला की बात करते हैं। अगर धड़कन यानी पल्स रेट 20 बढ़ जाए, ऊपर का ब्लड प्रेशर 20 कम हो जाए, ऊपर और नीचे के ब्लड प्रेशर का फर्क 20 से कम हो जाए, प्लैटलेट्स 20 हजार से कम रह जाएं, शरीर के एक इंच एरिया में 20 से ज्यादा दाने पड़ जाएं - इस तरह का कोई भी लक्षण नजर आए तो मरीज को अस्पताल में जरूर भर्ती करना चाहिए।

किस डॉक्टर को दिखाएं...
डेंगू होने पर किसी अच्छे फिजिशियन के पास जाना चाहिए। बच्चों में डेंगू के लक्षण नजर आएं तो उसे पीडिअट्रिशन के पास ले जाएं।

ये है इलाज...
-अगर मरीज को साधारण डेंगू बुखार है तो उसका इलाज व देखभाल घर पर की जा सकती है।
-डॉक्टर की सलाह लेकर पैरासिटामोल (क्रोसिन आदि) ले सकते हैं।
-एस्प्रिन (डिस्प्रिन आदि) बिल्कुल न लें। इनसे प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं।
-अगर बुखार 102 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा है तो मरीज के शरीर पर पानी की पट्टियां रखें।
-सामान्य रूप से खाना देना जारी रखें। बुखार की हालत में शरीर को और ज्यादा खाने की जरूरत होती है।
-मरीज को आराम करने दें।

मरीज में DSS या DHF का एक भी लक्षण दिखाई दे तो उसे जल्दी-से-जल्दी डॉक्टर के पास ले जाएं। DSS और DHF बुखार में प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, जिससे शरीर के जरूरी हिस्से प्रभावित हो सकते हैं। डेंगू बुखार के हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ डेंगू हैमरेजिक और डेंगू शॉक सिंड्रोम बुखार में ही जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती हैं। अगर सही समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए तो DSS और DHF का पूरा इलाज मुमकिन है।

एलोपैथी में इलाज...
इसकी दवाई लक्षण देखकर और प्लेटलेट्स का ब्लड टेस्ट कराने के बाद ही दी जाती है। लेकिन किसी भी तरह के डेंगू में मरीज के शरीर में पानी की कमी नहीं आने देनी चाहिए। उसे खूब पानी और बाकी तरल पदार्थ (नीबू पानी, छाछ, नारियल पानी आदि) पिलाएं ताकि ब्लड गाढ़ा न हो और जमे नहीं। साथ ही, मरीज को पूरा आराम करना चाहिए। आराम भी डेंगू की दवा ही है।

आयुर्वेद में इलाज...
आयुवेर्द में इसकी कोई पेटेंट दवा नहीं है। लेकिन डेंगू न हो, इसके लिए यह नुस्खा अपना सकते हैं। एक कप पानी में एक चम्मच गिलोय का रस (अगर इसकी डंडी मिलती है तो चार इंच की डंडी लें।

उस बेल से लें, जो नीम के पेड़ पर चढ़ी हो), दो काली मिर्च, तुलसी के पांच पत्ते और अदरक को मिलाकर पानी में उबालकर काढ़ा बनाए और 5 दिन तक लें। अगर चाहे तो इसमें थोड़ा-सा नमक और चीनी भी मिला सकते हैं। दिन में दो बार, सुबह नाश्ते के बाद और रात में डिनर से पहले लें।

बरतें एहतियात...
-ठंडा पानी न पीएं, मैदा और बासी खाना न खाएं।
-खाने में हल्दी, अजवाइन, अदरक, हींग का ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल करें।
-इस मौसम में पत्ते वाली सब्जियां, अरबी, फूलगोभी न खाएं।
-हल्का खाना खाएं, जो आसानी से पच सके।
-पूरी नींद लें, खूब पानी पीएं और पानी को उबालकर पीएं।
-मिर्च मसाले और तला हुआ खाना न खाएं, भूख से कम खाएं, पेट भर न खाएं।
-खूब पानी पीएं। छाछ, नारियल पानी, नीबू पानी आदि खूब पिएं।

बचाव भी इलाज...
- बीमारी से बचने के लिए फिजिकली फिट, मेंटली स्ट्रॉन्ग और इमोशनली बैलेंस रहें।
- अच्छा खाएं, अच्छा पीएं और अच्छी नींद ले।
- नाक के अंदर की तरफ सरसों का तेल लगाकर रखें। इससे तेल की चिकनाहट बाहर से बैक्टीरिया को नाक के अंदर जाने से रोकती है।
- खाने में हल्दी का इस्तेमाल ज्यादा करें।

सुबह आधा चम्मच हल्दी पानी के साथ या रात को आधा चम्मच हल्दी एक गिलास दूध या के साथ लें। लेकिन अगर आपको -नजला, जुकाम या कफ आदि है तो दूध न लें। तब आप हल्दी को पानी के साथ ले सकते हैं।
- आठ-दस तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ मिलाकर लें या तुलसी के 10 पत्तों को पौने गिलास पानी में उबालें, जब वह आधा रह जाए तब उस पानी को पीएं।
- विटामिन-सी से भरपूर चीजों का ज्यादा सेवन करें जैसे : एक दिन में दो आंवले, संतरे या मौसमी ले सकते हैं। यह हमारे इम्यून सिस्टम को सही रखता है।

डेंगू से कैसे बचें...

डेंगू से बचने के दो ही उपाय हैं। एडीज मच्छरों को पैदा होने से रोकना। एडीज मच्छरों के काटने से बचाव करना।

मच्छरों को पैदा होने से रोकने के उपाय...
- घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करें।
- अगर पानी जमा होेने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डालें।
- रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें। घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि न रखें। अगर रखें तो उलटा करके रखें।
- डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।
- अगर मुमकिन हो तो खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें।

- मच्छरों को भगाने और मारने के लिए मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि इस्तेमाल करें। गुग्गुल के धुएं से मच्छर भगाना अच्छा देसी उपाय है।
- घर के अंदर सभी जगहों में हफ्ते में एक बार मच्छरनाशक दवा का छिड़काव जरूर करें। यह दवाई फोटो-फ्रेम्स, पर्दों, कैलेंडरों आदि के पीछे और घर के स्टोर-रूम और सभी कोनों में जरूर छिड़कें। दवाई छिड़कते वक्त अपने मुंह और नाक पर कोई कपड़ा जरूर बांधें। साथ ही, खाने-पीने की सभी चीजों को ढककर रखें।

मच्छरों के काटने से बचाव...
- ऐसे कपड़े पहने, जिससे शरीर का ज्यादा-से-ज्यादा हिस्सा ढका रहे। खासकर बच्चों के लिए यह सावधानी बहुत जरूरी है। बच्चों को मलेरिया सीजन में निक्कर व टी-शर्ट न पहनाएं।
- बच्चों को मच्छर भगाने की क्रीम लगाएं।
- रात को सोते समय मच्छरदानी लगाएं।

ये ध्यान रखें...
डॉ. आई ग्रेवाल के अनुसार इन दिनों बुखार होने पर सिर्फ पैरासिटामोल (क्रोसिन, कैलपोल आदि) लें। एस्प्रिन (डिस्प्रिन, इकोस्प्रिन) या एनॉलजेसिक (ब्रूफिन, कॉम्बिफ्लेम आदि) बिल्कुल न लें। क्योंकि अगर डेंगू है तो एस्प्रिन या ब्रूफिन आदि लेने से प्लेटलेट्स कम हो सकती हैं और शरीर से ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।

Published On:
Sep, 26 2018 11:55 AM IST

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