शहर का 40 फीसदी हिस्सा जलसंकट की चपेट में, घरों में एक दिन छोड़कर जलापूर्ति के हालात

By: Sumeet Pandey

Published On:
Apr, 18 2019 06:04 AM IST

  • निगम के जिम्मेदार अफसर व इंजीनियरों की लापरवाही का नतीजा भुगतेगी जनता

भोपाल. नगर निगम के जिम्मेदार अफसर व इंजीनियरों की लापरवाही की वजह से शहर का 40 फीसदी क्षेत्र जलसंकट की जद में है। संकट करीब आया तो निगम के अफसर-इंजीनियर जागे। जो काम चार माह पहले करना था, अब किया जा रहा है। बैठकों का दौर शुरू कर लोगों को पर्याप्त पानी देने की बातें हुईं। हालांकि मौजूदा स्थिति में निगम अब एक दिन छोड़कर जलापूर्ति करने की योजना बना रहा है, ताकि बारिश तक घरों में नल से पानी आता रहे। अब दिक्कत ये है कि जलस्रोतों में पानी नहीं बचा। कुप्रबंधन में करोड़ों लीटर पानी बेकार बह गया। अब जो जैसा है, बारिश तक वैसा ही रहेगा। ऐसे में लोगों को भी अब पानी को लेकर अधिक सजग और सतर्क रहने की जरूरत है। बारिश में अभी दो माह का समय है और यदि अचानक कोई जलसंकट की स्थिति बनती है, तो पूरी तरह निगम की आपूर्ति के भरोसे रहने की बजाय अपने स्तर पर भी इंतजाम करने की जरूरत है।

संकट में दूसरा प्लान नहीं

बड़े तालाब में पानी क्रिटिकल स्तर पर है। कम बारिश से तालाब में पानी कम एकत्र हो सका है। ऐसे में यहां से पानी कम लेना था, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। अब बैरागढ़, ईदगाह हिल्स से लेकर भेल और रेलवे को मिलाकर तालाब से रोजाना 19 एमजीडी पानी तो लेना ही है। ये पूरी तरह से तालाब पर ही निर्भर है। यानी यदि तालाब में पानी खत्म हुआ या बंद किया तो यहां सूखा पड़ जाएगा।

पानी कम तो अब ये उपाय किए जाएंगे

बैरागढ़, पुराने शहर में एक दिन छोड़कर पानी दिया जाएगा। ये करीब एक घंटे तक दिया जाता है, इसमें कटौती कर आधा घंटा किया जाएगा।
रेलवे दो एमजीडी कच्चा पानी तालाब से लेता है और खुद फिल्टर करता है। यहां निगम कुछ नहीं कर सकता, पानी खत्म हुआ तो रेलवे को खुद का इंतजाम करना होगा।
भेल को दिए जाने वाले साढ़े छह एमजीडी पानी में से दो एमजीडी की कटौती की जा रही है।ये तीन एमजीडी तक सीमित की जा सकती है।
केरवा डैम में भी पानी तेजी से कम हो रहा है। यहां फिलहाल रोजाना 30 मिनट पानी दिया जा रहा है, आगामी समय में ये एक दिन छोड़कर दिया जा सकता है।
नए शहर में कोलार और नर्मदा से जलापूर्ति है, लेकिन दोनों ही जगह से पानी पर्याप्त नहीं आ रहा। फिलहाल 30 मिनट रोजाना रोजाना पानी दिया जा रहा है। संभव है बारिश के एक माह पहले यहां एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जाए।

नोट: शहरवासियों को रोजाना जलापूर्ति के लिए 100 एमजीडी पानी निगम को जलस्रोतों से चाहिए।

 

ये करते तो बेहतरहोते हालात
भेल, रेलवे जैसे संस्थानों के लिए अन्य स्रोतों से जलापूर्ति सुनिश्चित कराते।
पुराने शहर के बड़ा तालाब से जलापूर्ति वाले क्षेत्रों को नर्मदा, कोलार लाइन से जोड़ देते।
लीकेज पर मॉनिटरिंग कर उसे तुरंत दुरूस्त करने की विशेष टीम गठित करनी थी।
ओवरहेड टैंक के ओवरफ्लो होने पर पानी की बर्बादी को रोकने के उपाय करने थे।
निर्माण कार्य या मिट्टी परीक्षण के लिए खुदाई में टूटने वाली लाइन पर कड़ा रूख अपना कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराना थी।
नोट: इसमें से इंजीनियरों ने बीते महिनों में कोई काम नहीं किया।

Published On:
Apr, 18 2019 06:04 AM IST

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