बीएसपी के रिसाइकिलिंग प्लांट से ओवर फ्लो होकर बरसाती नाले में बह रहा पानी

By: Bhuwan Sahu

Updated On:
13 Jul 2019, 12:28:09 AM IST

  • रोकने का इंतजाम नहीं, प्रबंधन की सेंसर लगाने की योजना का अब तक पता नहीं

भिलाई . भिलाई इस्पात संयंत्र (bhilai steel plant) प्रबंधन ने बारिश शुरू होने के बाद फिर एक बार सेक्टर-5 रिसाइकलिंग प्लांट (Recycling Plant) से ओवर फ्लो होकर पानी बहने लगा है। बीएसपी प्रबंधन ने यहां से पानी निकासी को लेकर एक सेंसर लगाने की योजना तैयार की है। जिससे कितना पानी हर दिन या माह में बरसाती नाले में जा रहा है, वह साफ हो सके। अब तक सेंसर लगाने की योजना पर अमलीजामा नहीं पहनाया गया है।
जिले में पिछले साल बारिश कम हुई थी। आम तौर पर १५ अगस्त तक औसत ५२७.२ मिली मीटर बारिश हर साल होती है। इस साल भी बारिश उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई है। तब पानी को सुरक्षित रखने संंयंत्र प्रबंधन को संजीदा होना होगा।
संयंत्र में स्थित मरोदा-1 जलाशय के पानी का उपयोग औद्योगिक कार्य के लिए किया जाता है। इसे संयंत्र के फर्नेस, कूलिंग बेड वगैरह में भेजा जाता है। यहां पानी की 24 घंटे जरूरत पड़ती है। फर्नेंस को चारों ओर से ठंडा पानी ही रखता है। संयंत्र के भीतर यह पानी कई पाइप में हर समय दौड़ता रहता है। इसका उपयोग पीने के लिए नहीं किया जाता है। संयंत्र में हर वर्ष करीब 2.2 टीएमसी पानी उत्पादन में खपत होता है।

ओवर फ्लो हो रहा पानी

रिसाइकलिंग स्थल (Recycling Plant) से बड़ी मात्रा में पानी ओवर फ्लो होकर बरसाती नाला में चला जाता है। बीएसपी से उपयोग होकर निकलने वाले पानी को पूरी तरह से रिसायइकलिंग करने में प्रबंधन कामयाब नहीं रहा है। वर्तमान में जिस तरह से बारिश ने मुंह मोड़ लिया है, ऐसी स्थिति में पानी की बचत के लिए ठोस पहल करना होगा। शील्ड के गहरीकरण करने के बाद से पानी भरकर ओवर फ्लो हो रहा है।

दो मोटर लगाया अतिरिक्त

अब इसमें बड़ा सुधार किया जा रहा है। बीएसपी यहां से पानी को सौ फीसदी वापस संयंत्र में उपयोग के लिए लेने में जुट गया है। इसके लिए खास तैयारी की जा रही है। रिसाइकलिंग प्लांट में पहले से ८ पंप लगे हुए हैं। प्रबंधन ने अब यहां दो नए पंप लगा दिया है। इससे रिसायकलिंग कर पानी को अब आठ के स्थान पर 10 पंप भेजने का काम करेंगे।

इस तरह हो रही रिसाइकिलिंग

संयंत्र से आने वाले गंदे पानी को तीन कच्चे डेम से गुजारा जाता है, इससे मोटे पत्थर, कण एक-एक कर तीसरे डेम में पहुंचने तक तले पर बैठ जाते हैं। जिससे पानी उद्योग में उपयोग होने के लायक फिर हो जाता है। बीएसपी ने फोरेस्ट एवेन्यू रोड पर 30 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया है। इस प्लांट में टाउनशिप के सीवरेज वॉटर को पंप हाउस से भेजा जाता है। पंप हाउस में 5 मोटर में से तीन मोटर 24 घंटे सीवरेज पानी को ट्रीटमेंट प्लांट भेजने के काम में जुटी रहती है। टाउनशिप, मरोदा, रुआबांधा के आवासों के सीवरेज पानी भी यहां आते हैं। बीएसपी को पानी की आपूर्ति गंगरेल बांध से की जाती है। सालभर में गंगरेल से टाउनशिप में पेयजल के लिए १.८ टीएमसी पानी सप्लाई किया जाता है और बीएसपी में खपत के लिए २.२ टीएमसी पानी दिया जाता है। इसमें से ३.५ टीएमसी पानी का उपयोग किया जाता है।

40 करोड़ का भुगतान

मरोदा डेम में पेयजल के लिए कितना पानी सप्लाई किया जा रहा है, इसका मीटर लगा हुआ है। पेयजल के पानी का दर 70 पैसे से लिया जाता है। वहीं संयंत्र के लिए १२ रुपए की दर से पानी का भुगतान प्रबंधन राज्य सरकार को करती है। साल में करीब ४० करोड़ रुपए का भुगतान बीएसपी राज्य सरकार को पानी के एवज में करती है।

Updated On:
13 Jul 2019, 12:28:09 AM IST

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