राजकीय बालिका गृह: पैसे दो और खूब बात करो, कोई नहीं रोकने वाला

By: Rohit Sharma

Published On:
Jun, 12 2019 06:03 AM IST

  • राजकीय बालिका गृह किसी भी नाबालिग बालिका के लिए सजा से कम नहीं है लेकिन सेवर बाइपास स्थित इस बालिका गृह में कहानी बिल्कुल विपरीत है। यहां दाखिल होने वाली बालिकाएं पहले कुछ दिन चारदीवारी को बंदिश मानती हैं लेकिन फिर कुछ ऐसा होता है कि वह यहां से जाना ही नहीं चाहती है।

भरतपुर. राजकीय बालिका गृह किसी भी नाबालिग बालिका के लिए सजा से कम नहीं है लेकिन सेवर बाइपास स्थित इस बालिका गृह में कहानी बिल्कुल विपरीत है। यहां दाखिल होने वाली बालिकाएं पहले कुछ दिन चारदीवारी को बंदिश मानती हैं लेकिन फिर कुछ ऐसा होता है कि वह यहां से जाना ही नहीं चाहती है। ऐसा ही एक वाक्या सोमवार को करौली जिले से आए एक पिता के साथ सामने आया। पिता बालिका गृह में आवासरत अपनी पुत्री को समझाने आया था। आपको बता दें कि यह बालिका दाखिल होने के समय मां-बाप के साथ जाने की इच्छुक थी लेकिन अब वह साफ इनकार कर रही है। यह बालिका शादी से आठ दिन पहले लापता हो गई थी। अपहरण की रिपोर्ट दर्ज होने पर पुलिस ने उसे दस्तयाब कर भरतपुर बालिका गृह भेज दिया। पीडि़त का पिता का कहना है कि उसने सोचा था कि उसकी पुत्री बालिका गृह में रहकर सुधर जाएगी, लेकिन यहां पर वह उल्टी बिगड़ गई। पिता ने बालिका गृह के कार्मिकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसमें बड़ा आरोप ये है कि बालिका गृह का स्टाफ आवासरत बालिकाओं को उनके मनमुताबिक शख्स से बात कराते हैं और इसके बदले में वह पैसे लेते हैं।

 


इस मामले की पत्रिका ने तहकीकात की तो हम भी दंग रह गए। पिता ने हमें जो तीन मोबाइल नम्बर उपलब्ध कराए, उस पर पहले रिंग गई लेकिन रिसीव नहीं हुआ। कुछ मिनट बाद वापस उसी नम्बर से कॉल आता है, उस पर एक लड़की बोलती है, जब हम उससे एक आवासरत लड़की से बात कराने की कहते हैं तो वह कहती है, उससे उसकी पहचान नहीं है। इसके बाद उक्त लड़की पूछती है कि ये नम्बर किसने दिया, तो हमने उसे करौली जिले के एक युवक द्वारा देना बताया। जिस पर उसने पास में खड़ी एक लड़की से पूछा और एक युवक का नाम लेकर कहा, अच्छा उसने दिया है। जब हमने एक लड़की का नाम लेकर बात कराने के लिए उससे बोला तो उसने कहा कि वह कहां से आई है। जिस पर हमने कहा कि वह धौलपुर जिले से है और हाल में भाग गई थी। जिस पर उसने उक्त लड़की का नाम लिया, लेकिन यह कहते मना कर दिया कि वह परिचित नहीं है, उससे बात नहीं करा पाएगी। जिस पर हमने उससे बाद में बात कराने की बात कही। वहीं, पीडि़त पिता का कहना है कि पुत्री अब उसी युवक के साथ जाना चाहती है, जिस पर अपहरण का आरोप है। यह युवक लगातार उससे बात करता है।
उक्त लड़की से हमने एक बाल कल्याण समिति की एक महिला सदस्य का नाम लिया तो उसने कहा कि वह हमारा क्या बिगाड़ सकती है। वह तो खुद ही निपट जाएगी। चार-पांच दिन में उसका काम खत्म हो जाएगा। राजकीय बालिका गृह में अगर किसी आवासरत बालिका को बात करनी है तो अधीक्षका स्वयं की निगरानी में उक्त व्यक्ति से बात कराएगी। लेकिन वह कौन है और उसका नाम व मोबाइल नम्बर रजिस्टर में बकायदा अंकित किया जाता है। ज्यादातर बात केवल परिजन से ही कराई जाती है। इस संबंध में बकायदा एक्ट भी बना है।

 


बालिका गृह में आकस्मिक जांच के दौरान करीब एक दर्जन से अधिक मोबाइल फोन बरामद हो चुके हैं। इसमें गत 13 अप्रेल को सीडब्ल्यूसी सदस्य नैमीचंद व प्रज्ञा मिश्रा ने जांच के दौरान 7 मोबाइल व 2 चार्जर बरामद किए थे। इसी तरह 29 अप्रेल एक मोबाइल, 31 अप्रेल को 1 मोबाइल व 2 जून को एक मोबाइल, 3 चार्जर बरामद किए। बताया जा रहा कि बरामद मोबाइल सेटों को अधीक्षका की ओर से पुलिस को नहीं सौंपा गया था। इसको लेकर बाल अधिकारिता एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक ने गत दिनों बालिका गृह अधीक्षका इन्दिरा गुप्ता को नोटिस देकर चेतावनी दी थी। लेकिन उसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। इस संबंध में अधीक्षका से बात करनी चाही तो उनका नम्बर नॉट रिचेवल बोला। गत 3 नम्बर को मोबाइल की शिकायत को लेकर बालिकाओं में आपस में झगड़ा भी हो गया था। इतना ही नहीं यह पूरा मामला जिला कलक्टर तक भी पहुंच चुका है, उस समय कहा गया था कि एडीएम सिटी प्रकरण की जांच कर रहे हैं लेकिन मामला रफा-दफा कर दिया गया।
बालिका गृह में आवासरत बालिकाओं के बीमार होने पर इन्हें जिला अस्पताल ले जाया जाता है। बताया कि जा रहा है कि कई बार बालिका से बात करने वाला व्यक्ति पहले ही अस्पताल पहुंच जाता है और आसानी से बात कर निकल जाता है। भरतपुर संभाग में केवल भरतपुर मुख्यालय पर ही राजकीय बालिका गृह है। यहां पर भरतपुर समेत धौलपुर, करौली व सवाईमाधोपुर जिले की सीडब्ल्यूसी समिति के आदेश पर नाबालिक बालिकाओं को दाखिल कराया जाता है। उधर, बाल कल्याण समिति सदस्य प्रज्ञा मिश्रा ने बताया कि बालिका गृह से कई बार मोबाइल बरामद हो चुके हैं। इस संबंध में अधीक्षका को नोटिस भी दिए हैं। लेकिन उसके बाद भी कोई सुधार नहीं है। मोबाइल पर बात कराने की शिकायतें मिली हैं। मामले से उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया है।

Published On:
Jun, 12 2019 06:03 AM IST

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