दिग्गजों के अरमानों पर फिरा पानी, नगर निगम में पहली बार बनेगा एससी वर्ग का पुरुष मेयर

पिछले करीब तीन माह से हो रहा नगर निगम के मेयर व नौ नगरपालिकाओं में पालिकाध्यक्ष पद की लॉटरी का इंतजार रविवार को खत्म हुआ।

भरतपुर. पिछले करीब तीन माह से हो रहा नगर निगम के मेयर व नौ नगरपालिकाओं में पालिकाध्यक्ष पद की लॉटरी का इंतजार रविवार को खत्म हुआ। लॉटरी के परिणाम इतने चौंकाने वाले आए कि अकेले नगर निगम क्षेत्र में ही पिछले करीब दो माह से तैयारी कर रहे दिग्गज नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया। इस बार नगर निगम भरतपुर, नगरपालिका भुसावर, वैर व रूपवास में एससी पुरुष की सीट रिजर्व की गईहै। सुबह से ही दावेदार इतने बैचने थे कि बार-बार कभी स्वायत्त शासन विभाग में खास अधिकारियों को फोन लगाकर पूछते रहे तो कुछ दिग्गजों ने सुबह ही जयपुर में डेरा डाल दिया था।
जानकारी के अनुसार 18 सितंबर को भरतपुर नगर निगम के 65 व रूपवास नगरपालिका के 25 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकलने के बाद से ही मेयर व चेयरमैन पद की लॉटरी का इंतजार किया जा रहा था। हालांकि नवंबर में सिर्फ इन्हीं दो निकायों के लिए चुनाव होंगे। बाकी आठ निकायों के चुनाव अगस्त 2020 में होंगे। भरतपुर नगर निगम में पहली बार एससी वर्ग से पुरुष मेयर बनेगा। चूंकि इससे पहले दो बार यहां अध्यक्ष का पद एससी महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था। जबकि एससी महिला वर्ग से नगर निगम की पहली मेयर प्रत्यक्ष चुनाव से सुमन कोली को चुना गया था। भरतपुर नगर निगम में वर्ष 1994 तक सामान्य सीट से विजय बंसल, 1999 में एससी से शकुंतला कोली, 2004 में सामान्य से शिवसिंह भोंट, 2009 में एससी से सुमन कोली तथा 2014 में सामान्य सीट से शिवसिंह भोंट मेयर चुने गए। रूपवास नगर पालिका के लिए पहली बार चुनाव होंगे। जहां इन दोनों ही निकायों में मेयर व चेयरमैन पद की लॉटरी निकालने से पूर्वतक दावेदारों की संख्या आए दिन बढ़ती जा रही थी। वह अब एससी वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद प्रत्याशियों की संख्या भी कम हो गई है। बयाना, कुम्हेर व नगर में सामान्य, डीग में ओबीसी, नदबई में ओबीसी महिला, रूपवास में एससी महिला, भुसावर व वैर में एससी पुरुष के लिए सीट आरक्षित है। बताते हैं कि 2011 की जनगणना के आधार पर लॉटरी निकालकर सीट का निर्धारण किया गया है। उसके अनुसार भरतपुर नगर निगम क्षेत्र में 25.02 प्रतिशत एससी वोटर हैं।


अब हारे हुए और असंतुष्ट दावेदारों पर खेला जा सकता है दाव


नगर निगम के मेयर पद की सीट एससी पुरुष के लिए रिजर्वहोने के बाद अब दोनों ही पार्टियों में खलबली मची हुईहै। चूंकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पार्टियां वर्तमान पार्षदों में से चयन करती हैं तो उन्हें इतने बड़े पद के लिए इंतजार कर रहे असंतुष्ट दावेदारों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की ओर से लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज रहे या पराजित रहे दावेदार पर दाव खेला जा सकता है। हालांकि भाजपा के खेमे में चर्चाहैकि प्रदेश कार्यकारिणी की ओर से आनन-फानन में लोकसभा चुनाव के दौरान टिकट की मांग करने वाले दावेदारों की सूची भी मांगी गईहै। ऐसे में संभव है कि भाजपा भी असंतुष्ट रहे पिछले चुनाव के दावेदारों को सामने ला सकती है। हालांकि तय है कि दोनों ही दलों को मेयर पद का दावेदार तय करने में पसीने छूट सकते हैं। क्योंकि विधानसभा व लोकसभा चुनाव में गुटबाजी व विरोध का सामना करने के बाद अब मेयर के नाम पर पार्टी को मजबूत बनाए रखना आवश्यक होगा। चर्चाहै कि कांग्रेस में लोकसभा चुनाव लडऩे वाले अभिजीत कुमार, 2014 में लोकसभा चुनाव चुनाव लड़े डॉ.सुुरेश यादव, गोपाल पहाडिय़ा, भाजपा से पूर्व सांसद बहादुर सिंह कोली के पुत्र विजेंद्र कोली, महिला मोर्चाअध्यक्ष शिवानी दायमा के नाम को लेकर भी चर्चाचल रही है।

rohit sharma
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Web Title: SC may be the first male mayor in Municipal Corporation
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