वर्षों बाद आश्रितों को अनुकंपा पर मिलेगी...

By: Pramod Kumar Verma

Updated On:
13 Sep 2019, 04:40:38 PM IST

  • भरतपुर. वर्षों बाद रसद विभाग ने जिले में बंद उचित मूल्य की दुकानों पर डीलरों की नियुक्ति कर उपभोक्ताओं को राहत देने का मानस बनाया है।

भरतपुर. वर्षों बाद रसद विभाग ने जिले में बंद उचित मूल्य की दुकानों पर डीलरों की नियुक्ति कर उपभोक्ताओं को राहत देने का मानस बनाया है। जिले में वर्ष 2015 तक लगभग 37 डीलरों की मृत्यु होने से दुकानों पर ताले लगे हैं, जिनमें से विभाग के मापदंडों में पात्र 11 दुकानों के संचालन का जिम्मा डीलर मृतकों के आश्रितों को अनुकंपा के तौर पर दिया है, जिससे लगभग सात हजार उपभोक्ताओं को अन्य स्थाना पर संचालित राशन की दुकानों पर भटकना नहीं पड़ेगा।

जिले में लगभग 1007 राशन की दुकान हैं। इनमें से 37 दुकानें वर्षों से बंद हैं। इसका कारण डीलरों की मृत्यु होना है। हालांकि वर्ष 2015 से पहले सरकार अनुकंपा के तौर पर मृतक के परिजनों को नियुक्त करती थी। लेकिन इसके बाद राज्य में अनुकंपा नियुक्ति पर रोक लगा दी। इसलिए अपने क्षेत्र में दुकानें बंद होने से उपभोक्ताओं को परेशानी से जूझना पड़ रहा है।


गौरतलब है कि जिले में करीब 03 लाख 74 हजार बीपीएल, स्टेट बीपीएल, अन्त्योदय व खाद्य सुरक्षा से जुड़े लोगों को राशन की दुकानों से खाद्य सामग्री वितरित की जाती है। राज्य में सरकार की नई गाइड लाइन के अनुसार बीपीएल, अन्त्योदय को एक रुपए प्रतिकिलो गेहूं और खाद्य सुरक्षा वालों को दो रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से गेहूं मिलता है। ऐसे में बंद दुकानों से जुड़े उपभोक्ताओं को अन्य क्षेत्र की दुकान से राशन लाने में परेशानी आती है।


अब सरकार ने 29 जुलाई 2019 से इस नियम को लागू कर दिया है। इसमें भरतपुर में 2, कुम्हेर में 2, वैर 1, बयाना 3, नगर में एक, कामां में एक और रूपवास में एक आश्रित को राशन की दुकान चलाने की जिम्मेदारी दी है। सूत्रों के अनुसार राशन की दुकान के लिए आश्रित के पुत्र व पुत्री को 12वीं पास व विधवा का दसवीं पास होना अनिवार्य है। ऐसे में 37 आश्रितों में से केवल 11 लोगों को नियम के अनुसार पात्र माना है।

जिला रसद अधिकारी भरतपुर बनवारी लाल मीणान का कहना है कि सरकार के निर्देशानुसार जिले में मृतक डीलरों के आश्रितों को अनुकंपा पर राशन की दुकानों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। फिलहाल 11 आश्रित लोग पात्र हैं। वर्ष 2015 में इस प्रक्रिया का बंद कर दिया था। अब फिर से शुरू की है।

Updated On:
13 Sep 2019, 04:40:38 PM IST

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