पढ़े, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी क्यों नहीं हो सका पारधियों का पुनर्वास

By: Devendra Kumar Karande

Updated On:
13 Aug 2019, 05:04:03 AM IST

  • वर्ष २००७ से पारधी समुदाय के ९६ परिवार विस्थापन की राह ताक रहे हैं लेकिन इनके पुनर्वास को लेकर अभी तक प्रयास नहीं हो सके है। जबकि हाईकोर्ट पारधियों के पुनर्वास को लेकर आदेश भी कर चुका हैं।

बैतूल। वर्ष २००७ से पारधी समुदाय के ९६ परिवार विस्थापन की राह ताक रहे हैं लेकिन इनके पुनर्वास को लेकर अभी तक प्रयास नहीं हो सके है। जबकि हाईकोर्ट पारधियों के पुनर्वास को लेकर आदेश भी कर चुका हैं। हाईकोर्ट के आदेश के परिपालन में प्रशासन द्वारा सिर्फ पुनर्वास क्षेत्र सोनाघाटी में लाखों रुपए खर्च कर सीसी रोड और नालियां बना दी गई लेकिन बिजली, पानी का कोई इंतजाम नहीं किया गया। जिसके कारण पारधी परिवार वहां जाने के लिए तैयार नहीं है। जबकि जिला प्रशासन द्वारा पारधी परिवारों को जमीन के पट्टों का वितरण भी कर दिया गया है।
लाखों रुपए खर्च नतीजा सिफर
पारधियों के पुनर्वास को लेकर सोनाघाटी में करीब दो एकड़ जमीन आरक्षित की गई है, जो फोरलेन से लगी हुई है। पंचायत के माध्यम से लाखों रुपए खर्च कर पुनर्वास क्षेत्र में सीसी रोड एवं नालियों का निर्माण भी करा दिया गया है, लेकिन अभी तक पारधियों को यहां विस्थापित नहीं किया गया है। करीब एक साल पहले विस्थापन को लेकर प्रशासन ने प्रयास किए थे लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते इन्हे बसाया नहीं जा सका। वहीं पारधियों के दूसरे गुट को चौथिया में विस्थापित कर दिया गया था लेकिन वहां भी सुविधाएं नहीं मिलने से आधे से ज्यादा पारधी परिवार लौटकर बैतूल आ गए हैं।वर्तमान में पारधी परिवार उत्कृष्ट स्कूल की जमीन पर काबिज हैं।
इनका कहना
- स्थानांतरण की वजह से पूरा प्रशासनिक अमला बदल चुका है। इसलिए पारधियों के पुनर्वास को लेकर अब नए सिरे से प्लानिंग करना होगी। पुनर्वास मामले में पारधी परिवारों से जल्द चर्चा करेंगे।
-तेजस्वी एस नायक, कलेक्टर बैतूल।
- हाईकोर्ट पारधियों के पुनर्वास को लेकर दो बार आदेश दे चुका हैं लेकिन जिला प्रशासन द्वारा अभी तक पुनर्वास नहीं किया है। सोनाघाटी में पुनर्वास के लिए सीसी रोड और नालियां तो बना दी है लेकिन बिजली, पानी जैसी कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में हम वहां कैसे रहें।
- अलस्या पारधी, मुखिया पारधी समुदाय।

Updated On:
13 Aug 2019, 05:04:03 AM IST

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