पहाड़ी पर बसे मजरे-टोलों के हैंडपंपों ने तोड़ा दम, तलहटी से ला रहे पानी

By: Sanjeev Dubey

Published On:
May, 14 2019 11:00 AM IST

  • पहाड़ी पर बसे मजरे-टोलों में हैंडपंपों ने दम तोड़ा, तलहटी के हैंडपंप से पानी ला रहे बापचा गांव के लोग

हरदा. सतपुड़ा के अंचल में पहाड़ी पर बसा साढ़े तीन सौ की आबादी वाला बापचा गांव। गर्मी का मौसम आने के साथ ही यहां के रहवासियों की तकलीफ बढ़ जाती है। जलस्तर में गिरावट आने पर बसाहट में लगे हैंडपंप दम तोडऩे लगते हैं। लिहाजा प्यास बुझाने के लिए ग्रामीणों को तलहटी में लगे हैंडपंपों से पानी लेकर आना पड़ता है। इस दौरान महिलाओं को हो रही परेशानी का तो अंदाजा लगाना ही नामुमकिन। सूरज के चढऩे के साथ ही पानी जुटाने को लेकर उनकी जंग शुरू हो जाती है। गांव की बुजुर्ग सुमरतीबाई बताती हैं कि गवलियों की बस्ती में लगा हैंडपंप गर्मी से पहले ही सूख चुका। यहां के लोग कई महीनों से तलहटी पर लगे हैंडपंप से पानी भरकर लाते हैं। एक साल पहले ब्याहकर गांव में आई सुनीता पानी की समस्या पर कुछ बोली तो नहीं, लेकिन उसका चेहरा यह पीढ़ा बयां करने के लिए काफी था कि पानी का मोल क्या होता है। अपना तथा परिवार के लोगों का कंठ तर करने के लिए पहाड़ी रास्तों से गुजरकर तलहटी में लगे हैंडपंप से पानी ढोकर लाना इन महिलाओं की दिनचर्या का दंश बन चुका है। घरवालों की मदद करने के लिए इन परिवारों के बच्चे भी वजन ढोने की अपनी हैसियत अनुसार पानी लेकर आ रहे हैं। पुरुषों की परेशानी भी कुछ कम नहीं। परिवार के भरण पोषण के लिए काम करने के पहले उन्हें भी पानी ढोकर लाना पड़ता है। जिन घरों में केवल बुजुर्ग महिलाएं रहती हैं वे कभी किस्मत तो कभी व्यवस्था को कोसते हुए घर से हंैडपंप और हैंडपंप से घर की ओर सिर पर बोझ लादकर कदमताल कर रहीं हैं। आंख के ऑपरेशन के बावजूद सिर पर पानी का बर्तन रखने को मजबूरी बताते हुए सुंदरबाई (६५) कहती हैं कि प्रसूताओं को भी पानी के लिए रोज इसी तरह मशक्कत करना पड़ती है। वे बताती हैं कि वन क्षेत्र के सभी गांवों में यही स्थिति है। ग्रामीणों को पानी के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।

 

हैंडल इतना टाइट कि दो लोगों को दबाना पड़ रहा
उबड़-खाबड़ रास्तों से हैंडपंप तक पहुंचने के बाद महिलाओं की ताकत वैसे ही जवाब देने लगती है। उस पर हैंडपंप चलाना किसी सजा से कम नहीं। तहलटी के जिन हैंडपंपों से पानी निकल रहा उनके हैंडल इतने टाइट हैं कि दो लोगों को दबाना पड़ता है।

दो हैंडपंप के भरोसे पूरा गांव
जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर टिमरनी ब्लाक की लाखादेह ग्राम पंचायत के इस गांव में कोरकू व गवली जाति के करीब 70 मकान हैं। पानी के लिए ये सभी लोग तलहटी के दो हैंडपंप पर आश्रित हैं। यहीं लगे तीसरे हैंडपंप से कभी पानी निकलता है, कभी नहीं। तलहटी में ही एक बोरवेल में मोटर पंप लगा है। समय-समय पर चलने वाले इस पंप से मवेशियों के पानी की हौद भरी जाती है। इसी दौरान जो ग्रामीण यहां पहुंच जाएं उन्हें पानी मिल जाता है।

एक साल से सूखे पड़े गांव के नल
ग्रामीण सियाराम, कमल सिंह, मंगल सिंह आदि ने बताया कि उनके गांव में नलजल योजना के तहत नल तो लगे हैं, लेकिन एक साल से इनमें पानी नहीं आता। योजना के तहत लगे मोटरपंप के चोरी होने के बाद से यह स्थिति है।

कुआं खुदाई महीनों से रुकी पड़ी
गांव के हरिराम गवली के मुताबिक पेयजल समस्या के निराकरण के लिए सार्वजनिक कुआं की खुदाई शुरू तो कराई गई, लेकिन यह काम पूर्ण नहीं हुआ। वहीं सरपंच नरेंद्र कुमार का कहना है कि मजदूर नहीं मिलने से यह काम रुका है। नलजल योजना वन विभाग ने शुरू कराई थी, लिहाजा इसके चालू होने के बारे में वे कुछ नहीं बता सकते।

आरक्षण का असर : अतिथि शिक्षकों को मिला सरपंची का मौका
इस गांव से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान सरपंच का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रहा। ग्राम पंचायत क्षेत्र में इस श्रेणी के वाशिंदे नहीं थे। लाखादेह के स्कूल में पदस्थ एक शिक्षिका के पति डॉ. नेतराम डोंगरवार यहीं रहकर अतिथि शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे थे। वहीं बरखेड़ी निवासी नरेंद्र कुमार भी इसी स्कूल में अतिथि शिक्षक थे। वर्ष २०१५ के चुनाव में दोनों ने भाग्य आजमाया। डॉ. डोंगरवार करीब 20 वोट से जीतकर सरपंच बने। फरवरी 2017 में उनका आकस्मिक निधन होने पर सरपंच के लिए उप चुनाव हुआ। इसमें नरेंद्र कुमार निर्विरोध सरपंच बने। ग्रामीणों के मुताबिक सरकारी रिकार्ड में वे ग्राम पंचायत के निवासी हैं, लेकिन रहते बरखेड़ी में हैं। गांव की समस्या बताने के लिए उनके यहां आने का इंतजार करना पड़ता है। हालांकि नरेंद्र का कहना है कि वे प्रतिदिन ग्राम पंचायत पहुंचकर लोगों की समस्याओं को सुनकर उन्हें दूर करने का प्रयास करते हैं।

इनका कहना है
वनक्षेत्रों में पेयजल समस्या बढ़ रही है तो वहां पानी की उपलब्धता के प्रयास किए जाएंगे। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम को बापचा गांव भेजकर पता लगवाया जाएगा कि समस्या निराकरण के लिए क्या किया जा सकता है।
- एस. विश्वनाथन, कलेक्टर हरदा

Published On:
May, 14 2019 11:00 AM IST

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।