RakshaBandhan : इस बार बहनों को नहीं करना होगा शुभ मुहूर्त का इंतज़ार

By: tarun kashyap

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Published: 13 Aug 2019, 05:32 PM IST

Beawar, Beawar, Rajasthan, India

ब्यावर । सालों बाद इस बार रक्षाबंधन पर राखी (RakshaBandhan )बांधने के लिए बहनों को किसी ख़ास शुभ मुहूर्त का इन्तजार नहीं करना होगा। इस बार पूर्णिमा तिथि पूरे दिन रहेगी और सौभाग्य और शोभन योग में बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर राखी बांधेंगी। रक्षाबंधन में दो दिन शेष बचे हैं, इसे देखते हुए शहर में रक्षाबंधन (RakshaBandhan ) की तैयारियां तेज हो गई हैं।

इस बार भद्रा की नजर नहीं(shubh muhurat )
पंचांग के अनुसार इस बार अनुष्ठान का समय सुबह 05:53 से शाम ०5:58 बजे तक रहेगा। अपराह्न मुहूर्त 1:43 बजे से 4:20 बजे तक महत्वपूर्ण है। रक्षाबंधन में भद्रा की नजर लगने पर राखी बांधने के समय में परिवर्तन करना पड़ता है। भद्रा रहित काल में ही राखी बांधने का विधान शास्त्र सम्मत माना जाता है। सौभाग्य से इस बार इस पर्व को भद्रा (Bhadra)की नजर नहीं लग रही है। इसके चलते बहनें भाइयों को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच राखी बांध सकती हैं।


कई कथाएं हैं प्रचलित
पर्व को लेकर कई प्रथाएं हैं प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार भगवान बामन ने जब तीन पग में धरती नापी थी तो देवताओं की रक्षा हुई थी। उस समय से रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया। एक कथा यह भी है कि भगवान श्रीकृष्ण ने राजा बलि को कलाई में एक धागा बांधकर पाताल लोक में भेजा था, तभी से रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा शुरू हुई। द्रौपदी भगवान श्री कृष्ण को अपना भाई मानती थीं। मान्यता है कि एक बार श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लग गई थी। इस पर द्रौपदी ने तुरंत अपनी धोती का किनारा फाड़कर कृष्ण के हाथ में बांध दिया था। भगवान ने चीरहरण में द्रौपदी की लाज बचाकर अपना भाई धर्म निभाया था।

 

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