सनस्क्रीन के बारे में कितना जानते हैं आप?

By: शंकर शर्मा

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Published: 15 Apr 2018, 04:59 AM IST

सौंदर्य

बात चाहे गर्मी की हो या सर्दी के मौसम की, त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए सनस्क्रीन क्रीम या लोशन का जिक्र हमेशा होता रहता है। इनका काम सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाव करना है ताकि त्वचा को किसी प्रकार का कोई नुकसान न हो सके। निश्चित उम्र से पहले त्वचा पर झुर्रियां, फाइन लाइंस, त्वचा का फटना, रंगत पर असर होने का अहम कारण है यूवी किरणें। जानते हैं इनसे बचाव के लिए उपयोगी सनस्क्रीन लोशन व क्रीम के बारे में -

ये ध्यान रखें

एसपीएफ की मात्रा
सनस्क्रीन लोशन का चुनाव करते समय उसमें मौजूद सन प्रोटेक्शन फैक्टर यानी एसपीएफ की मात्रा की सही जानकारी होना जरूरी है। कई स्किन एक्सपट्र्स की मानें तो कम से कम एसपीएफ 15 की मात्रा वाला लोशन बेहतर रहता है। लेकिन बढ़ती गर्मी और प्रदूषण के दौरान एसपीएफ 15 से 30 वाले सनस्क्रीन लोशन अधिक प्रभावी होते हैं। एसपीएफ की मात्रा जितनी अधिक होगी, त्वचा को यूवी किरणों से होने वाला नुकसान उतना ही कम होगा।

सनस्क्रीन व सनब्लॉक में अंतर
सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा के लिए काफी खतरनाक होती हैं। ये लंबे समय तक त्वचा पर असर छोड़ती है। सनस्क्रीन लोशन या क्रीम का काम त्वचा को किरणों से मामूली रूप से फिल्टर करने का होता है। वहीं यदि बात करें सनब्लॉक कॉस्मेटिक्स की तो इनमें जिंक ऑक्साइड पाया जाता है जो हर तरह की किरणों से बचाव करता है।

इस तरह करें प्रयोग
त्वचा के प्रकार के अनुसार और यदि इस बारे में नहीं पता तो डर्मेटोलॉजिस्ट से इसकी जानकारी लेकर सही सनस्क्रीन लोशन या क्रीम को चुनना चाहिए। क्योंकि यदि इसे लगाने के बाद त्वचा चिपचिपी लगे तो हो सकता है कि यह आपकी त्वचा के लिए नहीं है। कैसे करें पहचान-

नॉर्मल स्किन टाइप वालों की त्वचा से आमतौर पर ऑयल नहीं निकलता और त्वचा साफ व चमकदार नजर आती है। ऐसे में क्रीम बेस्ड सनब्लॉक को चुना जा सकता है।


वहीं आपकी त्वचा रूखी है तो मॉइश्चराइजर बेस्ड सनस्क्रीन का प्रयोग बेहतर साबित हो सकता है। यदि आपको यह न मिले तो आप त्वचा पर मॉइश्चराइजर लगाने के बाद सनस्क्रीन लगा सकते हैं।


जिनकी त्वचा ऑयली होती है उन्हें कील मुहांसों की समस्या अधिक होती है। ऐसे में उन्हें ऑयल फ्री सनस्क्रीन लोशन या क्रीम को प्रयोग में लेना चाहिए।


ऑयली त्वचा पर जेल या एक्वा बेस्ड एसपीएफ फॉम्र्युलेशन वाले सनस्क्रीन का इस्तेमाल बेहतर होता है। इसका कारण इनके प्रयोग से त्वचा को मिलने वाली ठंडक है।

इन्हें आजमाएं
सनस्क्रीन लोशन लगाने के बाद भी यदि त्वचा पर पसीना या चिपचिपाहट हो तो इसके साथ लैक्टो कैलेमाइन को प्रयोग में ले सकते हैं।


यदि धूप तेज है और पसीने के कारण एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन का असर कम हो जाता है तो अगली बार से सनस्क्रीन लोशन या क्रीम की मोटी परत चेहरे पर लगाएं।

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