समय पर मिल जाता उपचार तो एक नवजात को नहीं खोना पड़ता मां का प्यार

By: MAHESH GOSWAMI

Published On:
Jun, 12 2019 12:12 PM IST

 
  • 8 जून को जिला चिकित्सालय में रेलावन निवासी प्रसूता की उपचार दौरान मृत्यु हो गई थी।

बारां जननी शिशु सुरक्षा को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से भारी भरकम राशि व्यय की जा रही है, इसके बावजूद जिले में हालात नहीं सुधर रहे। जिला चिकित्सालय में सोमवार शाम को भर्ती हुई सहरोद गांव निवासी प्रसूता इन्दिरा बैरवा को प्रसव के बाद रक्तस्राव होने से मंगलवार दोपहर कोटा रैफर कर दिया था। जहां चिकित्सालय पहुंचते ही उसका दम टूट गया। इससे पहले 8 जून को जिला चिकित्सालय में रेलावन निवासी प्रसूता की उपचार दौरान मृत्यु हो गई थी।

एम्बुलेंस में दिया पुत्र को जन्म
प्रसूता के पति जोधराज बैरवा ने बताया कि वह मूल रूप से जालेड़ा निवासी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सहरोद में परिवार के साथ रहकर हाळी का काम करता है। उसकी पत्नी इन्दिरा को सोमवार दोपहर प्रसव पीड़ा होने पर दोपहर करीब दो बजे 108 एम्बुलेंस को कॉल किया, डेढ़ घंटे तक एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे। निर्धनता के चलते वाहन की व्यवस्था नहीं हुई। करीब साढ़े तीन बजे अटरू से एम्बुलेंस पहुंची। गांव से यहां लाने के दौरान करीब साढ़े चार बजे बराना गांव के समीप ही एम्बुलेंस में इन्दिरा ने पुत्र को जन्म दिया।
रात में चढ़ाया चार यूनिट ब्लड
उसे करीब पांच बजे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, शिशु को 5.36 पर एसएनसीयू में रखा गया। प्रसूता के शरीर में मात्र दो ग्राम हिमोग्लोबिन बताया गया। तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो आनन-फानन में एक हाथ में फ्लूड, दूसरे में ब्लड व ऑक्सीजन लगा दी। सुबह छह बजे तक कुछ-कुछ देर में लगातार चार यूनिट ब्लड चढ़ा दिया।

फिर रास्ते में उखडऩे लगी सांसे
जोधराज का कहना है कि अस्पताल के एक कमरे में उसकी पत्नी को रखा गया। कमरे में परिवार के किसी को घुसने भी नहीं दिया। मंगलवार सुबह नौ बजे नाजुक स्थिति में कोटा रैफर कर दिया। एम्बुलेंस का इंतजाम होने के बाद करीब 12 बजे कोटा चिकित्सालय पहुंचे, लेकिन रास्ते में ही रक्तस्राव हो गया। प्रसूता की सांसे उखडऩे लग गई थी। कोटा में जांच के बाद चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

-प्रसूताएं रैफर होती रहती है, यहां जिला चिकित्सालय में तो किसी की मौत नहीं हुई, ब्लड कम था तो चढ़ाया भी गया होगा। इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
-डॉ. बीएल मीणा, पीएमओ, जिला चिकित्सालय

-प्रसूता शाम करीब पांच बजे पहुंची थी, ब्लीडिंग बिलकुल नहीं थी। उसके मात्र दो ग्राम ब्लड था। उसी समय दो यूनिट लगाने व ऑक्सीजन के बाद तबीयत सुधार गई। देर रात फिर बिगड़ गई तो कॉल पर डॉ. वीनू कतियाल व फिजीशियन डॉ. धनराज को बुलाया। सभी ने रातभर काफी प्रयास किए। परिजनों के अनुसार उन्होंने पूरे नौ माह किसी से इलाज नहीं कराया।
-डॉ. संतोष डडवाडिया, स्त्री रोग चिकित्सक

Published On:
Jun, 12 2019 12:12 PM IST

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।