बेंगलूरु में अब रफ्तार की निगरानी करेगा वाहन गति सीमा प्रणाली

By: arun Kumar

Published On:
Sep, 13 2018 12:57 AM IST

  • शहर की दस सड़कों पर लगाए गए गति सीमा निगरानी प्रणाली बोर्ड

बेंगलूरु. यातायात नियमों को सख्ती से लागू करने में लगी शहर की यातायात पुलिस के लिए अब तक की सबसे बड़ी परेशानी वाहनों की गति सीमा उल्लंघन के मामलों को न पकड़ पाना था। हालंाकि गति सीमा उल्लंघन के मामले अब इतिहास बनने वाले हैं क्योंकि शहर की प्रमुख सड़कों पर चालक फीडबैक साइनबोर्ड की स्थापना की है। प्रौद्योगिकी आधारित इन बोर्डों में वाहनों की गतिसीमा स्वचालित रूप से पकड़ में आ जाएगी। हालांकि अभी तक यह निर्णय नहीं हुआ है कि इनकी मदद से गति सीमा उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
प्रत्येक सड़क के लिए वाहनों की गति सीमा निर्धारित है लेकिन अक्सर देखने में आता है कि वाहन चालक गति सीमा का उल्लंघन करते हैं और तेज गति से वाहन चलाने के कारण न सिर्फ खुद के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं बल्कि अन्य वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी मुसीबत बन जाते हैं। सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में गति सीमा उल्लंघन प्रमुख है और इस वर्ष भी विभिन्न हादसों में बेंगलूरु में अब तक ४४४ लोगों की जान जा चुकी है।
शहर की कुछ सड़कें सड़क दुर्घटनाओं के लिए बदनाम हैं जिनमें यलहंका, केआरपुरम, चिक्कजाला, देवनहल्ली और हवाई अड्डा रोड प्रमुख हैं। ये क्षेत्र हाइवे से जुड़े हैं और अक्सर हाइवे पर तेज रफ्तार की जानलेवा शौक को पूरा करने के चक्कर में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इस पर नियंत्रण के लिए बेंगलूरु यातयात पुलिस (बीटीपी) ने विशेष किस्म की गति सीमा निगरानी प्रणाली वाले बोर्डों को शहर की दस प्रमुख सड़कों पर लगाया है। इनमें से छह की स्थापना आउटर रिंग रोड में विभिन्न स्थानों पर की गई जबकि बल्लारी रोड और तुमकूरु रोड पर दो-दो बोर्ड लगाए गए हैं। ये बोर्ड सेंसर आधारित हैं जो वाहन की गति सीमा को ५० मीटर की दूरी पर ही पकड़ लेते हैं। ऐसे में अगर कोई वाहन गति सीमा का उल्लंघन करता है तो वह आसानी से इसकी पकड़ में आ जाएगा।
पिछले वर्ष 609 लोगों की हुई थी मौत
वर्ष-2017 में बेंगलूरु में 5064 सड़क हादसे हुए जिनमें 609 लोगों की मौत हुई। दुर्घटना का एक प्रमुख कारण वाहन का गति सीमा उल्लंघन रहा। वहीं इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक 3118 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं जिनमें 444 लोगों की मौत हुई है। मई महीने में सर्वाधिक 73 लोगों की मौत हुई थी। इस वर्ष सर्वाधिक सड़क हादसे वाले क्षेत्रों में केआरपुरम में 172, कामाक्षीपाल्या में 156, पीनिया में153, यलहंका 147 और व्हाइटफील्ड में 132 दुर्घटनाएं हुईं। वहीं यलहंका में सर्वाधिक 30 लोगों की मौत हुई जबकि केआरपुर और चिक्कजाला में प्रत्येक में 28 जबकि देवनहल्ली में 21 और एयरपोर्ट रोड पर 15 लोगों ने जान गंवाई है।

Published On:
Sep, 13 2018 12:57 AM IST