प्रभु भाव के भूखे हैं आडम्बर के नहीं

बेंगलूरु. दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से बाबानगर, द्वारकानगर, बागलूरु मेन रोड स्थित आर.एन.आर प्लाजा में आयोजित श्रीहरि कथा के दूसरे दिन रविवार को स्वामी प्रदीपानंद ने धन्ना जाट के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए आज हम अनेक प्रकार के बाहरी कर्मकांड करते हैं। हमारी हर क्रिया के पीछे स्वार्थ छिपा हुआ है। मन में लोभ, कपट है।

ईश्वर की आराधना करते हुए भी हमारा मन संसार में विचरण करता रहता है। धन्ना जाट के जीवन से हमें प्रेरणा मिलती है कि प्रभु भाव के भूखे हैं। पाखंड और आडंबर के नहीं। प्रभु को कपट, चतुराई अच्छी नहीं लगती। भले ही हम निर्धन हैं, हम प्रभु को छप्पन भोग अर्पित नहीं कर सकते किंतु अगर मन में पवित्र भाव हैं तो प्रभु प्रसन्न अवश्य होंगे। साध्वी सुबुद्धा ने कहा कि बाहरी ज्ञान से शब्दों की झड़ी लगाने से कोई भी मानव ज्ञान को प्राप्त नहीं कर सकता है।

कथा में कृष्ण गोविन्द गोविन्द गाया करो..., जप ले हरि का नाम.... आदि भजनों पर श्रोता झूम उठे।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।