संयम प्रधान आध्यात्मिक संस्कृति के उन्नायक थे आचार्य तुलसी

Shankar Sharma

Publish: Sep, 12 2018 10:48:32 PM (IST)

तेरापंथ सभा, गांधीनगर के तत्वावधान में साध्वी कंचनप्रभा एवं साध्वी मंजूरेखा के सान्निध्य में मंगलवार को अणुव्रत चेतना दिवस के उपलक्ष्य में धर्म सभा आयोजित की गई।

बेंगलूरु. तेरापंथ सभा, गांधीनगर के तत्वावधान में साध्वी कंचनप्रभा एवं साध्वी मंजूरेखा के सान्निध्य में मंगलवार को अणुव्रत चेतना दिवस के उपलक्ष्य में धर्म सभा आयोजित की गई। साध्वी कंचनप्रभा ने कहा कि भारत की संयम प्रधान आध्यात्मिक संस्कृति के उन्नायक राष्ट्र संत आचार्य तुलसी थे। 

उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता प्राप्ति के अनमोल पलों में नैतिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया। अणुव्रत सार्वभौम धर्म है। हर इंसान सह-अस्तित्व, समन्वय तथा मैत्री भावों को अपने जीवन में प्रतिष्ठित करे, यह परमावश्यक है। आचार्य तुलसी ने सम्पूर्ण भारत की लगभग एक लाख किमी की यात्रा करके जैन-अजैन सभी धर्मगरुओं को एक मंच पर बिठाकर अणुव्रत के मंच से मानव धर्म प्रतिष्ठित किया।

वर्तमान में अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण अहिंसा यात्रा से यही संदेश प्रदान कर रहे हैं। साध्वी मंजूरेखा ने कहा कि धर्म केवल उपासना प्रधान न रहे, जीवन के हर कार्य क्षेत्र में तथा व्यवहारों में, आचरणों में पवित्रता रहे- यह अणुव्रत का संदेश है। समणी संचितप्रज्ञा ने भी अणुव्रतों को अपने जीवन में जीने की प्रेरणा दी। राजाजीनगर महिला मंडल ने मंगलाचरण किया। अणुव्रत समिति ने अणुव्रत गीत का संगान किया। अणुव्रत समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल चिप्पड़ ने स्वागत किया।


संचालन सभा मंत्री प्रकाशचंद लोढ़ा ने किया। तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशन एवं साध्वी कंचनप्रभा ठाणा-5 के सान्निध्य में स्मृति में रहे इतिहास कण्ठस्थ प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम हुआ, जिसमें 10 समूहों में 65 संभागी बनी युवक-युवतियां व कन्याओं ने भाग लिया। महिला मंडल मंत्री सीमा श्रीमाल, ज्ञानशाला संचालिका नीता गादिया एवं विनीता मरोठी उपस्थित थे।

बिना श्रद्धा नहीं चलता संसार
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, राजाजीनगर के तत्वावधान में साध्वी संयमलता ने ‘श्रद्धा से दीप जले’ विषय पर कहा कि जीवन की एक-एक र्इंट आस्था की नींव पर रखी गई है। बिना श्रद्धा के न तो संसार चलता है और न ही मुक्ति का द्वार खुलता है।


उन्होंने कहा कि सच्ची आस्था से रास्ता मिल जाता है। आस्थावान व्यक्ति संसार में भटक नहीं सकता। श्रद्धा आपको प्रभु से मिलाने का काम करती है। साध्वी कमलप्र्रज्ञा ने अंतगड़ सूत्र का वर्णन करते हुए कहा कि एकाग्रता के अभाव में प्रार्थना, प्रार्थना नहीं केवल प्रदर्शन व दिखावा मात्र रह जाती है। संघ मंत्री ज्ञानचंद लोढ़ा ने बताया कि त्रिशला महिला मंडल व ब्राह्मी कन्या मंडल ने भगवान महावीर जन्मोत्सव पर १४ स्वप्न की नाटिका का मंचन किया। साध्वी अमितप्रज्ञा ने गीतिका प्रस्तुत की। बहु मंडल व युवा मंडल द्वारा भरत मरुदेवी की नाटिका का मंचन किया गया। साध्वी कमलप्रज्ञा ने कल्पसूत्रका वाचन किया।

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Web Title "Acharya Tulsi was the pioneer of patriot spiritual culture"