न तो मेडिकल कॉलेज खुला और न ही मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं

By: Bhaneshwar Sakure

Published On:
Sep, 12 2018 12:49 PM IST

 
  • मै डॉक्टर, बताऊंगा मर्ज

बालाघाट. बालाघाट जिला काफी बड़ा है। यहां की जनसंख्या करीब १७ लाख है। यहां आबादी के हिसाब से न तो डॉक्टरों की पदस्थापना हो पाई है और न ही ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पा रही है। जिले में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की घोषणाएं तो की गई, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाया। नगर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सीएस चतुरमोहता बताते है कि जिले में आबादी बढऩे के साथ-साथ सुविधाएं बढऩा चाहिए। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई प्रयास नहीं हो पाया है। भले ही जिले के सभी विकासखंड मुख्यालयों में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हो, लेकिन यहां डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हुए है। जनप्रतिनिधियों का भी इस ओर ध्यान नहीं है। अनेक बार डॉक्टरों की पदस्थापना को लेकर मांग भी हुई। लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। सबसे ज्यादा बदतर स्थिति ग्रामीण अंचल की है। जिसमें खासतौर पर वनों के बीच बसे गांवों की स्थिति काफी खराब है।
डॉ. सीएस चतुरमोहता का कहना है कि पूर्व में यहां पर मेडिकल कॉलेज खोले जाने की घोषणा की गई थी। लेकिन आज तक इस पर अमल नहीं हो पाया। पड़ोसी जिले सिवनी में इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। यहां डॉक्टरों की कमी और मेडिकल कॉलेज नहीं होने से मरीजों को गंभीर अवस्था में जबलपुर, नागपुर या फिर रायपुर लेकर जाना पड़ता है। इस स्थिति में यदि यहां मेडिकल कॉलेज हो जाए तो स्थिति में काफी सुधार आ सकता है। उनका कहना है कि बालाघाट जिला प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व देने वाला जिला है। लेकिन यहां सुविधाएं नहीं होना जिले का दुर्भाग्य है।
डॉ. सीएस चतुरमोहता, एमडी मेडिसिन, सलाहकार चिकित्सक

Published On:
Sep, 12 2018 12:49 PM IST

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