नव संवत्सर 2077: जानिये क्या कहता है हिन्दू कैलेंडर, ये होगा ग्रहों का प्रभाव

नवसंवत्सर यानि नया विक्रम संवत्सर जिसका नाम प्रमादी है, 25 मार्च, बुधवार से आरंभ हो गया है। इस नवसंवत्सर के राजा बुध और चंद्र देव मंत्री हैं।

इस नए प्रमादी नामक संवत्सर के गर्भ में देश को लेकर क्या छिपा है, इसे लेकर पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि हिंदूस्तान यानि भारत और यहां की जनता के लिए यह साल मिलाजुला सिद्ध होगा। ऐसे में इस संवत्सर में फसलों की पैदावार तो अच्छी होगी, लेकिन समाज में प्रमाद की भी अधिकता रहने के साथ ही सांप्रदायिकतावाद बढ़ सकता है।

इसके साथ ही समाज में कहीं ना कहीं अविश्वास और अस्थिरता का माहौल भी इस दौरान पैदा हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही ये नवसंवत्सर देश के लिए कुछ सुखद समाचार भी ला सकता है, इसका कारण यह है कि इस साल दसाधिकारियों में सूर्य, चंद्र, बुध, बृहस्पति और शनि का प्रभाव अधिक रहेगा जिसके फलस्वरूप देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और न्याययिक व्यवस्था में भी मजबूती आएगी।

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बुध का प्रभाव:
इस बार प्रमादी नामक नवसंवत्सर के राजा बुध होने के कारण पूरे वर्ष बुधदेव का आधिपत्‍य रहेगा। वहीं बुध चूंकि कन्‍या राशि के स्‍वामी हैं, जो कि महिलाओं के प्रभाव को दर्शाती है। इसलिए यह माना जा रहा है कि इस बार बुधदेव की कृपा महिलाओं पर विशेष रूप से रहेगी। महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करेंगी।

वहीं इस बार धन के स्‍वामी बुध होने के कारण वस्‍तुओं का अच्‍छा खासा प्रभाव हो सकता है। व्‍यापार में खासा लाभ आपको मिलेगा और सरकारी खजाने में इस वक्‍त धन का इजाफा होगा। धार्मिक क्रिया कलापों में इस साल अच्‍छा खासा धन आने की उम्‍मीद है।

इसके अलावा बुध के राजा होने की वजह से इस वर्ष लोगों का धर्म और आध्‍यात्‍म के प्रति झुकाव बढ़ेगा। वर्तमान स्थिति को देखें तो कोरोना का दंश सारी दुनिया झेल रही है, ऐसे में ईश्‍वर ही एकमात्र सहारा हैं। बुध के प्रभाव से लोगों को लिखने-पढ़ने से जुड़े कार्यों में सफलता मिलेगी। नौकरीपेशा और व्‍यापारियों के लिए उन्‍नति वाला वर्ष साबित हो सकता है। हालांकि राजनीतिक हालात संतोषजनक नहीं रहेंगे।

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इस बार के राजा बुध होने से लोगों को बहुत उम्‍मीद हैं। पिछले वर्ष के राजा शनि होने के कारण माना जा रहा है कि वर्ष जाते-जाते बुरी यादें छोड़कर जा रहा है। लेकिन इस वर्ष के राजा बुध होने के कारण काफी उम्‍मीदें जग रही हैं। माना जा रहा है कि बुध के प्रभाव से इस साल आपके घर में शुभ कार्यों और मांगलिक कार्यों का आयोजन हो सकता है। लोग प्रसन्‍न रहेंगे। मनोरंजन के क्षेत्र में लोगों का झुकाव अधिक रहने वाला है, धन धान्य और सुख सुविधाओं के प्रति भी लोगों का अधिक झुकाव रहेगा।

मंत्री चंद्रमा का प्रभाव
नवसंवत्सर प्रमादी के मंत्री चन्द्र देव हैं। ऐसे में चंद्र के कारण शीर्ष नेतृत्व अपने मंत्रियों से बड़ी ही कठोरता से काम लेगा, मुमकिन है इस दौरान मंत्रियों को अवकाश भी न मिले। किन्तु, मंत्री चंद्रमा के ही प्रभावस्वरूप शीर्ष नेतृत्व अपने मंत्रियों की सलाह अधिक से अधिक मानेगा, जिससे आपसी प्रशासनिक तालमेल भी बढेगा।

वहीं चंद्र के प्रभाव के चलते खाद्यान का उत्पादन, फसलों सहित शहद और दुग्ध का भी उत्पादन बढेगा। महंगाई पर लगाम लगने की भी संभावना अधिक है और साथ ही किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में भी कमी आएगी।

वहीं इस नवसंवत्सर के कोषाध्यक्ष का अधिकार बुध के पास होना व्यापारिक वर्ग के लिए सुखद संकेत है, साथ ही सरकारों को हो रहे राजस्व घाटे में भी कमी की संभावना दर्शाता है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भण्डार में भी बढ़ोत्तरी के संकेत हैं जिससे देश में आर्थिक पक्ष और मजबूत होगा।

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सूर्यदेव का प्रभाव:
इस दौरान ग्रहों के राजा सूर्यदेव के पास सबसे अधिक तीन अधिकार हैं। इनमें वर्षा के स्वामी, पुष्पों- फलों के स्वामी और सेनापति का भी अधिकार सूर्यदेव के पास ही है। इसमें वर्षा के स्वामी सूर्य देव के होने के परिणाम स्वरूप संभावना है कि भारतवर्ष में वर्षा अच्छी होगी, जिससे फसलों की पैदावार बहुत अच्छी होगी और कहीं ना कहीं इससे महंगाई पर नियंत्रण लगेगा।

वहीं इसके अलावा पुष्पों और फलों के स्वामी भी यहां सूर्यदेव ही हैं अतः माना जा रहा है कि इस बार वृक्ष और खूब पौधे पुष्पित पल्लवित होते रहेंगे, जिससे फलों की पर्याप्त पैदावार होगी।

वहीं सबसे सुखद बात यह है कि इस वर्ष के सेनापति का अधिकार भी ग्रहों के राजा सूर्य देव के पास है। जिसके चलते शीर्ष नेतृत्व कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं रहेंगे और उसका पालन करवाने में पूरी शक्ति लगा देंगे।

यह साल प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थियों-प्रतियोगियों के लिए भी सुखद समाचार लेकर आएगा, नवसंवत्सर में ग्रहों की चाल को देखकर माना जा रहा है कि इस वर्ष सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा भारी संख्या में आवेदन लिए जाएंगे। जिनकी बाद में भर्ती भी होगी।

इसके अलावा सूर्य देव को शोध ओर अन्य आविष्कारों कर भी ग्रह माना जाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि नवसंवत्सर में ग्रहों की स्थिति के प्रभाव स्वरूप इस वर्ष अतिसंहारक परमाणु अस्त्रों व मिसाइलों का निर्माण और परीक्षण भी होगा। संसार में बड़े देश इसे प्रतियोगिता के रूप में देखेंगे और नित्य प्रति कुछ न कुछ नया निर्माण करते रहेंगे।

शनि: नए संवत में रसों के स्वामी शनि हैं। ऐसे में जो दिख रहा है उसके अनुसार इस साल जलस्तर घटने और वर्षा के जल का संचय नहीं हो पाने के संकेत और चतुष्पदों में रोगादि वृद्धि के भी योग बनता दिख रहा है।

बृहस्पति: नवसंवत्सर प्रमादी में बृहस्पति के पास नीरसेश और सस्येश का अधिकार है, जिनके प्रभाव स्वरूप माना जा रहा है कि ठोस वस्तुओं और पीली वस्तुओं में महंगाई बढ़ेगी विशेषकर के हीरे जवाहरात की मांग अधिक बढ़ेगी।

वहीं बृहस्पति के पास भी दो अधिकार होने के प्रभाव शुरू सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा विकास कर सकती है, जबकि धार्मिक अनुष्ठानों में ही वृद्धि होगी लोगों का जप तप पूजा पाठ के प्रति विश्वास और मजबूत होगा। इसके अलावा समय का वास वैश्य के घर में है, अतः देश का आर्थिक पक्ष तो मजबूत होगा ही व्यापारिक वर्ग के लिए भी यह अति लाभकारी सिद्ध होगा।

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