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Hartalika teej 2018: हरतालिका तीज पर इस बार सिर्फ 2 घंटे 29 मिनट है पूजा का मुहूर्त, जानें तीज का महत्व

By Tanvi Sharma

Sep, 10 2018 04:14:37 (IST)

हरतालिका तीज पर इस बार सिर्फ 2 घंटे 29 मिनट है पूजा का मुहूर्त, जानें तीज का महत्व

Hartalika teej 2018: हरतालिका तीज पर इस बार सिर्फ 2 घंटे 29 मिनट है पूजा का मुहूर्त, जानें तीज का महत्व

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। हरितालिका तीज के दिन शादीशुदा महिलाएं और कुंवारी कन्याएं व्रत रखती हैं। कई जगहों पर हरितालिका तीज को हरतालिका तीज या तीजा भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में पड़ने वाले प्रमुख व्रत उपवासों में हरतालिका तीज का विशेष महत्व माना जाता है। हरतालिका तीड हर साल गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले मनाई जाती है। इस साल हरतालिका तीज 12 सितंबर को मनाई जाएगी। लेकिन इस बार पूजा का मुहूर्त सिर्फ 2 घंटे 29 मिनट का ही है। इस बार प्रातः पूजन के लिए सुबह 06:04 बजे से 08:33 बजे तक का ही मुहूर्त है। इस दिन महिलाएं और कुंवारी लड़कियां निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत के दिन भगवान शिव, माता गौरी और श्री गणेश जी की पूजा की जाती है। व्रत के नियमों के अनुसार महिलाएं रात भर जागरण करती हैं। रतजगा कर महिलाएं भजन कीर्तन करती हैं।

हरतालिका तीज का महत्व

मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत सबसे पहले माता गौरी ने किया था। गौरी मैय्या ने शिव शंकर को पाने के लिए तीजा का व्रत रखा था। उनके पिता की इच्छा कुछ और थी लेकिन मां पार्वती के मन मंदिर में भगवान शिव बस चुके थे और इसलिए उन्होंने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और कठोर तपस्या शुरू कर दी। इस दौरान मां पार्वती ना तो कोई अन्न ग्रहण किया और ना ही जल ग्रहण किया। इसलिए यह माना जाता है कि इस व्रत में अन्न जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। मां पार्वती की कठोर तपस्या को देखकर भगवान शंकर उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

क्यों कहते हैं हरतालिका, जानें क्या है इसका अर्थ

पौराणिक कथाओं के अनुसार हरतालिका दो शब्दों से बना है, हरित और तालिका। हरित का अर्थ है हरण करना और तालिका अर्थात सखी। यह पर्व भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, जिस कारण इसे तीज कहते है। इस व्रत को हरितालिका इसलिए कहा जाता है, क्योकि पार्वती की सखीयां उन्हें पिता के घर से हरण कर जंगल में ले गई थी। बता दें कि यह खास व्रत शिव जी जैसा पति पाने के लिए ही कुंवारी कन्याएं भी बड़ी श्रद्धा के साथ करती हैं। जैसा कि हमने पहले बताया कि सुहागन स्त्रियों और कुंवारी कन्यायों के लिए यह व्रत बहुत खास होता है। इसलिए इसकी विधि आम पूजाओं से थोड़ी भिन्न और कठिन भी होती है।

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