वैज्ञानिक फिर उतरेंगे धरती के केंद्र की गहराई में

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Published: 26 Mar 2020, 01:16 AM IST

वैज्ञानिक बियॉन्ड द एबिस नाम के प्रोजेक्ट के साथ एक बार फिर पृथ्वी के केंद्र तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं।

न्यूजीलैंड के दक्षिण में समुद्र में के बीच क्रूज पर मौजूद वैज्ञानिकों की एक टीम डायनासोर के खत्म होने की जांच कर रही है। वे दक्षिण प्रशांत की गहराई में जमा तलछट और प्राचीन चट्टानों के नमूने से इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि डायनासोरों के सारथ असल में क्या हुआ था, क्या होगा अगर हमारी पृथ्वी नाटकीय रूप से बहुत ज्यादा गर्म हो जाए या ठंडी होकर जम जाए। ऐसे में पृथ्वी पर जीवन कैसा होगा? क्या पृथ्वी के लाखों साल का इतिहास हमें यह बता सकता है कि भविष्य में हम किस ओर बढ़ रहे हैं।

पृथ्वी की गहराई में छुपे जवाब

ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के समुद्र भूविज्ञानी प्रोफेसर एंथनी कोपर्स का कहना है कि महासागरों की गतिविधियां, पृथ्वी के पर्यावरण और जलवायुए संबंधी सभी महत्त्वपूर्ण जानकारियां महासागरों की गहराई में पृथ्वी के आंतरिक कोर में छिपी हैं। अगर हम समुद्र की सतह में ड्रिल करना शुरू करें तो हमें 7 किमी मोटी समुद्र की ठोस परत मिलेगी। जबकि धरातल पर यह परत इससे कई गुना मोटी और सघन है। इससे वैज्ञानिकों को पृथ्वी के केन्द्र तक पहुंचकर नमूना लेने का अवसर मिल सकता है। इससे हमें पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत, पृथ्वी की बनावट और अन्य ग्रहों के बारे में भी महत्त्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

पृथ्वी के केंद्र तक छेद करने से जुड़े तथ्य
- 1961 में की गई थी समुद्र की गहराई में पृथ्वी के कोर तक ड्रिल करने की सबसे पहली कोशिश अमरीका द्वारा
601 फीट गहराई तक ड्रिल करने में कामयाब हो गए थे प्रोजेक्ट मोहोल के वैज्ञानिक
-10662 फीट गहराई तक समुद्र तल के नीचे ड्रिल करने का विश्व रिकॉर्ड है जापानी शिप चिक्यू का 2019 में
-41 पुराना है एक्स-ऑयल ड्रिलिंग शिप जो अभी काम कर रहा है इस प्रोजेक्ट पर
-118 वैज्ञानिकों की टीम शामिल है न्यूज़ीलैंड के इस प्रोजेक्ट में
-10 से 20 साल का समय लगेगा पृथ्वी की गहराई में ड्रिल करने की उन्नत तकनीक विकसित करने मे