बिजली आपूर्ति के निजीकरण और ताप बिजली घरों को बंद करने के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान

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Published: 07 Feb 2020, 02:13 PM IST

-केंद्र सरकार के विरुद्ध देश भर के बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों का प्रदर्शन 11 को
-इंजीनियर राष्ट्रीय संघर्ष की रणनीति चेन्नई में तय करेंगे
-सभी घरों में लगे हुए वर्तमान मीटरों को हटाकर लगाए जाएंगे प्रीपेड स्मार्ट मीटर

वाराणसी. संसद के सदन पटल पर रखे गए बिजली आपूर्ति के निजीकरण और ताप बिजली घरों को बंद करने संबंधी प्रस्ताव के विरोध में देश भर के बिजली इंजीनियरों ने मोर्चा खोल दिया है। इस मुद्दे पर 11 फरवरी को देश के सभी राज्यों की राजधानी में बिजली कर्मचारी और अभियंता विरोध प्रदर्शन करेंगे।

आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने बताया कि विगत 01 फरवरी को लोकसभा में रखे गए बजट के दो प्रस्तावों से देश भर के बिजली इंजीनियर और कर्मचारी काफी उद्वेलित हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों के विरोध में आगामी 11 फरवरी को सभी प्रांतों की राजधानियों में बिजली कर्मचारी व अभियंता विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष की अगली रूपरेखा फेडरेशन की चेन्नई मीटिंग में बनाई जाएगी।

बजट प्रस्ताव में कहा गया है कि अगले तीन साल में सभी घरों में लगे हुए वर्तमान मीटरों को हटाकर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा दिए जाएंगे और बिजली आपूर्ति में उपभोक्ताओं को आपूर्तिकर्ता कंपनी को चुनने का चॉइस दिया जाएगा जिसका साफ़ अर्थ है कि बिजली आपूर्ति कई निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि प्रीपेड मीटर लगाने से मीटर रीडर और राजस्व वसूली का कार्य पूरी तरह समाप्त हो जाएगा जिससे कम से कम तीन लाख रोजगार देश भर में बिजली के सेक्टर में कम हो जाएंगे। इसी प्रकार आपूर्ति निजी घरानों को सौंपे जाने से भी बहुत बड़े पैमाने पर रोजगार समाप्त होंगे। साथ ही मुनाफे वाले क्षेत्र का निजीकरण होने से वितरण में होने वाली हानि और प्रीपेड मीटर आदि के खर्च की भरपाई आम उपभोक्ता की बिजली दरें बढ़ा कर की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि बजट के दूसरे प्रस्ताव में कहा गया है कि अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले ताप बिजली घरों को बंद कर दिया जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो देश के एक लाख 66 हजार मेगावाट के बिजलीघर बंद हो जायेंगे जिसमे उप्र के लगभग 3000 मेगावाट क्षमता के बिजलीघर होंगे। लगभग 15000 मेगावाट क्षमता के ताप बिजलीघरों को बंद करने की नोटिस भी दे दी गई है जिसमे उत्तर प्रदेश का हरदुआगंज बिजलीघर भी है। ध्यान रहे इन पुराने बिजलीघरों से सबसे सस्ती बिजली मिलती है। उप्र में सबसे सस्ती बिजली देने वाला अनपारा बिजलीघर पूरा बंद हो जाएगा। इन बिजली घरों के बंद होने के बाद वितरण कम्पनियाँ निजी घरानों के बिजलीघरों से महंगी बिजली खरीदने हेतु विवश होंगी जिसकी भरपाई टैरिफ बढाकर की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार बजट के दोनों प्रस्ताव जनविरोधी हैं और बड़े घरानों को लाभ पहुंचाने वाले हैं जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।