जानकारी देने में रेलवे ने लगाए एक माह की जगह 3 साल, जानें क्या है मामला

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Published: 14 Sep 2017, 12:04 PM IST

दो दशक से चल रहे इस बड़े प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी

छिंदवाड़ा/नागपुर. बहुप्रत्यक्षित गोंदिया-जबलपुर ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट का काम करीब दो दशक से चल रहा है। अब तक 745 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं और 285 किमी की दूरी में 174 किमी का काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों की उदासीनता का आलम यह है कि प्रोजेक्ट के सम्बंध में जानकारी देने में रेलवे बोर्ड ने 3 साल का समय लगा दिया। इससे रेल विभाग के हाईटेक होने के दावे पर सवाल उठ रहे हैं।
गोंदिया-जबलपुर ब्रॉडगेज बदलने के काम पर अब तक 745 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। गोंदिया से जबलपुर तक की दूरी 285 किमी है और अब तक 174 किमी तक का ही काम हो सका है। इस साल इस प्रोजेक्ट पर और 154 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। गोंदिया-जबलपुर नैरो गेज को बदलने की मांग काफी पुरानी है। रेलवे ने करीब 20 साल पहले इसे ब्रॉडगेज करने का निर्णय लिया था। इसके बाद रेल बजट में प्रावधान किया गया। रेल विभाग अब तक 174 किमी तक ही लाइन बदल सका है।

745 करोड़ खर्च

गोंदिया-जबलपुर का फासला 285 किमी है। मार्च 2017 तक इस प्रोजेक्ट पर 745 करोड़ 15 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इस साल इस प्रोजेक्ट पर 154 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

ये आ रही परेशानी

इस प्रोजेक्ट में बाधाएं भी कुछ कम नहीं हैं। इन बाधाओं को कम करने में शासन-प्रशासन ने जितनी तेजी दिखानी चाहिए, वह दिखाई नहीं दे रही। रेल विभाग की मानें तो फंड की उपलब्धता, राज्य सरकार से जमीन का हस्तांतरण, शिफ्टिंग ऑफ यूटीलिटीए वन विभाग की क्लियरेंस आदि के कारण समय लग जाता है। अगर 20 साल में वन विभाग का क्लीयरेंस नहीं मिला, तो रेल विभाग की काम करने की रफ्तार पर सवाल उठना लाजमी है। प्रोजेक्ट पूरा होने की समय सीमा तय नहीं हुई है। आरटीआई एक्टिविस्ट संजय थुल ने 2 सितंबर 2014 को ऑनलाइन आवेदन कर रेलवे बोर्ड से गोंदिया-जबलपुर ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट के संबंध में जानकारी मांगी थी। एक महीने में जानकारी मिलनी चाहिए थी। इसके बाद रेलवे बोर्ड में प्रथम अपील अधिकारी के पास अपील की गई। रेलवे बोर्ड से उन्हें 28 अगस्त 2017 को जानकारी मिली। जानकारी देने में रेलवे बोर्ड की धीमी रफ्तार पर आवेदक थुल ने नाराजगी जताई हैै। उनका कहना है कि रेलवे बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट की समयसीमा तय नहीं करने से यह प्रोजेक्ट और कितने साल चलेगा, यह बताना बहुत मुश्किल है।